
त्रिकोणीय गठबंधन जंग: DMK–Congress–TVK के बीच सत्ता की लड़ाई तेज
'द फेडरल' की कांग्रेस, डीएमके और TVK के प्रमुख नेताओं से हुई बातचीत से कई अहम संकेत मिले हैं। शुरुआत में कांग्रेस को ठंडा रवैया दिखाने वाली डीएमके अब उसे गठबंधन में बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है।
तमिलनाडु में हाई-वोल्टेज विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ डीएमके, उसकी सहयोगी कांग्रेस और अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के बीच त्रिकोणीय खींचतान उभर आई है। विजय के पिता और वरिष्ठ फिल्मकार एसए चंद्रशेखर के बयानों ने संभावित गठबंधन बदलाव को लेकर अटकलों को हवा दी है। वहीं, अंदरूनी मतभेद और रणनीतिक देरी ने राजनीतिक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। बातचीत लंबी खिंचने के साथ यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि कांग्रेस अपने पुराने सहयोगी डीएमके के साथ बनी रहेगी या सत्ता में बढ़त के लिए नई पार्टी TVK की ओर रुख करेगी।
विजय के पिता आशावादी
चंद्रशेखर ने तिरुवरूर में पत्रकारों से कहा कि विजय की जीत की संभावना उज्ज्वल है। वह सरकार में सत्ता साझा करने की बात कर रहे हैं। कांग्रेस को इसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के अतीत की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी ने दूसरों का समर्थन करते-करते खुद को कमजोर कर लिया है। लगातार किसी न किसी पार्टी का समर्थन करने से कांग्रेस थक चुकी है। अगर वह सत्ता में आती है तो अपनी पुरानी पहचान वापस पा सकती है। चंद्रशेखर ने यह भी जोर दिया कि जनता विजय के स्थापित दलों के साथ गठबंधन के खिलाफ है। लोग मानते हैं कि विजय को किसी के साथ हाथ नहीं मिलाना चाहिए। सत्ता में हिस्सेदारी लिए बिना समर्थन देने से कांग्रेस कमजोर हुई है। विजय कह रहे हैं—‘हम आपको (कांग्रेस को) कुछ सत्ता देंगे।’ कांग्रेस को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को TVK के साथ गठबंधन का न्योता भी दिया, जबकि खबरें हैं कि कांग्रेस ने पहले ही डीएमके के साथ सीट-बंटवारे की बातचीत शुरू कर दी है।
TVK का सतर्क रुख
हालांकि, TVK ने चंद्रशेखर की टिप्पणियों से दूरी बना ली है। पार्टी के उप महासचिव राजमोहन ने कहा कि बिना किसी आधार के TVK को लेकर गठबंधन की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने सभी अफवाहों से इनकार किया। रविवार को चेंगलपट्टू में हुई चुनावी सलाह बैठक में विजय ने कहा था कि वे मित्र दलों के साथ गठबंधन या अकेले चुनाव लड़ने—दोनों विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस TVK से बातचीत भी नहीं करना चाहती, जबकि TVK किसी तरह कांग्रेस को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि विजय अपने पिता के जरिए गुप्त गठबंधन वार्ताओं की जानकारी लीक कर रहे हैं।
डीएमके–कांग्रेस में तकरार
इस बीच कांग्रेस अपने गठबंधन विकल्पों को लेकर अंदरूनी मंथन से गुजर रही है। प्रवीण चक्रवर्ती, मणिकम टैगोर और जोतिमणि जैसे नेताओं ने सत्ता में हिस्सेदारी की मांग उठाई, जिससे डीएमके खेमे में नाराजगी फैल गई। मदुरै नॉर्थ से डीएमके विधायक जी थलपति ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस “बूथ समितियां तक नहीं बना पाई”, जिससे विवाद और बढ़ गया। तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने थलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती ने पार्टी नेताओं से गठबंधन मामलों पर चुप रहने को कहा।
खबर है कि डीएमके कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीट-बंटवारे की औपचारिक बातचीत शुरू करने जा रही है। इस सिलसिले में डीएमके सांसद कनिमोझी की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात प्रस्तावित है। इससे दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच चल रहे विवाद पर विराम लगने की उम्मीद है।
बदला हुआ खेल
'द फेडरल' की कांग्रेस, डीएमके और TVK के प्रमुख नेताओं से हुई बातचीत से कई अहम संकेत मिले हैं। शुरुआत में कांग्रेस को ठंडा रवैया दिखाने वाली डीएमके अब उसे गठबंधन में बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। तमिलनाडु में एआईएडीएमके के साथ गठबंधन के जरिए एनडीए के मजबूत होने से सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। करीब 20 साल से कांग्रेस के साथ गठबंधन में रही डीएमके यह भी चाहती है कि कांग्रेस को ज्यादा सौदेबाजी की ताकत न मिले। 2021 के चुनाव में कांग्रेस को 25 सीटें मिली थीं; इस बार डीएमके उसे 28–30 विधानसभा सीटें और एक राज्यसभा सीट देने पर विचार कर रही है।
TVK का दांव
वहीं, TVK पीछे हटने को तैयार नहीं है। पार्टी डीएमके और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी को और हवा दे रही है और कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए आक्रामक कोशिशें कर रही है। डीएमके को आशंका है कि TVK का विकल्प दिखाकर कांग्रेस ज्यादा सीटें, मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी और अतिरिक्त राज्य स्तरीय पदों की मांग कर सकती है। इसी वजह से डीएमके सीट-बंटवारे जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है। डीएमके नेतृत्व को भरोसा है कि वह विजय के अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति से निपट सकता है, लेकिन विजय–एनडीए गठबंधन की आशंका उसे परेशान कर रही है, जो हालिया आंध्र प्रदेश चुनावों जैसे नतीजे दे सकती है।
पार्टी का मानना है कि विजय चुनाव की तारीख घोषित होने तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाएंगे और उसे उम्मीद है कि कांग्रेस डीएमके के साथ बनी रहेगी, ताकि विजय एनडीए में न जाएं। इसी कारण एमके स्टालिन की पार्टी सीट-बंटवारे की समिति बनाने में देरी कर रही है।
कांग्रेस की दुविधा
कांग्रेस डीएमके से तुरंत अलग क्यों नहीं हो रही और बातचीत का इंतजार क्यों कर रही है—इसका एक कारण यह भी है कि TVK फिलहाल उसे लगभग 40 प्रतिशत सीटों की पेशकश कर रही है, जो समय के साथ बढ़ सकती है, ऐसा कांग्रेस नेतृत्व मानता है। साथ ही, कांग्रेस डीएमके के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहती। यही वजह है कि उसने अब तक TVK के साथ आधिकारिक तौर पर गठबंधन वार्ता शुरू नहीं की है।

