आप मनोनीत, मैं निर्वाचित, SIR पर चुनाव आयोग से अभिषेक बनर्जी की दो-टूक
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'आप मनोनीत, मैं निर्वाचित', SIR पर चुनाव आयोग से अभिषेक बनर्जी की दो-टूक

पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर तृणमूल का आरोप है कि मतदाता सूची के ज़रिये लोकतंत्र से छेड़छाड़ हो रही है। अभिषेक बनर्जी ने इसे कानूनी लड़ाई तक ले जाने की चेतावनी दी।


Abhishek Banerjee on SIR: पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आयोग इस प्रक्रिया से जुड़ी उनकी चिंताओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि अंतिम मतदाता सूची में किसी भी तरह की विसंगतियां पाई जाती हैं, तो तृणमूल कांग्रेस उसे स्वीकार नहीं करेगी और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी।

यह बयान उस समय सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावों में वोट चोरी ईवीएम के जरिए नहीं, बल्कि मतदाता सूची में हेरफेर के माध्यम से की जा रही है। उनका दावा था कि अगर विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को समय रहते गंभीरता से उठाया होता, तो महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के चुनावी नतीजे अलग हो सकते थे।

अभिषेक बनर्जी ने बताया कि पार्टी ने आयोग के सामने मतदाता सूची के मसौदे से जुड़ी कई आपत्तियां रखीं। इनमें 1.36 करोड़ मतदाताओं को तलब किए जाने का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का रवैया आक्रामक रहा और चर्चा के समय वे अपना आपा खो बैठे। बनर्जी ने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आप मनोनीत हैं और मैं निर्वाचित हूं। अगर उनमें हिम्मत है, तो बैठक की फुटेज सार्वजनिक कर दें।”

तृणमूल नेता ने आरोप लगाया कि आयोग ने उनकी आशंकाओं को दूर करने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया। जब उनसे पूछा गया कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्या पार्टी अंतिम मतदाता सूची स्वीकार करेगी, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया कि अगर सूची में गड़बड़ियां पाई गईं, तो उसे स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।

अभिषेक बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि घुसपैठ का डर फैलाकर पश्चिम बंगाल की छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने निर्वाचन आयोग को चुनौती दी कि वह उन 58 लाख मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करे, जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए हैं, और यह स्पष्ट करे कि उनमें कितने बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं। उनके अनुसार, मतदाता सूची का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, वोट चोरी मतदाता सूची के जरिए हो रही है, ईवीएम के माध्यम से नहीं। लोगों को मताधिकार से वंचित करने के लिए कौन सा एल्गोरिदम या सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा रहा है, इसका किसी को अंदाजा नहीं है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, पहले मतदाता सरकार चुनते थे, अब सरकार मतदाताओं को चुन रही है।

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि यही वे गलतियां हैं, जिन्हें अतीत में कांग्रेस (Congress) ने नजरअंदाज किया, आम आदमी पार्टी ने उजागर नहीं किया और बिहार में राजद भी उठाने में नाकाम रही। उनके अनुसार, इसी का फायदा उठाकर भाजपा ने महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में लगभग 88 प्रतिशत के स्ट्राइक रेट से जीत दर्ज की। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि मतदाता सूची के जरिए की गई वोट चोरी का नतीजा है।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को यह बता दिया गया है कि चुनावी कार्य में लगे किसी भी कर्मचारी को धमकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार से प्रत्येक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को बढ़ा हुआ मानदेय तुरंत जारी करने को भी कहा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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