
जंगलमहल की 30 सीटों पर कुड़मी फैक्टर, पश्चिम बंगाल में सियासी समीकरण बदले
पश्चिम बंगाल के जंगलमहल में ST दर्जे की मांग पर कुड़मी असंतोष बढ़ा है। नो वोट टू TMC चेतावनी के बीच टीएमसी ने 60 दिन का एससी-एसटी अभियान शुरू किया है।
जंगलमहल में कुड़मी समुदाय के कुछ वर्गों द्वारा नो वोट टू TMC अभियान चलाए जाने के बीच, उनकी लंबित अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 60 दिनों का विशेष जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। यह अभियान भले ही आधिकारिक तौर पर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) मतदाताओं के लिए बताया जा रहा हो, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इसका अप्रत्यक्ष संदेश कुड़मी समुदाय के लिए भी है।
पश्चिम बंगाल में कुड़मी समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में वर्गीकृत किया गया है। फिर भी जंगलबमहल क्षेत्र जिसमें पुरुलिया, झाड़ग्राम, बांकुड़ा और पश्चिम मेदिनीपुर शामिल हैं में उनकी जनसंख्या और प्रभाव काफी अधिक है। समुदाय खुद को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से आदिवासी समूहों के करीब मानता है।
‘तपशिलीर संवाद’ अभियान
तपशिलीर संवाद (Tapashilir Sanglap) अभियान को SC/ST समुदायों के साथ संवाद के रूप में पेश किया गया है। एक वरिष्ठ TMC नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, यह हाशिए पर खड़े समुदायों के साथ संवाद है। कुड़मी भले ही OBC हों, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से वे खुद को आदिवासी मानते हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में 16 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं, जिनमें से पांच जंगलमहल क्षेत्र में आती हैं। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि केवल इन पांच सीटों पर ध्यान देना कुड़मी समुदाय के वास्तविक प्रभाव को कम आंकना होगा।
क्यों अहम हैं कुड़मी?
जंगलमहल की 42 विधानसभा सीटों में से लगभग 30 पर कुड़मी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। कई सीटों पर वे सबसे बड़ा या दूसरे नंबर का मतदाता समूह हैं, जिससे करीबी मुकाबलों में उनका प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। राजनीतिक विश्लेषक निर्मल्य बनर्जी के अनुसार, “जंगलबमहल में कुड़मी समुदाय का महत्व उनकी OBC श्रेणी से कहीं ज्यादा है। सामान्य सीटों पर भी वे नतीजे तय कर सकते हैं।
असंतोष के बीच अभियान
कोलकाता में 2 मार्च को अभियान की घोषणा करते हुए TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे और भाजपा पर संवैधानिक सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाएंगे। उन्होंने भाजपा शासित राज्योंउत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अनुसूचित समुदायों के खिलाफ अत्याचार का हवाला देते हुए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े प्रस्तुत किए और डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संवैधानिक प्रावधानों की रक्षा की बात कही।
इधर, पिछले महीने समुदाय की एक बैठक में ‘आदिवासी कुड़मी समाज’ (AKS) के सलाहकार अजीत महतो ने घोषणा की कि यदि राज्य सरकार ST दर्जे की मांग को केंद्र तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचाती, तो आगामी चुनाव में TMC को वोट नहीं दिया जाएगा।
भाजपा को भी अल्टीमेटम
उसी बैठक में भाजपा को भी चेतावनी दी गई कि यदि कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया, तो भाजपा को भी समर्थन नहीं मिलेगा। समुदाय के नेताओं के अनुसार, पुरुलिया में कुड़मी आबादी लगभग 65 प्रतिशत तक और झाड़ग्राम में करीब 40 प्रतिशत है, जबकि बांकुड़ा और पश्चिम मेदिनीपुर के कई हिस्सों में भी उनका प्रभाव मजबूत है।
लंबे समय से चल रही मांग
कुड़मी समुदाय की ST दर्जे की मांग वर्षों से जारी है, जो कई बार रेल रोको आंदोलन और प्रदर्शनों में बदल चुकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का कहना है कि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है।राज्य सरकार ने सरना और सारी धार्मिक कोड की मान्यता और कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी केंद्र को भेजी है, लेकिन जंगलबमहल में असंतोष अब भी बना हुआ है।
राजनीतिक हलचल
हाल ही में ‘कुड़मी समाज, पश्चिम बंगाल’ के मुख्य सलाहकार राजेश महतो भाजपा में शामिल हो गए, जिससे राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।
कल्याण बनाम पहचान
5 मार्च से शुरू हो रहे TMC अभियान में विशेष वाहन विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं का प्रचार करेंगे, जिसके तहत SC/ST महिलाओं को 1,700 रुपये मासिक सहायता दी जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर कई कुड़मी मतदाता मानते हैं कि कल्याणकारी योजनाएं लाभकारी हैं, लेकिन ST दर्जे का मुद्दा पहचान और अधिकार से जुड़ा है, जो अब तक सुलझा नहीं है।
आदिवासी गोटा संगठन के वरिष्ठ सदस्य सुनील सोरेन का कहना है कि जंगलबमहल में TMC के खिलाफ नाराजगी मौजूद है और यह देखना होगा कि क्या यह आउटरीच अभियान उस असंतोष को कम कर पाएगा। 2021 में भाजपा के उभार के बाद TMC ने जंगलमहल में अपनी स्थिति मजबूत की थी। अब SC/ST आउटरीच अभियान इस बात की परीक्षा होगा कि क्या कल्याणकारी राजनीति, पहचान आधारित नाराजगी को शांत कर पाएगी या नहीं।

