पार्टी की वजह से सीएम- केंद्रीय नेताओं से मतभेद नहीं-योगी आदित्यनाथ
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योगी आदित्यनाथ, सीएम, उत्तर प्रदेश

पार्टी की वजह से सीएम- केंद्रीय नेताओं से मतभेद नहीं-योगी आदित्यनाथ

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति उनके लिए फुल टाइम जॉब नहीं बल्कि सेवा है। पार्टी की वजह से ही सीएम पद पर हूं। केंद्रीय नेताओं से मतभेद की खबर निराधार है।


सियासत का मूल सूत्र यही है व्याख्या करने के लिए जगह छोड़ते चलिए। एक बयान के कई मतलब हो सकते हैं। जिसे जिस तरीके से बयानों की व्याख्या करनी है वो आजाद है। दरअसल यूपी की सियासत में विपक्षी दल खासतौर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं कि यूपी में सरकार डबल इंजन की है। लेकिन दोनों इंजन की दिशा अलग अलग है। दिल्ली के लोग लखनऊ में जो शख्स बैठे हैं उन्हें पसंद नहीं करते है। इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि केंद्रीय नेतृत्व संग मतभेद की खबर निराधार है। हकीकत में सीएम पद पर वो पार्टी की वजह से ही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राजनीति उनके लिए कोई पूर्णकालिक पेशा नहीं है। वर्तमान में वे यहां कार्यरत हैं, लेकिन मूल रूप से वे एक योगी ही हैं। उन्होंने कहा, “मेरा प्राथमिक कार्य राज्य के लोगों की सेवा करना है, जो मुझे पार्टी ने सौंपा है। मैं एक नागरिक के रूप में अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करता हूं और खुद को विशेष नहीं मानता। मेरे लिए देश सर्वोपरि है। अगर देश सुरक्षित है तो मेरा धर्म भी सुरक्षित रहेगा, और जब धर्म सुरक्षित रहेगा तो कल्याण का मार्ग अपने आप खुल जाएगा।”

केंद्रीय नेतृत्व से मतभेद की खबरें बेबुनियाद

योगी ने केंद्रीय नेतृत्व के साथ मतभेद की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा, “मैं आज इस पद पर हूं तो यह पार्टी की वजह से है। अगर केंद्रीय नेताओं से मतभेद होते तो क्या मैं यहां बैठा रह सकता था? बाकी, कोई कुछ भी बोल सकता है, किसी का मुंह बंद करना तो संभव नहीं।”

RSS केवल राष्ट्रनिष्ठ लोगों का समर्थन करता है

RSS के समर्थन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “जो भारत के प्रति निष्ठावान होगा, RSS उसे पसंद करेगा। जो भारत के प्रति निष्ठावान नहीं होगा, उसे सही मार्ग पर लाने के लिए RSS प्रेरणा ही देगा।”

भाषा विवाद: रोजगार के अवसरों पर चोट

भाषा को लेकर उठ रहे विवादों पर सीएम योगी ने कहा कि जो लोग इसे तूल दे रहे हैं, वे केवल अपने राजनीतिक हित साध रहे हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में वे युवाओं के रोजगार के अवसरों पर प्रहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार अपने छात्रों को तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली और मराठी जैसी भाषाएं सिखा रही है। क्या इससे यूपी की प्रतिष्ठा कम हो गई?”

सड़कों पर नमाज का विरोध और धार्मिक अनुशासन

सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक के फैसले का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सड़क लोगों के आवागमन के लिए होती है, इबादत के लिए नहीं। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रयागराज में कुंभ के दौरान 66 करोड़ लोग आए, लेकिन कहीं कोई लूटपाट, आगजनी, छेड़खानी, तोड़फोड़ या अपहरण नहीं हुआ। यही धार्मिक अनुशासन है। कांवड़ यात्रा की तुलना सड़क पर नमाज से करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि यह यात्रा हरिद्वार से गाजियाबाद तक विभिन्न मार्गों से गुजरती है, इसलिए सड़क पर ही होती है। हमने किसी परंपरागत मुस्लिम जुलूस पर रोक नहीं लगाई। मोहर्रम के जुलूस पर भी रोक नहीं थी, सिर्फ ताजिया की ऊंचाई कम करने को कहा था ताकि हाईटेंशन तारों से बचा जा सके।”

बुलडोजर कामयाबी नहीं जरूरत

कानून-व्यवस्था के ‘बुलडोज़र मॉडल’ को लेकर छिड़ी बहस पर योगी ने कहा कि वह इसे कोई उपलब्धि नहीं बल्कि आवश्यकता मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “बुलडोज़र का उपयोग केवल अपराधियों पर कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे के निर्माण और अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए भी किया जाता है। हमने इसका बेहतर और न्यायसंगत उपयोग करना सिखाया है।”

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