देश की अंतरिक्ष सुरक्षा पर खतरा? ISRO केंद्र के पास धड़ल्ले से खनन
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देश की अंतरिक्ष सुरक्षा पर खतरा? ISRO केंद्र के पास धड़ल्ले से खनन

बेंगलुरु के बायलालू स्थित ISRO के इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क के पास पत्थर खनन से कंपन और ब्लास्टिंग हो रही है, जिससे अंतरिक्ष मिशन और सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है।


मंगलयान और चंद्रयान जैसे ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियानों के दौरान देश का गौरव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाला और ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अभियानों में भारतीय सशस्त्र बलों की मदद करने वाला इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (IDSN) आज गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। यह खतरा किसी बाहरी दुश्मन से नहीं, बल्कि देश के भीतर चल रही एक सामान्य-सी दिखने वाली गतिविधि पत्थर खनन से पैदा हो रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित यह अत्याधुनिक दूरसंचार ढांचा कर्नाटक के बेंगलुरु के पास बायलालू में स्थापित है, जो ISRO मुख्यालय के नजदीक स्थित है। इस स्थान का चयन खास भौगोलिक कारणों से किया गया था। यह इलाका कटोरे (सॉसर) जैसी आकृति वाला है, जिससे रेडियो-फ्रीक्वेंसी में न्यूनतम बाधा आती है। लेकिन अब यही अहम केंद्र आसपास हो रही अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों के कारण खतरे में पड़ गया है।

खनन गतिविधियों से संवेदनशील कार्यप्रणाली को खतरा

बेंगलुरु-दक्षिण तालुका के तावरकेरे होबली क्षेत्र में, बायलालू स्थित IDSN केंद्र से महज एक किलोमीटर की दूरी पर लगातार पत्थर खनन किया जा रहा है। पास के सुलीवारा गांव में करीब 220 एकड़ क्षेत्र में 24 स्टोन क्रशर सक्रिय हैं, जहां विस्फोटों के जरिए खनन किया जा रहा है। इन धमाकों से इलाके में लगातार कंपन महसूस हो रहा है, साथ ही तेज शोर और धूल का गुबार भी बना रहता है।

इन गतिविधियों से IDSN के महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य प्रभावित होने का आरोप है। यह केंद्र रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अभियानों जैसे पिछले वर्ष का ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाया था।

कंपन, शोर और धूल से उपकरणों को नुकसान की आशंका

स्थानीय लोगों और केंद्र के कर्मचारियों का कहना है कि जमीन में कंपन, अत्यधिक शोर और उड़ती धूल से न केवल कर्मचारियों को परेशानी हो रही है, बल्कि अत्यंत संवेदनशील उपकरणों को भी खतरा पैदा हो गया है। उपकरणों पर धूल जमने से फ्रीक्वेंसी संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि विस्फोटों में इस्तेमाल होने वाले डायनामाइट और जिलेटिन स्टिक से प्रयोगशाला इमारतों को भी गंभीर नुकसान हो सकता है। इस आशंका को बल इस बात से मिलता है कि आसपास के कई घरों में लगातार विस्फोटों के कारण दरारें पड़ चुकी हैं।

एंटेना पर असर डाल सकती हैं कंपनें

ISRO के सूत्रों ने IDSN पर मंडरा रहे खतरे की पुष्टि की है। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बायलालू केंद्र के एंटेना में अत्यंत संवेदनशील एम्पलीफायर लगे हैं। उन्होंने कहा पत्थर विस्फोटों से जमीन में पैदा होने वाली कंपन एंटेना तक पहुंचती है। इससे संवेदनशील तरंगों के रिसेप्शन में बाधा आ सकती है और संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

यदि तरंगों में गड़बड़ी आती है, तो गहरे अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों से सही जानकारी प्राप्त करना लगभग असंभव हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई उपग्रह एक लाख किलोमीटर दूर है, तो पृथ्वी में कंपन के कारण कंट्रोल सेंटर में उसकी दूरी 75,000 किलोमीटर दिखाई दे सकती है। इससे उपग्रह का नेविगेशन डेटा प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने आगे बताया कि उपग्रहों से आने वाली तरंगें IDSN बायलालू केंद्र के विशाल एंटेना (18×32 मीटर) द्वारा ग्रहण की जाती हैं और फिर ISRO के पीण्या स्थित टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क केंद्र में उनका विश्लेषण किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीण्या में इतने बड़े एंटेना लगाने के लिए उपयुक्त जगह नहीं है, इसलिए बायलालू पूरे अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रह अन्वेषण मिशनों के लिए बेहद अहम स्थान बना हुआ है। विस्फोटों से एंटेना की संरचनात्मक सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

ISRO ने की थी शिकायत, कार्रवाई नहीं?

स्थानीय निवासियों के अनुसार, जनवरी 2021 में ISRO ने पत्थर खनन से हो रही समस्याओं को लेकर बेंगलुरु शहरी जिले के जिलाधिकारी और कर्नाटक खनन एवं भूविज्ञान विभाग से शिकायत की थी। ISRO ने अपने प्रमुख IDSN केंद्र के आसपास खनन पर प्रतिबंध या सख्त नियंत्रण की मांग की थी, लेकिन आरोप है कि सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, तावरकेरे पुलिस थाने के निरीक्षक डी. मोहन कुमार ने कहा कि ISRO की ओर से अवैध खनन को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है और खनन एवं भूविज्ञान विभाग अनियमितताओं की निगरानी कर रहा है। The Federal ने ISRO से इस मुद्दे पर उसका पक्ष जानने की कोशिश की है और जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

सरकार की उदासीनता का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर ISRO देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर इतने संवेदनशील इलाके में पत्थर खनन पर रोक न लगना सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। सुलीवारा गांव के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सरकार को तुरंत पत्थर खनन पर नियंत्रण लगाना चाहिए। ISRO केंद्र के आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए।”

घुसपैठ भी बनी चिंता का विषय

पत्थर खनन के अलावा बायलालू स्थित IDSN केंद्र को घुसपैठ की समस्या का भी सामना करना पड़ा है। कुछ वर्ष पहले दो अज्ञात लोग इस महत्वपूर्ण अंतरिक्ष केंद्र के पास संदिग्ध रूप से घूमते पाए गए थे। सुरक्षा कर्मियों के पूछताछ करने पर वे वहां से चले गए। बाद में पुलिस जांच में उनकी पहचान नहीं हो सकी।

इसके अलावा, स्टोन क्रशर में बाहर से आए मजदूर काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें कुछ अवैध बांग्लादेशी भी शामिल हो सकते हैं। बताया जाता है कि खनन इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों का पूरा ब्योरा प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है।

(यह लेख सबसे पहले द फेडरल कर्नाटक में प्रकाशित हुआ था)

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