
Supertech को SC से बड़ा झटका: अब NBCC पूरी करेगा 16 अटकी परियोजनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के 51 हजार खरीदारों को दी बड़ी राहत, एनबीसीसी 3 साल में पूरा करेगी 16 प्रोजेक्ट्स, प्रोजेक्ट्स की लिस्ट और कोर्ट का आदेश यहां पढ़ें।
Relief To Supertech Flat Buyers: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के हजारों घर खरीदारों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सुपरटेक की 16 अधूरी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी (NBCC) को सौंप दी है। यह फैसला उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है, जो पिछले 10-12 वर्षों से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुपरटेक इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है। कंपनी पर फंड की हेराफेरी और गबन के गंभीर आरोप भी लगे हैं। अब सरकारी निर्माण एजेंसी एनबीसीसी इन घरों को बनाकर खरीदारों को सौंपेगी।
तीन साल के भीतर मिलेगा घर का कब्जा
सर्वोच्च न्यायालय ने एनबीसीसी को एक सख्त समय सीमा दी है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, सभी 16 परियोजनाओं का निर्माण कार्य अधिकतम तीन वर्षों के भीतर पूरा करना होगा। इस फैसले से लगभग 50,000 से 51,000 घर खरीदारों को सीधा लाभ मिलेगा। न्यायमूर्ति ने पाया कि बिल्डर की लापरवाही के कारण आम जनता का पैसा लंबे समय से फंसा हुआ था। कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के पुराने आदेश को भी बरकरार रखा है। अब एनबीसीसी इन प्रोजेक्ट्स के हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएगी।
इन 16 परियोजनाओं का होगा कायाकल्प
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कुल तीन चरणों में काम पूरा किया जाएगा। पहले फेज में ग्रेटर नोएडा और नोएडा की प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें इको विलेज 2, रोमानो, केपटाउन और जार सुइट्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं। साथ ही इको विलेज 3, स्पोर्ट्स विलेज और इको सिटी का काम भी प्राथमिकता पर होगा। दूसरे फेज में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित अपकंट्री और मेरठ स्पोर्ट्स सिटी जैसी साइट्स को लिया गया है। वहीं तीसरे फेज में गुरुग्राम की हिल टाउन और अरावली जैसी परियोजनाओं का निर्माण पूरा किया जाएगा। इसमें देहरादून और बेंगलुरु के प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।
कोर्ट ने लगा दी है दखल पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी है। भविष्य में कोई भी अन्य अदालत या फोरम इन निर्देशों के कार्यान्वयन में बाधा नहीं डालेगा। इसका मतलब है कि अब निर्माण कार्य में किसी भी कानूनी अड़चन की संभावना खत्म हो गई है। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना और उन्हें जल्द घर दिलाना है। घर खरीदारों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है।
फंड के गबन पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुपरटेक के प्रबंधन पर तीखी टिप्पणी की। जांच में सामने आया कि प्रोजेक्ट्स के लिए लिया गया पैसा कहीं और डाइवर्ट किया गया था। साल 2010 से 2012 के बीच शुरू हुए ये प्रोजेक्ट्स आज तक अधूरे हैं। बिल्डर की वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वह निर्माण पूरा करने में अक्षम है। यही कारण है कि कोर्ट ने प्रबंधन का नियंत्रण एनबीसीसी को देने का फैसला किया। अब पारदर्शी तरीके से काम होगा और खरीदारों का पैसा सुरक्षित रहेगा।

