
अजित पवार के निधन के बाद सियासी चाल, 'सामना' ने बीजेपी को बताया मास्टरमाइंड
शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया कि अजित पवार के निधन के चार दिन बाद सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाना बीजेपी की रणनीति थी, इससे एनसीपी एकीकरण पर भी विराम लगा।
महाराष्ट्र की सियासत में इस समय चर्चा इस बात पर है कि क्या बीजेपी ने सोची समझी रणनीति के तहत सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाया। क्या बीजेपी के नेता नहीं चाहते थे कि एनसीपी के दोनों धड़ों का एकीकरण हो। इस विषय पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बड़ा दावा किया है। शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के निधन के महज चार दिन बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे मुख्य रूप से बीजेपी की रणनीति थी।
शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित लेख में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे घटनाक्रम की मास्टरमाइंड बीजेपी थी। लेख में यह भी कहा गया है कि बीजेपी नेतृत्व के साथ-साथ एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी नहीं चाहते थे कि एनसीपी एक बार फिर एकजुट हो।
अजित पवार के निधन के बाद बदले हालात
28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया था। इसके बाद शनिवार को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक हलकों में बल्कि पवार परिवार के भीतर भी हलचल मचा दी। एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार ने खुद कहा कि उन्हें इस शपथ ग्रहण की कोई जानकारी नहीं थी। ‘सामना’ के मुताबिक, सुप्रिया सुले सहित परिवार के किसी भी सदस्य को सुनेत्रा पवार के शपथ लेने की सूचना नहीं दी गई थी। दावा किया गया कि वह चुपचाप बारामती से मुंबई रवाना हो गईं और किसी को कुछ बताए बिना शपथ ले ली।
12 फरवरी को तय था विलय?
लेख में यह भी दावा किया गया है कि अजित पवार के जीवित रहते एनसीपी के दोनों धड़ों के एकीकरण की चर्चा तेज हो गई थी। यहां तक कहा जा रहा था कि 12 फरवरी को दोनों पार्टियों के विलय की तारीख भी तय हो चुकी थी। लेकिन अजित पवार के निधन के बाद हालात बदल गए और अब कोई भी इस दावे की पुष्टि करने को तैयार नहीं है।
शिवसेना (UBT) का कहना है कि अजित पवार के जाने के बाद एनसीपी में कुछ नेताओं की महत्वाकांक्षाएं और तेज हो गईं, जिससे पार्टी के भीतर उपमुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई।
अंदरूनी खींचतान और जल्दबाजी में फैसला?
‘सामना’ में यह भी कहा गया है कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच रिश्ते सहज नहीं हैं। ऐसे हालात में जल्दबाजी में सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, ताकि पवार परिवार और पार्टी के भीतर एकता का संदेश दिया जा सके। हालांकि शिवसेना (UBT) का आरोप है कि भले ही सुनेत्रा पवार को सत्ता की अगली सीट पर बैठा दिया गया हो, लेकिन सरकार की स्टीयरिंग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथ में ही है। पार्टी ने दावा किया कि फडणवीस की कृपा से ही सुनेत्रा पवार और एकनाथ शिंदे सत्ता में बने हुए हैं।
‘गूंगी गुड़िया’ या नई सियासी भूमिका?
शिवसेना (UBT) ने यह भी कहा कि संभव है कि सुनेत्रा पवार आगे चलकर ‘गूंगी गुड़िया’ साबित न हों और खुलकर अपनी भूमिका निभाएं। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि एक ओर वह ‘सनातनी मिजाज’ वाली बीजेपी के साथ खड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर पति की अंतिम क्रियाएं पूरी किए बिना ही सक्रिय राजनीति में उतरकर हिंदू रीति-रिवाजों की अनदेखी कर रही हैं।शिवसेना (UBT) का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम केवल एक नियुक्ति नहीं बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े शक्ति संतुलन और रणनीतिक खेल की ओर इशारा करता है।

