
कैलाश विजयवर्गीय की 'घंटा' वाली टिप्पणी को तानाशाही व्यवहार बताने वाले अफसर सस्पेंड
विजयवर्गीय की टिप्पणी का जिक्र करते हुए एसडीएम के आदेश में इसे अमानवीय और तानाशाही व्यवहार का प्रतीक बताया गया। इसमें यह भी कहा गया कि इतने संवेदनशील मामले में ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है।
इंदौर में पानी दूषित होने से हुई मौतों के मामले में राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विवादित ‘घंटा’ टिप्पणी को तानाशाही व्यवहार का प्रतीक बताते हुए आदेश जारी करने के बाद उज्जैन के उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) को निलंबित कर दिया गया है।
एसडीएम आनंद मालवीय ने इंदौर जल प्रदूषण मामले को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र जिले में कानून-व्यवस्था संबंधी निर्देशों के लिए एक आदेश जारी किया था।
हालांकि, उस आदेश में कुछ अजीब दावे भी किए गए थे। आदेश में आरोप लगाया गया कि इंदौर में बीजेपी शासित नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए गए दूषित और गंदे पानी के सेवन से लोगों की मौत हुई। आदेश में कहा गया,“इंदौर में बीजेपी शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित और गंदे पानी के सेवन से 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,800 लोग इलाज करा रहे हैं।”
विजयवर्गीय की टिप्पणी का जिक्र करते हुए आदेश में इसे अमानवीय और तानाशाही व्यवहार का प्रतीक बताया गया। इसमें यह भी कहा गया कि इतने संवेदनशील मामले में ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है।
एसडीएम द्वारा जारी नोटिस में कहा गया, “इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार के एक मंत्री द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ‘घंटा’ शब्द का प्रयोग अमानवीय और तानाशाही व्यवहार का संकेत है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष… जीतू पटवारी जी ने इस घटना के विरोध में यह निर्णय लिया है कि बीजेपी के सांसदों और विधायकों का घेराव किया जाएगा।”
इसके बाद उज्जैन संभाग के संभागायुक्त ने अत्यंत संवेदनशील मामले में आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और अनियमितता बरतने के आरोप में आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया। उज्जैन संभाग आयुक्त कार्यालय द्वारा 5 जनवरी को जारी निलंबन आदेश के अनुसार, 3 जनवरी को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से संबंधित प्राप्त जानकारी के आधार पर बिना उचित सत्यापन के एक आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स में मालवीय के हवाले से कहा गया है कि आदेश के कुछ हिस्से संभवतः कांग्रेस के एक व्हाट्सएप संदेश से उठा लिए गए थे। उन्होंने कहा,“आदेश में कांग्रेस पार्टी के एक व्हाट्सएप ग्रुप में विरोध प्रदर्शन के आह्वान से जुड़े कुछ अंश शामिल हो गए थे, जिन्हें रीडर ने उठा लिया था। स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े आधिकारिक स्रोतों से थे, लेकिन त्रुटियां सामने आने के बाद मैंने वह आदेश वापस ले लिया और नया आदेश जारी किया। हालांकि, किसी ने पुराने आदेश को वायरल कर दिया।”
निलंबन की कार्रवाई 4 जनवरी को देवास कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त उस प्रस्ताव के बाद की गई, जिसमें पहले जारी आदेश को प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया था। आदेश में कहा गया, “उक्त आदेश बिना समुचित जांच के और अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर विषय पर, गलत आंकड़ों का उपयोग करते हुए जारी किया गया। यह आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनियमितता को दर्शाता है।”
आयुक्त ने आगे कहा कि यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत परिभाषित कदाचार की श्रेणी में आता है। मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया है कि आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी का मुख्यालय उज्जैन संभाग आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीविकोपार्जन भत्ता दिया जाएगा।

