
जिस टेंट सिटी का उद्घाटन पीएम ने किया, NGT ने उस पर सवाल उठाया, नियमों के उल्लंघन का आरोप
वाराणसी में यह टेंट सिटी वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को भुनाने के लिए विकसित की गई थी।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के तट (नदी तल) पर वर्ष 2023 में स्थापित की गई ‘टेंट सिटी’ में पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन किया गया। इसकी स्थापना और संचालन में नियमों की अवहेलना हुई है। यह बात ट्रिब्यूनल के हालिया आदेश में कही गई है।
NGT की प्रधान पीठ, जिसकी अध्यक्षता चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल कर रहे थे, उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि टेंट सिटी नदी के तल और नदी के पानी को प्रदूषित कर रही है तथा वनस्पति और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचा रही है।
नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बीच, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटित वाराणसी टेंट सिटी को शहरी निकाय ने समेट दिया।
एनजीटी ने 8 जनवरी को दिए अपने आदेश में कहा, “हम पाते हैं कि प्रतिवादी संख्या 11 और 12 (दो निजी कंपनियां) द्वारा टेंट सिटी को पर्यावरणीय मानकों और रिवर गंगा (री-जुवेनेशन, प्रोटेक्शन एंड मैनेजमेंट) अथॉरिटीज ऑर्डर, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए स्थापित और संचालित किया गया, जिसके लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई थी, लेकिन उसकी वसूली नहीं की गई। इसलिए इसे शीघ्रता से वसूल किया जाना आवश्यक है।”
एनजीटी की प्रधान पीठ उस आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि टेंट सिटी नदी के तल और नदी के पानी को प्रदूषित कर रही है और वनस्पति व जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचा रही है। आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि टेंट सिटी का सीवेज सीधे नदी में छोड़ा जा रहा था।
एनजीटी के आदेश में कहा गया, “प्रतिवादी (सरकारी प्राधिकरण) यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में रिवर गंगा (री-जुवेनेशन, प्रोटेक्शन एंड मैनेजमेंट) अथॉरिटीज ऑर्डर, 2016 और लागू पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करते हुए गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों के किनारे इस तरह की कोई भी टेंट सिटी स्थापित न की जाए।”
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया था कि टेंट सिटी ‘कछुआ वन्यजीव अभयारण्य’ के क्षेत्र में स्थापित की गई थी और इस अभयारण्य को वर्ष 2020 में अवैध रूप से डि-नोटिफाई (अधिसूचना से बाहर) किया गया। एनजीटी के आदेश में यह भी कहा गया कि चूंकि टेंट सिटी से संबंधित कछुआ अभयारण्य की डि-नोटिफिकेशन का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए ग्रीन ट्रिब्यूनल इस मुद्दे पर विचार करना “उचित नहीं समझता।”
अक्टूबर 2023 में एनजीटी को सौंपी गई एक रिपोर्ट में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने कहा था कि “टेंट सिटी परियोजना के विकास के लिए पूर्व-अनुमोदन (प्रायर अप्रूवल) का आवेदन तब किया गया, जब परियोजना 2022 में पहले ही लागू की जा चुकी थी।”
यह टेंट सिटी वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को भुनाने के लिए विकसित की गई थी। “लक्जरी आवास” सुविधाओं वाली यह परियोजना विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद वाराणसी में बढ़ी पर्यटक संख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। पर्यटक आसपास स्थित विभिन्न घाटों से नावों के जरिए टेंट सिटी तक पहुंच सकते थे। इसे हर साल अक्टूबर से जून तक संचालित किया जाना था और मानसून के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने पर तीन महीनों के लिए इसे हटाया जाना था।

