
TMC और EC में SIR विवाद, बूथ एजेंट्स को रोकने पर बढ़ा तनाव
चुनाव आयोग का BLAs को सुनवाई से रोकना और TMC का जोरदार विरोध बंगाल में मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक टकराव पर सवाल उठाता है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग (EC) ने राजनीतिक पार्टियों के बूथ-लेवल एजेंट्स (BLAs) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े सुनवाई में भाग लेने से रोकने का फैसला किया है। यह कदम राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ आयोग के राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है और मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। 31 दिसंबर को आयोग के दफ्तर में दोनों पक्षों के बीच बैठक और जमीन पर इस मुद्दे को लेकर झड़पों ने इस विवाद को स्पष्ट कर दिया।
TMC का विरोध
TMC ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है और कहा कि यह सुनवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता को कमजोर करता है। APDR के महासचिव रंजीत सुर ने कहा कि चुनाव आयोग न केवल पारदर्शी होना चाहिए, बल्कि ऐसा भी दिखना चाहिए। BLAs की मौजूदगी सुनवाई को अधिक पारदर्शी बनाती। सुर ने आयोग के निर्णय को संदेहजनक बताते हुए पूछा कि आखिर क्यों पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों के BLAs को सुनवाई में शामिल होने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे एजेंट हमेशा से चुनाव प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों, जैसे पोलिंग बूथ और मतगणना केंद्रों में उपस्थित रहते हैं।
BLAs की गैर-मौजूदगी से मतदाता असुरक्षित
सुर ने बताया कि BLAs की उपस्थिति गरीब, कमजोर या कम शिक्षित मतदाताओं के लिए विशेष रूप से मददगार होती। ऐसे मतदाता अक्सर अधिकारियों के सामने अपने दस्तावेज दिखाकर पहचान साबित करने में कठिनाई महसूस करते हैं। BLAs उन्हें मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करते हैं। चुनाव आयोग के अधिकारी कहते हैं कि राजनीतिक एजेंटों को सुनवाई में शामिल न करने का कारण भीड़ से बचाव और प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना है। केवल EROs, सहायक EROs, BLOs और माइक्रो-ऑब्जर्वर को ही सुनवाई कक्ष में अनुमति है।
वहीं, अब TMC ने आयोग से लिखित स्पष्टीकरण मांगा और चेतावनी दी कि यदि स्थिति बनी रही तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पार्टी के एक विधायक ने कहा कि BLAs और BLOs की मदद के बिना आम नागरिक जटिल पहचान प्रक्रिया से गुजरने में बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
हुगली और अन्य जिलों में विरोध-प्रदर्शन
हुगली जिले में स्थानीय TMC विधायक असित मजूमदार ने कई केंद्रों में कार्यवाही बाधित की और BLAs को मतदाताओं की मदद करने की अनुमति देने की मांग की। इसी तरह अन्य सुनवाई केंद्रों पर भी विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे प्रक्रिया अल्पकाल के लिए रोक दी गई।
अभिषेक बनर्जी करेंगे आंदोलन
TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि 2 जनवरी से वे सड़कों पर विरोध करेंगे और जनता के साथ खड़े रहेंगे। पार्टी ने कहा कि कोई अन्याय, कोई साजिश या डराने-धमकाने की कोशिश बंगाल की रीढ़ नहीं तोड़ सकती। अभिषेक बनर्जी हमेशा बंगाल के लोगों के अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए आगे रहे हैं।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के धमकाने वाले प्रयासों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोनों पक्षों के टकराव के कारण, SIR का यह विवाद पश्चिम बंगाल की नई अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले और भी गंभीर होने की आशंका है।

