
परिसीमन फॉर्मूले पर तेलंगाना CM का विरोध, 'उत्तर को फायदा-हाशिए पर दक्षिण'
रेवंत रेड्डी ने कहा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन और सीट बढ़ोतरी से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घटेगा और देश का राजनीतिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी (A Revanth Reddy) ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) अभ्यास पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर सीटों में वृद्धि, खासकर महिला आरक्षण लागू करने के साथ, दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय कर सकती है।
हैदराबाद में विधान परिषद परिसर में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान रेड्डी ने कहा कि यदि केवल जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो इससे दक्षिण भारत के राज्यों को भारी नुकसान होगा। उनका मानना है कि ऐसा कदम देश के राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों को अत्यधिक प्रभावशाली बना सकता है।
रेड्डी ने चेतावनी दी कि “शासन में बिना नियंत्रण के वर्चस्व तानाशाही की ओर ले जा सकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इन बदलावों के जरिए “कठोर बहुमत” हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि के प्रस्ताव का भी विरोध किया और कहा कि इससे दक्षिणी राज्यों को हाशिए पर धकेला जाएगा, जबकि उत्तरी राज्यों को ज्यादा फायदा मिलेगा।
रेड्डी ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के तहत तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी, यानी 66 सीटों की बढ़ोतरी। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार जो एनडीए के मजबूत गढ़ माने जाते हैं वहां सीटें 120 से बढ़कर 180 हो सकती हैं, यानी 60 सीटों की बढ़ोतरी।
इसके अलावा, यदि दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, पंजाब और झारखंड जैसे राज्यों की संभावित सीट बढ़ोतरी को भी इसमें जोड़ दिया जाए, तो यह कुल मिलाकर 471 सीटों का एक बड़ा समूह बन जाएगा। यह संख्या 816 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के आंकड़े 408 से काफी ज्यादा होगी। इसके मुकाबले पांचों दक्षिणी राज्यों के पास केवल 195 सीटें होंगी।
तेलंगाना का उदाहरण देते हुए रेड्डी ने बताया कि राज्य के पास अभी 17 लोकसभा सीटें हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के पास 80 सीटें हैं। यानी दोनों के बीच 63 सीटों का अंतर है। यदि समान वृद्धि लागू होती है, तो तेलंगाना को 9 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी, जबकि उत्तर प्रदेश को 40 सीटों का फायदा होगा, जिससे यह अंतर बढ़कर 94 सीटों तक पहुंच जाएगा।
रेड्डी ने सुझाव दिया कि यदि केंद्र सरकार परिसीमन लागू करना ही चाहती है, तो राज्यों के बीच मौजूदा प्रतिनिधित्व का अंतर बरकरार रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच सीटों का जो अंतर है, उसे बनाए रखना ही सबसे बेहतर समाधान होगा।”इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह केरल में चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के लिए दक्षिणी राज्यों के नेताओं की बैठक तेलंगाना में बुलाने की कोशिश करेंगे।

