
लव-कुश राजनीति से आगे बढ़े कुशवाहा, राजपूत नेता को सौंपी कमान
RLM में बढ़ती कलह के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। राजपूत नेता की नियुक्ति को संगठन और जातिगत संतुलन का दांव माना जा रहा है।
बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद सबसे अधिक चर्चा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) की हो रही है। नीतीश कुमार कैबिनेट के गठन में पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को तवज्जो दी। उसके बाद ऐसा कहा जाने लगा कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। दूसरे विधायकों में असंतोषक का भाव है। लेकिन अब उस असंतोश को थामने के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा संगठनात्मक दांव चला है।
उपेंद्र कुशवाहा ने दिनारा से विधायक आलोक सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। बड़ी बात यह है कि कुर्मी–कोइरी राजनीति की पहचान रखने वाले कुशवाहा ने इस बार राजपूत समाज से आने वाले नेता को बिहार में संगठन की कमान सौंपी है। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुशवाहा ने इस फैसले की घोषणा की। इसके साथ ही दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की गई।
दरअसल, नवंबर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में नई NDA सरकार बनने के बाद से RLM में असंतोष लगातार बढ़ रहा था। कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी के कई पदाधिकारी नाराज हो गए और इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया। हालात संभालने के लिए कुशवाहा को प्रदेश और जिला इकाइयों को भंग करने का फैसला भी लेना पड़ा।
इसी दौरान पार्टी के चार विधायकों में से तीन माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो की नाराजगी की चर्चाएं तेज़ हो गईं। इन विधायकों की भाजपा नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद RLM में संभावित टूट की अटकलें और मजबूत हो गई थीं।
16 जनवरी को कुशवाहा ने माधव आनंद और आलोक सिंह को अपने आवास पर बुलाकर बातचीत की और उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की। इस बैठक में रामेश्वर महतो की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर असमंजस को और गहरा किया। टूट की आशंका के बीच कुशवाहा ने संगठनात्मक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई। पहले मधुबनी विधायक माधव आनंद को विधानसभा में RLM का सचेतक बनाया गया और अब पहले नाराज रहे आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
जातिगत संतुलन की राजनीति
राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीति अब तक कुर्मी और कोइरी जातियों यानी लव-कुश समीकरण पर केंद्रित रही है। यही सामाजिक आधार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) की राजनीति का भी केंद्र रहा है और बिहार की सत्ता राजनीति में इसे अहम माना जाता है।
2023 की जाति आधारित गणना के अनुसार, बिहार में कोइरी (कुशवाहा) जाति की आबादी करीब 4.2 प्रतिशत और कुर्मी जाति की 2.87 प्रतिशत है, जबकि राजपूत समाज की आबादी लगभग 3.45 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में सवर्ण वर्ग से आने वाले आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाना, पार्टी में जातिगत संतुलन साधने और नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कुशवाहा की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

