फॉर्म 7 पर क्या अखिलेश यादव  कर रहे गलतबयानी, आंकड़ों में कहानी कुछ और
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फॉर्म 7 पर क्या अखिलेश यादव कर रहे गलतबयानी, आंकड़ों में कहानी कुछ और

यूपी में मतदाता सूची संशोधन को लेकर सपा ने फॉर्म 7 के जरिए समर्थकों के नाम हटाने का आरोप लगाया है, जबकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को पारदर्शी और नियम के मुताबिक बताया है।


यूपी की राजनीति में वोटर्स सत्यापन का मुद्दा जोरशोर से छाया हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग के जरिए बीजेपी वोट जोड़ने और काटने के खेल में जुटी हुई है। फार्म 6 और सात को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार निशाना भी साध रहे हैं। एसआईआर के तहत करीब सवा लाख मतदाताओं के नाम काटने के लिए आपत्तियां चुनाव आयोग के सामने है तो वहीं 51 लाख लोगों ने खुद नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है। अब ऐसी सूरत में सपा हो या बीजेपी या अन्य दल कौन कितना आगे बढ़कर नाम कटवाने या जुड़वाने में जुटा है। यह बड़ा सवाल है।

दावों और आपत्तियों के लिए 6 मार्च तक का समय

चुनाव आयोग ने दावों और आपत्तियों के लिए पहले 6 फरवरी का समय दिया था जिसे बढ़ाकर 6 मार्च कर दिया है। आयोग का कहना है कि अब तक जितने भी आवेदन आए है वो लोगों की तरफ से आए हैं। बूथ लेवल अधिकारी के पास जाकर लोगों ने अपनी शिकायतों को दर्ज कराया है। नाम को जोड़ने या काटने के लिए जो आवेदन मिले हैं उनमें सियासी दलों की भागीदारी 1 फीसद से भी कम है। आयोग के पास अब तक 51 लाख 43 हजार 360 लोगों ने फॉर्म 6 भरा है। इनमें से करीब 40284 आवेदन राजनीतिक दलों की तरफ से आए हैं। सपा और बीजेपी दोनों ने मिलाकर 36 हजार से अधिक फॉर्म जमा कराए हैं।

आयोग का कहना है कि करीब एक लाख 18 हजार 688 वोटर्स को लेकर आपत्तियां आई हैं। इसमें राजनीतिक दलों की तरफ से 1790 आपत्तियां हैं। बीजेपी की ओर से 1729 और सपा की ओर से 47 आपत्तियां हैं। यहां बता दें कि दावों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए 6 मार्च तक का समय है। 27 मार्च तक सुनवाई पूरी होगी और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को होगा। निर्वाचन आयोग का यह भी कहना है कि तारीख बढ़ाए जाने के बाद दावों और आपत्तियों के आवेदनों की संख्या में इजाफा हुआ है।

नवदीप रिणवा ने बताया है कि 6 जनवरी से 4 फरवरी करीब 30 दिनों में करीब 37 लाख 80 हजार लोगों ने नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 भरा था जबकि 82 हजार लोगों ने नाम हटाने के लिए फॉर्म सात भरा। औसतन एक लाख 26 हजार फॉर्म 6 और 2756 फॉर्म सात भरे जा रहे थे। बता दें कि एसआईआर से पहले कुल मतदाता 15.44 करोड़ थे और ड्राफ्ट लिस्ट के बाद यह संख्या 12.55 करोड़ हो गई है यानी कि करीब 2.89 करोड़ मतदाता घटे हैं।

दावे और आपत्तियां

नाम जोड़ने या नए रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म 6

नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने के लिए फॉर्म 7

नाम, पता या फोटो में सुधार के लिए फॉर्म 8

किस पार्टी ने कितने फार्म भरवाए

बीजेपी के पास करीब एक लाख 61 हजार बीएलए (बूथ लेवल एजेंट)। इन एजेंट्स ने करीब 25 हजार फॉर्म 6 और करीब 1729 फॉर्म सात भरवाए।

सपा के पास करीब एक लाख 57 हजार बीएलए, इन एजेंट्स ने करीब 11 हजार फॉर्म 6 और 47 फॉर्म-7 भरवाए

बीएसपी के पास करीब एक लाख 54 हजार बीएलए, इन एजेंट्स ने करीब 1761 फॉर्म 6 और 6 फॉर्म-7 भरवाए

कांग्रेस के पास करीब 96व हजार बीएलए, इन एजेंट्स ने करीब 1324 फॉर्म 6 भरवाए

अखिलेश यादव के आरोप

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव बार बार कह रहे हैं बीजेपी और चुनाव आयोग फॉर्म सात के जरिए उन वोटर्स का नाम हटा रहे हैं जो सपा के समर्थक हैं। उन्होंने जांच कराने की मांग की है। अखिलेश यादव का कहना है कि जो फॉर्म अज्ञात में भरे गए हैं उसकी जांच जरूरी है। यही नहीं जिन लोगों ने नाम काटने के लिए फॉर्म सात भरवाए हैं उनका नाम सार्वजनिक हो।

निर्वाचन आयोग की सफाई

चुनाव आयोग का कहना है कि पहली बात तो यह है कि फॉर्म सात थोक के भाव नहीं भरे जाते हैं और ना ही स्वीकार किया जाता है। सियासी दलों के बूथ लेवल एजेंट एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म सात ही जमा कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें अंडरटेकिंग भी देनी होती है। जब फॉर्म सात मिलता है तो ईआरओ आपत्तिकर्ता और जिसका नाम काटे जाने का आवेदन है दोनों को नोटिस भेजता है।

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