
Iran Israel War-शिपमेंट होल्ड, बीमा महंगा, नए ऑर्डर नहीं…यूपी के निर्यातकों को झटका
ईरान इज़रायल युद्ध का असर यूपी के कई उद्योगों पर पड़ा है।दुबई और अन्य देशों में बिक्री कम हुई है,शिपमेंट होल्ड हैं और निर्यात के सामान का बीमा महंगा हो गया है।
पहले ट्रम्प टैरिफ की मार और अब ईरान इज़राइल युद्ध के हालात और मिडल ईस्ट में तनाव से उत्तर प्रदेश के कई उद्योगों के सामने संकट की स्थिति पैदा हो गई है।वजह यह है कि यूएई और ख़ास तौर पर दुबई में निर्यात करने वाले कारोबारियों के लिए अब निर्यात में मुश्किल हो रही है।ऐसे सामान की बिक्री घटने, निर्यात माल के शिपिंग की लागत बढ़ने और ऑर्डर होल्ड होने से जहाँ एक्सपोर्टर्स परेशान हैं स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़(Strait of Hormuz) ब्लॉक होने से कई उद्योगों में निर्यात बंद होने और ट्रेड चेन टूटने का खतरा बढ़ गया है जिससे यूपी के लाखों बुनकरों और कारीगरों पर भी असर पड़ना तय है।
बनारस की फर्निशिंग, भदोही की कालीन, मुरादाबाद के हैंडीक्राफ्ट्स के निर्यात को लगेगा झटका-
ईरान-इज़राइल की जंग और मिडिल ईस्ट के हालात से दुनिया भर में अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है।यूपी के कई सेक्टरों के निर्यात को भी इससे झटका लगा है।सबसे छोटे समुद्री रास्ते 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज़’ के युद्ध क्षेत्र में होने की वजह से निर्यात रुक गया है और इसके ब्लॉक होने से भारत के शिप नहीं गुज़र पाएंगे।कहा जा रहा है भारत के कई मालवाहक जहाज खाड़ी देशों में फंसे हैं।यहाँ के कारोबार और निर्यात पर असर की एक बड़ी वजह यह है कि पूरे मिडिल ईस्ट में ज़रूरी सामान को छोड़कर बाक़ी प्रोडक्ट्स की बिक्री भी घटी है।यही वजह है कि यूपी के एमएसएमई ( MSME) सेक्टर की कई इकाइयाँ और इनमें काम कर रहे लाखों कारीगर इससे प्रभावित हो सकते हैं।यूपी में बनारस की फैब्रिक और फर्निशिंग, भदोही की कालीन, मुरादाबाद के ब्रास के हैंडीक्राफ्ट्स और अन्य सामान, आगरा और कानपुर के चमड़े का सामान( पर्स, जूता, बेल्ट), कन्नौज के इत्र जैसी चीज़ों की मिडिल ईस्ट में ज़बरदस्त माँग रहती है।ख़ास तौर पर ख़रीदारी के लिए 'गोल्डन टाइम’ माने जाने वाले रमज़ान और ईद से पहले भारतीय एक्सपोर्ट्स को काफ़ी लाभ होता है लेकिन इस बार युद्ध की वजह से सबकुछ रुक गया है।
दुबई में रिटेल खरीदारी घटी, भारतीय एक्सपोर्टर्स को झटका-
खाड़ी देशों और ख़ास तौर पर दुबई में बड़ी संख्या में भारतीय,नेपाली, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग रहते हैं।साथ ही दुनिया भर से लोग यहाँ ख़रीदारी करने आते हैं।ऐसे में ईद से पहले यह 'लक्ज़री आइटम्स’ की बिक्री का सबसे अच्छा समय होता है।बनारसी फर्निशिंग का सामान हो या हैंडीक्राफ्ट्स इसकी वहाँ रिटेल( Retail Market) में भी बड़ी माँग रहती है।जानकारी के अनुसार लोग ज़रूरी चीज़ों की खरीदारी तो कर रहे हैं पर ऐसे लक्ज़री सामान की बिक्री 70-80 प्रतिशत तक घट गई है।ऐसे में यहाँ के निर्यातकों का सामान जो रमज़ान से पहले ही वहाँ जा चुका है वो होल्ड हो गया है।
माल होल्ड, नया ऑर्डर नहीं मिल रहा-
बनारसी फैब्रिक का दुबई( Dubai) और यूएई( UAE) में निर्यात करने वाले मुकुंद अग्रवाल बताते हैं कि दुबई में शॉपिंग के लिए यह सबसे गोल्डन टाइम है ऐसे यहाँ के व्यापारियों का माल होल्ड हो गया है।मुकुंद अग्रवाल कहते हैं '' दुबई में ख़रीदारी करने दुनिया भर से लोग आते हैं।हमारा बनारसी फर्निशिंग का सामान जिसमें कुशन कवर, पर्दे वगैरह की बड़ी माँग है।इसलिए रमज़ान से पहले ही कन्साइनमेंट जा चुका था।पर वहाँ मॉल्स में सामान की सेल कम हो गई।जिससे अब पुराने ऑर्डर का बचा पेमेंट और नया ऑर्डर रुक गया।इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है।’’
कंटेनर का चार्ज बढ़ा, तीन गुना ज़्यादा वसूल रहे:
खाड़ी के देशों और दुबई के मार्केट में भारत की लेदर इंडिस्ट्री से जुड़े सामान की भी काफ़ी माँग है।आगरा में लेदर गुड्स कारोबारी और कई साल से निर्यात करने वाले चौधरी शफ़ीकुर्रहमान बताते हैं कि निर्यात मुश्किल हो गया है क्योंकि कंपनियों ने रेट तीन से चार गुना ज़्यादा बढ़ा दिया है।अब बढ़े किराए के सरचार्ज ले साथ ही एक्सपोर्ट हो पायेगा। वॉर जोन में जितने शिप्स जा रहे हैं उनको बीमा देने से भी मना कर दिया है।अब स्ट्रैट ऑफ हॉर्म्यूज़ ( Strate of Hormuze) से जहाज़ का गुज़रना संभव नहीं है और लंबे रास्ते से जाने से जहाज का ज़्यादा किराया देना पड़ रहा है।साथ ही सामान का बीमा भी नहीं हो पा रहा है।उद्योग और वाणिज्य विशेषज्ञ हरजिंदर सिंह कहते हैं कि ''स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ तो ब्लॉक है लेकिन जो वैकल्पिक रास्ते हैं, वो लंबे रास्ते हैं।जो स्थितियां हैं उसने इंश्योरेंस कंपनियों के रिस्क को बढ़ा दिया है इसलिए ज़ाहिर है अब बीमे का पैसा भी बढ़ेगा।अभी हम लोगों ने जो अध्ययन किया है उस हिसाब से इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रोडक्ट के 3% तक अपना बीमे का पैसा बढ़ा दिया है जो काफ़ी ज़्यादा है।’’
ट्रेड एक्सपर्ट उम्मीद करते हैं कि सरकार को एमएसएमई( MSME) सेक्टर को आश्वस्त करना चाहिए क्योंकि अभी उनको मदद देने की ज़रूरत है।ट्रेड एक्सपर्ट हरजिंदर सिंह कहते हैं ''सरकार की तरफ़ से एक एडवाइजरी आनी चाहिए क्योंकि बहुत सारे MSME कारोबारियों ने लोन लेकर कारोबार किया है ऐसे में उनको भरोसा देने की ज़रूरत है।नहीं तो ऐसे कई एमएसएमई उद्योग बंद होंगे और रोज़गार पर भी असर पड़ेगा।ईरान और इज़राइल-अमरीका में अब फ़ाइनेंशियल सिस्टम को भी ध्वस्त करने की शुरुआत कर दी है और बैंकों पर हमला किया है।इससे अब भुगतान पर भी असर पड़ेगा। जब तक बैंक नहीं खुलते तब तक वहाँ से यहाँ के एक्सपोर्ट्स का कारोबार पटरी पर नहीं आएगा।’’

