
यूरोप से लौटते ही एक्शन में तेजस्वी यादव, संगठन में करेंगे बड़े बदलाव; निकलेंगे बिहार यात्रा पर
तेजस्वी यादव यूरोप से लौटकर संगठन सुधार, भीतरघातियों पर कार्रवाई और पंचायत चुनाव के लिए तैयारी में जुटेंगे। उनकी अगली रणनीति जनता के बीच जाकर पार्टी की ताकत बढ़ाने और राजद को बिहार में मजबूत करने पर केंद्रित होगी।
Tejashwi Yadav: यूरोप की छुट्टियों से लौटते ही तेजस्वी यादव आरजेडी की राजनीति में तूफ़ान लाने वाले हैं। विधानसभा चुनाव की हार के बाद अब पार्टी में संगठन सुधार और पंचायत चुनाव की तैयारी उनकी प्राथमिकता है। तेजस्वी इस दफा महज बैठकों और रणनीतियों तक ही सीमित नहीं रहने वाले, वह जनता के बीच उतरकर अपनी राजनीति की ऊर्जा दिखाने वाले हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वे पटना और बिहार की राजनीति में नया पैंतरा रच पाएंगे?
तेजस्वी यादव इस हफ्ते से पार्टी में सक्रिय हो जाएंगे और प्रदेश अध्यक्ष, सीनियर नेताओं के साथ बैठक करके आगे की रणनीति तय करेंगे। तेजस्वी इस दौरान 50 जिला अध्यक्ष और 265 प्रखंड अध्यक्षों की नियुक्ति करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को भी बदला जा सकता है। मकर संक्रांति के बाद तेजस्वी बिहार में यात्रा पर निकलेंगे और जनता से मिलकर पार्टी की मजबूती पर काम करेंगे।
तेजस्वी की अगली रणनीति
यूरोप से लौटने के बाद तेजस्वी यादव पटना में प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इसमें आने वाले दिनों की रणनीति तय होगी। पिछले विधानसभा चुनाव में जिला और प्रखंड कमेटियों के सक्रिय न होने और बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहने को हार का बड़ा कारण बताया गया। अब तेजस्वी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देंगे। मकर संक्रांति (14 जनवरी) पर राबड़ी आवास, पटना में ‘चूड़ा-दही’ भोज का आयोजन करने का फैसला भी इसी बैठक में होगा। इस दिन लालू-राबड़ी सहित राजद के सभी नेता-कार्यकर्ता जुटते हैं। लालू प्रसाद अभी दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और मकर संक्रांति पर पटना लौट सकते हैं। उनकी बड़ी बेटी मीसा भारती भी पटना आएंगी।
राजद के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को बदला जा सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें OBC और गैर यादव वोट बैंक जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन चुनाव परिणाम संतोषजनक नहीं रहे। मंगनी लाल उम्रदराज हैं और उनके कार्यकाल में कई नेताओं में अनुशासन की कमी देखी गई। कई नेता टिकट न मिलने पर बागी बन गए।
भीतरघातियों की पहचान
राजद में 400 से अधिक भीतरघातियों की पहचान हो चुकी है। इसके लिए पार्टी ने पंचायत से लेकर जिला स्तर तक फीडबैक लिया है। तेजस्वी यादव अब उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करेंगे, जिन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया।
मकर संक्रांति के बाद तेजस्वी की यात्रा
तेजस्वी यादव मकर संक्रांति के बाद बिहार में यात्रा पर निकलेंगे। जनता के बीच जाकर वे बताएंगे कि चुनाव हारने के पीछे के क्या कारण थे। साल 2020 में भी जब वे सरकार नहीं बना पाए थे, तब उन्होंने धन्यवाद यात्रा की थी। इस बार भी उनका अगला कदम जनता के बीच जाकर संघर्ष करना होगा।
अगला लक्ष्य: पंचायत चुनाव
बिहार में इसी साल पंचायत चुनाव होने हैं। हालांकि ये चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते, लेकिन पार्टियों का लक्ष्य अपने कार्यकर्ताओं को जिताना होता है। राजद के लिए यह चुनाव निचले स्तर पर संगठन मजबूत करने का मौका है। राज्य में 8000 से अधिक पंचायतें हैं, जिनमें मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए चुनाव होंगे।
विधानसभा चुनाव में मिली हार
विधानसभा चुनाव में NDA ने 202 सीटें जीत लीं, जबकि महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। राजद को केवल 25 सीटें मिलीं। इसके बाद तेजस्वी यादव ने विधायकों, सांसदों और उम्मीदवारों की बैठक बुलाई और हार की समीक्षा की।
नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे तेजस्वी
जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे और मैदान नहीं छोड़ेंगे। लालू यादव और नीतीश कुमार भी हारने के बाद वापस आए थे। जनता की वेतन-पेंशन, अपराध, अतिक्रमण और माफिया की समस्या को लेकर तेजस्वी कई मुद्दों पर आंदोलन खड़ा कर सकते हैं।

