‘या प्रायश्चित होगा या सजा मिलेगी’, इंदौर त्रासदी पर उमा भारती ने अपनी ही सरकार को घेरा
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‘या प्रायश्चित होगा या सजा मिलेगी’, इंदौर त्रासदी पर उमा भारती ने अपनी ही सरकार को घेरा

Indore Water Contamination: इंदौर के दूषित पानी मामले ने न सिर्फ प्रशासन की लापरवाही उजागर की है, बल्कि सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर भी गहरी असहजता पैदा कर दी है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर है कि वे इस मामले में कितनी सख्त और पारदर्शी कार्रवाई करते हैं।


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Indore Water Crisis: इंदौर की जल त्रासदी ने न केवल जिंदगियां छीनीं, बल्कि सत्ता की कुर्सियों को भी हिला दिया। जिस लापरवाही पर अब तक सत्ता पक्ष खामोश रहा, उस पर बीजेपी की ही दिग्गज नेता उमा भारती ने खुलकर सवाल उठा दिए हैं। अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने इसे 'महापाप' करार दिया और मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधी चेतावनी दे डाली कि 'यह आपकी परीक्षा की घड़ी है।'

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मामले में अब बीजेपी की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार और प्रशासन पर हमला बोला है।

बंद कमरे की बैठक से भड़का विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सियासी विवाद एक बंद कमरे में हुई बैठक के बाद और तेज हो गया। इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे से साफ शब्दों में कहा कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते और ऐसे सिस्टम में काम करना मुश्किल हो गया है। इंदौर के एक और वरिष्ठ विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी अधिकारियों की अनदेखी और नाफरमानी पर सवाल खड़े किए।

उमा भारती का तीखा सवाल

उमा भारती ने नेताओं की इस बेबसी को आधार बनाकर प्रशासन और सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि अगर अधिकारी बात नहीं सुन रहे थे तो पद पर बने रहकर बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? जनता के हक के लिए पद क्यों नहीं छोड़ा? उनका कहना था कि जब आम लोग गंदा पानी पीने को मजबूर थे, तब जिम्मेदार लोग सुरक्षित रहकर चुप बैठे रहे।

उमा भारती ने कहा कि साल 2025 का अंत इंदौर के लिए बेहद शर्मनाक रहा। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर में अगर जहर मिला पानी लोगों को पीना पड़े तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले 2 लाख रुपये के मुआवजे पर भी उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि जिंदगी की कीमत 2 लाख रुपये नहीं होती।

दंड या प्रायश्चित

उमा भारती ने साफ कहा कि इस मामले में कोई सफाई या बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक या तो दोषियों को सबसे कड़ा दंड दिया जाए या फिर सरकार को घोर प्रायश्चित करना चाहिए।

मुख्यमंत्री के लिए 'परीक्षा की घड़ी'

पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा कि यह घटना उनकी न्यायप्रियता और नेतृत्व क्षमता की कसौटी है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। नीचे से ऊपर तक, जो भी अधिकारी या नेता इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कठोरतम सजा दी जाए।

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