गाजियाबाद सुसाइड: क्या मोबाइल की आदत और गेमिंग की लत बन रही है जानलेवा…
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तीन बहनों ने नवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या की

गाजियाबाद सुसाइड: क्या मोबाइल की आदत और गेमिंग की लत बन रही है जानलेवा…

सॉरी पापा… लिखकर ग़ाज़ियाबाद में तीन बहनों ने एक साथ जान दे दी।शुरुआती जाँच में कोरियन गेमिंग की लत और अवसाद की बात सामने आ रही है।ऐसे में बच्चों में मोबाइल और गेमिंग की लत को लेकर बहस छिड़ी है।


Sisters suicide in Gaziabad: ग़ाज़ियाबाद में तीन बहनों के एक साथ आत्महत्या ने देश को झकझोर किया है।पुलिस जाँच में जुटी है और एक वजह गेमिंग की लत भी बतायी जा रही है।कहा जा रहा है कि कोरियन गेम में मौत का टास्क मिला था।यह बात भी सामने आ रही है कि बहनें अवसाद में भी थीं।मौके से मिले साक्ष्यों से कोरिया के लिए 'ऑब्सेशन’ की बात भी झलकती है को कोरियन गेम खेलने की लत की बात को मज़बूत करती है।यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं हर अभिभावक के लिए चेतावनी है।

गेमिंग की लत और परिवार की स्थिति, क्या है इसकी वजह?

ग़ाज़ियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन बहनों के साथ क्या हुआ जिसकी वजह से उनको सुसाइड का घातक कदम उठाना पड़ा।इस बात पर जाँच शुरू हो गई है लेकिन कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।बच्चों में मोबाइल की लत क्यों बढ़ रही है।क्या गेमिंग की लत जानलेवा होती का रही है।इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को अपने बच्चे के हाथ में मोबाइल देने के बाद इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो कितनी देर और किस विषय पर मोबाइल का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहा है।सामाजिक कार्यकर्ता नीलम वैश्य सिंह कहती हैं ''ऐसा नहीं है कि यह पहली बार ऐसा कुछ हुआ है। इस बार भी हुआ है पर इस बार एक परिवार से तीन बच्चों की जान गई है।इसमें गेमिंग रिस्पांसिबल है।घर की जो भी परिस्थितियां रही हो चाहे फाइनशियल हों चाहे दो मैरिज का सिचुएशन हो लेकिन यह तय है कि इसके पीछे एक कारण नहीं होगा।यह अपने आप में बहुत ही ज्यादा शॉकिंग है और ये बहुत ही नॉर्मल सिचुएशन नहीं है।’’

बच्चों के इंटरनेट और सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर क़ानून को ज़रूरत-

दरअसल शुरुआती तौर पर यह बात सामने आ रही है कि तीनों बहनों से जब मोबाइल को लेकर पाबंदी लगायी गई तो वो आहत हो गईं।उत्तर प्रदेश अनएडेड स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल अपने उस प्रयास की बात करते हैं जिसमें उन्होंने स्कूल में बच्चों के मोबाइल लाने पर रोक लगा दी थी।उनका कहना है कि उसके बाद ज्यादातर स्कूलों में मोबाइल लाने पर रोक लगी।अनिल अग्रवाल कहते हैं ''अगर दूसरे देशों में 16 साल के बच्चों के नीचे सोशल मीडिया बैन और रिस्ट्रिक्टेड यूसेज ऑफ इंटरनेट है तो हमारे देश में यह क्यों नहीं हो सकता?’’

अनिल अग्रवाल इसले लिए काफ़ी हद तक अभिभावकों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं।वह कहते हैं ''बच्चों को मोबाइल पेरेंट्स दिलवाते हैं।बच्चे छुपा के गाड़ी में रख लेते हैं।छुट्टी के बाद मोबाइल यूज करते हैं। पेरेंट्स के तमाम तरह के एक्सक्यूसेस होते हैं कि वो हम उसकी खबर ले लें इसलिए मोबाइल देते हैं।आज12 साल का बच्चा इतना ग्रोन अप हो गया है कि उसे सारी चीजें पता रहती है।और उसे पता जानकारी कैसे मिल रही है? सोशल मीडिया से… इसलिए वक्त से पहले बच्चा बड़ा हो रहा है।’’

स्कूलों की भी ज़िम्मेदारी-

सोशल एक्टिविस्ट नीलम वैश्य सिंह मानती हैं मोबाइल का बच्चों ने सबसे ज़्यादा इस्तेमाल कोविड के समय से शुरू किया।पढ़ाई भी इसी पर होती है असाइनमेंट भी इसी पर मिलते हैं ऐसे में स्कूल को भी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।इस केस में नीलम वैश्य सिंह घर की परिस्थिति को भी जिम्मेदार मानती हैं।बच्चियों का स्कूल न जाना बहुत गंभीर बात है।उनका कहना है कि उनके व्यवहार से पहले कुछ क्लू मिला होगा लेकिन वो उनके पैरेंट्स नहीं देख पाए।वो बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलाव को समझना अभिभावकों के लिए ज़रूरी मानती हैं। नीलम सिंह कहती हैं ‘’जिस तरह उन बच्चियों ने दीवारों पर अपनी बात लिखी वो भी काफ़ी गंभीर है।यानी वो दबाव में थीं।निश्चित रूप से ऐसी स्थिति में परिवार को बड़ी ज़िम्मेदारी है।’’

सामान्य नहीं था तीनों बहनों का व्यवहार-

द फ़ेडरल देश ने मौक़े पर जाकर परिवार और पड़ोसियों से बात की।हालांकि पुलिस इन्वेस्टिगेशन के बाद और तथ्य सामने आएंगे।तीन बेटियों को खोने के बाद अभिभावक गहरे सदमे में हैं।बच्चों के पिता ने दो शादियां की हैं जो सगी बहनें हैं।पड़ोसियों के अनुसार परिवार में कई बार झगड़े की आवाज़ें भी आती थीं।पर सबसे बड़ी बात यह है कि कोरिया के गेमिंग की लत की बात सामने आ रही है। द फ़ेडरल देश संवाददाता अभिषेक रावत को पड़ोसियों ने कई चौंकाने वाली जानकारियां दीं।अभिषेक रावत इस जानकारी को साझा करते हुए कहते हैं कि '' ये तीनों बहने एक साथ ही हर एक्टिविटी को एक साथ करती थी।घर में रहना भी साथ था, खाना भी साथ था।पड़ोसियों ने यह भी बताया कि दो साल से इन्होंने पढ़ाई छोड़ी हुई थी।ये स्कूल नहीं जाती थीं पर किसी कोचिंग में उन्होंने दाखिला लिया था।’’ पड़ोसियों ने यह भी जानकारी दी कि कोचिंग को तरफ़ से भी इनके कोरिया के प्रति लगाव की शिकायत की गई थी।घटना के बाद सुसाइड नोट एक जो मिला है कैश मेमो के पीछे एक बच्ची ने लिखा है।उसमें लिखा है ‘ट्रू लाइफ स्टोरी’। साथ ही एक रोते हुए इमोजी बनकर यह भी लिखा है ‘सॉरी पापा’।यह भी जानकारी मिली है कि तीनों बहनें कोरिया जाना चाहती थीं और हाल ही में उनके पिता ने इसके लिए उनको मना कर दिया था।

बच्चों-किशोरों में मोबाइल का एडिक्शन घातक-

अनिल अग्रवाल कहते हैं ‘ यह घटना एडिक्शन को वजह से भी है।आज अगर बच्चे से मोबाइल ले लिया जाए ना तो वो घर पर लड़ते हैं,सोते नहीं है, खाना नहीं खाते हैं।ये हकीकत है।’ अनिल अग्रवाल कहते हैं ‘’इसके लिए सजग होना पड़ेगा।हमारे स्कूल में साइकोलॉजिस्ट हैं।बच्चे के बिहेवियर चेंज को टीचर तुरंत रिपोर्ट करती हैं।फिर उससे काउंसलिंग करके बात की जाती है।उसमें कई बार ऐसी ऐसी चीजें निकल के सामने आती है जो बच्चे शेयर करते हैं।’’ वहीं नीलम सिंह कहती हैं कि ''बच्चों के अभिभावकों को उनपर ज़्यादा ध्यान और उनको ज़्यादा समय देना होगा जिससे उनको यह पता हो बच्चे की मनःस्थिति क्या है।इससे काफ़ी हद तक चीज़ें ठीक रहेंगी क्योंकि मोबाइल आज की ज़रूरत है और एकदम से इसे हटाना भी संभव नहीं है।’’

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