
तेजस्वी को रोहिणी आचार्य की तंजभरी नसीहत, 'समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी है आत्ममंथन'
रोहिणी ने इशारों-इशारों में तेजस्वी के करीबी नेताओं पर निशाना साधते हुए लिखा कि अपने आसपास बैठे ‘चिह्नित गिद्धों’ को हटाने का साहस दिखाए बिना किसी भी समीक्षा का कोई अर्थ नहीं है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक हो गए हैं। किडनी डोनेट कर सुर्खियों में रही उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर एक बार फिर परोक्ष हमला बोला है। यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब तेजस्वी यादव ने पटना में पार्टी सांसदों और कोर कमेटी के साथ अहम बैठक की।
तेजस्वी की इस बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी आत्ममंथन और जिम्मेदारी लेना है। उन्होंने इशारों-इशारों में तेजस्वी के करीबी नेताओं पर निशाना साधते हुए लिखा कि अपने आसपास बैठे ‘चिह्नित गिद्धों’ को हटाने का साहस दिखाए बिना किसी भी समीक्षा का कोई अर्थ नहीं है। माना जा रहा है कि उनका इशारा तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव की ओर था, जो इस बैठक में मौजूद थे।
विदेश दौरे के बाद सक्रिय हुए तेजस्वी
करीब दो महीने पहले हुए चुनावी नुकसान और विदेश दौरे से लौटने के बाद तेजस्वी यादव पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने पटना स्थित आवास पर राजद सांसदों और कोर कमेटी की बैठक बुलाई। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, राजनीतिक रणनीति और आगामी बिहार विधानमंडल के बजट सत्र को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
इस बैठक का मुख्य एजेंडा 2 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति रहा। नेताओं को सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों, विपक्ष की भूमिका मजबूत करने और सरकार के खिलाफ एकजुट होकर रणनीतिक हमला बोलने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने अपनी आगामी बिहार यात्रा को लेकर भी पार्टी नेताओं से फीडबैक लिया।
लगातार मुखर हैं रोहिणी आचार्य
विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही रोहिणी आचार्य लगातार तेजस्वी यादव और उनके करीबी नेताओं पर हमलावर हैं। इससे पहले 10 जनवरी को भी उन्होंने X पर एक पोस्ट के जरिए तेजस्वी और उनके सहयोगियों पर तीखा तंज कसा था। उस पोस्ट में उन्होंने ‘बड़ी विरासत’ को नुकसान पहुंचाने के लिए बाहरी नहीं, बल्कि ‘अपने ही लोगों’ को जिम्मेदार बताया था और नेतृत्व में विवेक की कमी पर सवाल उठाए थे।
चुनावी हार के बाद बढ़ा पारिवारिक तनाव
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से लालू परिवार के भीतर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले संजय यादव और रमीज नेमत पर परिवार के भीतर ही आरोप लगते रहे हैं। तेजप्रताप यादव पहले ही इन नेताओं को ‘जयचंद’ करार दे चुके हैं और अब रोहिणी आचार्य भी खुलकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं।
विवाद की जड़ें चुनाव से पहले की
रोहिणी और तेजस्वी के बीच तनाव सिर्फ चुनाव परिणामों के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले भी सामने आ चुका है। 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान पटना में एक घटना को लेकर रोहिणी नाराज हो गई थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस तस्वीर पर आपत्ति जताई थी, जिसमें तेजस्वी यादव की गाड़ी की फ्रंट सीट पर उनके करीबी संजय यादव बैठे नजर आए थे। रोहिणी ने लिखा था कि पार्टी के शीर्ष नेता की जगह किसी और का बैठना उन्हें स्वीकार नहीं है।
इस पोस्ट के बाद रोहिणी ने कुछ समय के लिए अपना सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट कर लिया था और परिवार के सदस्यों को अनफॉलो भी कर दिया था।
परिवार से नाता तोड़ने तक की घोषणा
चुनावी हार की जिम्मेदारी को लेकर रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव और उनके करीबी नेताओं पर सीधे आरोप लगाए थे। उन्होंने यहां तक दावा किया कि राबड़ी आवास में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और चप्पल उठाने जैसी स्थिति बनी। रोहिणी ने सार्वजनिक रूप से राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने तक की बात कही थी।
मीडिया में दिए एक बयान में रोहिणी ने कहा था कि उनका अब कोई परिवार नहीं है और उन्हें घर से बाहर किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब पूरी दुनिया पार्टी की हालत पर सवाल कर रही है, तो चुनावी हार की जिम्मेदारी लेने से नेतृत्व क्यों बच रहा है।

