
यूपी विधानसभा : नेता विरोधी दल का आरोप 'थानेदार कभी फ़ोन नहीं उठाता, बैठकर गप्प करता है… ‘
यूपी में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने और फ़ोन न उठाने का मामला विधानसभा में उठा।सपा विधायकों ने इस पर निर्देश देने की माँग की।
यूपी विधानसभा में विपक्ष के विधायकों ने आरोप लगाया कि अधिकारी और थानेदार जन प्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते।नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडे ने कहा कि ‘हम लोग फ़ोन करते हैं तो थानेदार फ़ोन नहीं उठाते’।इसके लिए कोई निर्देश जारी किया जाए।बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों में तीखी बहस देखने को मिली।इस बीच सपा के विधायकों ने जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का मामला उठाया।
बैठकर गप्प करते हैं, फोन नहीं उठाते : नेता विरोधी दल-
यूपी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को विपक्ष के जन प्रतिनिधियों ने थानेदार और अधिकारियों के फोन न उठाने की शिकायत की।नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडे ने यह आरोप लगाया कि थानेदारों को जन प्रतिनिधि फोन करते हैं तो वो फ़ोन नहीं उठाते।माता प्रसाद पांडे ने कहा '' आप निचले स्तर पर यह बात पहुँचा दें कि वो कम से कम फ़ोन तो उठा किया करें।हम लोग फ़ोन करते हैं तो थानेदार तो कभी फ़ोन उठाता ही नहीं।एसपी अगर कभी सुन भी ले तो थानेदार को फ़ोन उठाने की फुर्सत ही नहीं।बैठ के दलालों से गप्प करेंगे और फ़ोन नहीं उठाएँगे।’’
कई विधायकों ने उठाया अधिकारियों की लापरवाही का सवाल-
माता प्रसाद पांडे ने पीठ से इसमें हस्तक्षेप करने और निर्देश जारी करने की माँग करते हुए कहा कि यह व्यवस्थापिका को अवहेलना है और इससे व्यवस्थापिका के अधिकारों को कमज़ोर करने को कोशिश हो रही है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका को व्यवस्थापिका के अधिकारों को मानना चाहिए।सपा विधायक कमाल अख़्तर ने कहा कि आज स्थिति ऐसी हो गई है कि सत्ता पक्ष के विधायकों को धरने पर भी बैठना पड़ता है।वहीं विधायक संग्राम सिंह यादव ने भी आरोप लगाया कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करते हैं।लोकतंत्र के लिए यह ग़लत परम्परा है।सपा विधायक रागिनी सोनकर में भी जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मामलों में अधिकारियों की लापरवाही का आरोप लगाया।
संसदीय कार्य मंत्री ने दिया जवाब-
दरअसल मंगलवार को विपक्ष के कई विधायकों ने इस बात को सदन में उठाया कि अधिकारी उनका फ़ोन नहीं उठाते।इससे उनके क्षेत्र की जनता की सुनवाई नहीं हो पाती।विधायकों ने माँग की कि विधानसभा द्वारा सदस्यों के लिए तय प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराया जाए जिससे कोई भी अधिकारी जनप्रतिनिधि की अवहेलना न करे।सरकार अधिकारियों पर नियंत्रण करे।हालाँकि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा की पहले से ही उसके लिए शासनादेश जारी किया गया है और कार्यपालिका द्वारा व्यवस्थापिका पर हावी होने का सवाल ही नहीं उठता।मंत्री असीम अरुण ने भी इसके लिए सुझाव देते हुए कहा कि ज़िला स्तर ओर ऐसे नंबर जारी किए जाएँ जिनपर हर हाल में अधिकारियों को जवाब देना अनिवार्य हो।

