
बढ़ सकती है Arvind Kejriwal की मुश्किलें, बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी ED
अरविंद केजरीवाल की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामला ED के समन का पालन न करने से जुड़ा है। अब हाईकोर्ट में इस फैसले को लेकर नई कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है।
Arvind Kejriwal: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ने वाली हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सूचना दी है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दर्ज मामलों में बरी होने के फैसलों को चुनौती देगा। यह जानकारी एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने दी, जिसमें चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया शामिल थे।
यह मामला तब उठकर आया जब केजरीवाल के वकील ने ED द्वारा जारी समन को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने की मांग की। वकील ने कोर्ट को बताया कि केजरीवाल उन मामलों में बरी हो चुके हैं, इसलिए वह इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दी और इसे खारिज कर दिया।
दरअसल, 22 जनवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने उन मामलों में केजरीवाल को बरी कर दिया था, जिनमें ED ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच के लिए जारी समन का पालन नहीं किया। ED का आरोप था कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच में सहयोग नहीं किया। एजेंसी ने केजरीवाल के खिलाफ दो आपराधिक शिकायतें दर्ज की थीं।
ED के समनों में कहा गया था कि केजरीवाल को 2 नवंबर और 21 दिसंबर 2023, तथा 3 जनवरी और 18 जनवरी 2024 को ED के समन पर पेश होना था। लेकिन उन्होंने इन समनों को अवैध बताते हुए नजरअंदाज किया। इससे पहले, 21 मार्च 2024 को ED ने केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। बाद में 20 जून 2024 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट की जज न्याय बिंदु ने उन्हें जमानत दे दी थी। ED ने इस फैसले को चुनौती दी, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उस जमानत आदेश को स्थगित कर दिया। जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी और उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका को बड़े बेंच के पास भेज दिया था।
ED का दावा है कि दिल्ली की शराब नीति एक साजिश के तहत लागू की गई थी, जिसमें कुछ निजी कंपनियों को 12% के मुनाफे का फायदा देने का प्रावधान था। इसी की वजह से थोक विक्रेताओं को असाधारण मुनाफा मिल सका। अब दिल्ली हाईकोर्ट में यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है, क्योंकि ED ने बरी के फैसले को चुनौती देने की बात कही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ED का यह कदम आगे किस तरह का मोड़ लेता है और अदालत इस मामले में क्या निर्णय देती है। लेकिन एक बात तो साफ है कि प्रवर्तन निदेशालय के इस चुनौती देने के फैसले से अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ने वाली हैं।

