
निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश बहाल हुए, जांच जारी रहेगी
पंजाब के फ़िरोज़पुर निवासी इन्वेस्टर विश्वजीत दत्ता की शिकायत के बाद आईएएस अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था।उनपर आरोप था कि अपने करीबी कर्मचारी निकांत जैन के माध्यम से उन्होंने रिश्वत माँगी।
Suspended UP IAS officer Abhishek Prakash reinstated : भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित उत्तर प्रदेश के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश एक साल बाद बहाल हो गए हैं। 15 मार्च से उनकी सेवा बहाली करने का आदेश जारी हुआ।आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि निलंबन खत्म होने के बावजूद अभिषेक प्रकाश के ख़िलाफ़ विभागीय जाँच चलती रहेगी।पंजाब के फ़िरोज़पुर निवासी इन्वेस्टर विश्वजीत दत्ता की शिकायत पर इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ आईएएस अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था।
निलंबन अवधि खत्म होने के बाद अभिषेक प्रकाश बहाल,आदेश जारी-
उत्तर प्रदेश शासन ने भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बहाल कर दिया है।निलंबन की अवधि खत्म होने के बाद उनकी बहाली के आदेश जारी कर दिए गए हैं।हालाँकि दो दिन से ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में इसकी चर्चा थी पर शनिवार को यह आदेश जारी कर दिया गया। नियुक्ति अनुभाग-5 की ओर से जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें फिर से सेवा में बहाल किया गया है।15 मार्च से सेवा में बहाल करने का आदेश जारी किया गया है।14 मार्च 2026 को उनकी निलंबन की अवधि ख़त्म हो रही है।इसके बाद 15 मार्च से उनकी सेवा बहाली का आदेश जारी किया गया है।नियमानुसार राज्यपाल की अनुमति से शासन ने यह आदेश जारी किया है।आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बहाली के बावजूद उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।
एक करोड़ रिश्वत मांगने का लगा था आरोप-
पंजाब के फ़िरोज़पुर निवासी इन्वेस्टर विश्वजीत दत्ता की शिकायत के बाद आईएएस अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था।उनपर आरोप था कि अपने करीबी कर्मचारी निकांत जैन के माध्यम से अभिषेक प्रकाश ने रिश्वत माँगी है।उस समय अभिषेक प्रकाश इन्वेस्ट यूपी के सीईओ थे।शिकायत में कहा गया था कि सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की फाइल को मंज़ूर करने के लिए विश्वजीत दत्ता से एक करोड़ का कमीशन मांगा गया था।मुख्यमंत्री को इसकी शिकायत करने के बाद STF से जाँच करायी गई थी।एसटीएफ ने बाबू निकांत जैन को गिरफ्तार किया था।निकांत जैन ने ये स्वीकार किया था कि अभिषेक प्रकाश की सहमति से ही उसने कारोबारी से रिश्वत माँगी।इन्वेस्ट यूपी की पत्रावली के माध्यम से आरोपों की जांच की गई थी।इसके बाद शासन ने 20 मार्च 2025 को अभिषेक प्रकाश के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1969 के नियम-8 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था।
साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने चार्जशीट रद्द की थी
इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुँचा था।शिकायत दर्ज़ कराने वाले कारोबारी कोर्ट में यह कह कर मुकर गए थे कि गलतफहमी के चलते अभिषेक प्रकाश का नाम इसमें आया।दो दिन पहले ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में अभिषेक प्रकाश के खिलाफ चार्जशीट को रद्द कर दिया था।इसके बाद अब अभिषेक प्रकाश की बहाली का आदेश जारी किया गया है।हालाँकि विभागीय जाँच चलती रहेगी।

