
शंकराचार्य विवाद में अब डैमेज कंट्रोल में जुटी यूपी सरकार, अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगी जाएगी
28 जनवरी को शंकराचार्य के वाराणसी आने के बाद लखनऊ के दो बड़े अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और पूर्णिमा पर माघ मेले में ससम्मान स्नान कराने की बात कही।
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद में भारी फजीहत होने के बाद अब यूपी सरकार डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुट गई है। ख़बरें आ रही हैं कि प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगेगा। यही नहीं, अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले में सरकारी संरक्षण में स्नान कराने की भी योजना बनाई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने इस नए डेवलपमेंट की पुष्टि की है। वैसे उस विवाद के बाद शंकराचार्य माघ मेला छोड़कर वाराणसी जा चुके हैं और इससे यूपी सरकार और उसके प्रशासन की भारी किरकिरी हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि 28 जनवरी को शंकराचार्य के वाराणसी आने के बाद लखनऊ के दो बड़े अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और पूर्णिमा पर माघ मेले में स-सम्मान स्नान कराने की बात कही। इस पर शंकराचार्य ने दो शर्त रखी हैं।
पहली ये कि उस घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार लोग माफी मांगे और बाकायदा लिखित माफीनामा दें और दूसरी- चारों शंकराचार्य का प्रोटोकॉल स्नान के लिए लागू किया जाए।
शंकराचार्य के प्रवक्ता योगीराज सरकार के हवाले से मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि यूपी सरकार के कुछ अधिकारी वाराणसी जाकर शंकराचार्य को प्रयागराज ले जाने और माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान कराने की तैयारी में हैं।
इस बीच, वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने संतों और समर्थकों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय कर ली है। कंप्यूटर बाबा भी मौनी अमावस्या से उनके समर्थन में साथ हैं। इसी दिन प्रशासन और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच टकराव हुआ था। शंकराचार्य से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम और आगे के फैसलों को लेकर वे 30 जनवरी को सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शंकराचार्य और प्रयागराज प्रशासन के बीच यह टकराव करीब 11 दिनों तक चला। 27 जनवरी की शाम को विवाद सुलझाने के लिए एक गोपनीय बैठक भी हुई थी, जिसमें कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी, लेकिन लिखित माफी और सार्वजनिक क्षमायाचना को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसी के बाद 28 जनवरी की सुबह शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया था।
अब प्रशासन की ओर से रुख बदलने और माफी की तैयारी के बाद यह देखना अहम होगा कि क्या शंकराचार्य अपनी शर्तों पर सहमत होते हैं और माघ मेले में दोबारा शामिल होते हैं या नहीं।

