
UPSC रिजल्ट में नाम से हुआ भ्रम, जश्न के बाद शिखा ने मानी गलती
UPSC रिजल्ट की पीडीएफ में सिर्फ नाम देखकर बुलंदशहर की शिखा ने 113वीं रैंक अपनी मान ली। बाद में रोल नंबर मिलाने पर पता चला कि चयन हरियाणा की दूसरी शिखा का हुआ है।
मुझे लगा मेरा ही चयन हुआ है मैंने नाम देखा था रोल नंबर नहीं… UPSC के परिणाम की पीडीएफ में सिर्फ अपना नाम देखकर बुलंदशहर की शिखा ने 113वीं रैंक अपनी मान ली। परिवार ने जश्न भी मना लिया, रिश्तेदारों और परिचितों को खुशखबरी दे दी गई। लेकिन कुछ ही समय बाद जब सच्चाई सामने आई तो पूरी कहानी बदल गई। दरअसल, जिस 113वीं रैंक को शिखा अपना समझ रही थीं, वह किसी दूसरी उम्मीदवार की निकली। दोनों का नाम एक जैसा होने के कारण यह भ्रम पैदा हुआ।
देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम जैसे ही जारी हुआ, बुलंदशहर के एक साधारण परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। खबर आई कि उनकी बेटी शिखा ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल कर ली है। देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई। पड़ोसी, रिश्तेदार और परिचित बधाइयां देने पहुंचने लगे। हर कोई यह मान रहा था कि साधारण परिवार की बेटी ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। लेकिन इस खुशी के बीच एक छोटी-सी चूक छिपी हुई थी, जो थोड़ी देर बाद सामने आ गई।
नाम देखा, रोल नंबर नहीं
बुलंदशहर की शिखा ने खुद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि रिजल्ट आने के बाद उन्होंने UPSC की पीडीएफ सूची में अपना नाम देखा और खुशी से भावुक हो गईं। उस समय उन्होंने रोल नंबर की जांच नहीं की।
शिखा के अनुसार जिस उम्मीदवार का चयन हुआ है वह दूसरी शिखा हैं। हमारा नाम एक जैसा है। मैंने सिर्फ नाम देखा और रोल नंबर नहीं देखा। यही मेरी गलती थी।
शिखा के पिता प्रेमचंद ने भी इस घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जब शिखा ने अपना नाम देखा तो वह भावुक हो गईं और तुरंत घरवालों को खुशखबरी दे दी। उन्होंने बताया कि उस समय वह अस्पताल में थे। बेटी ने रोल नंबर नहीं देखा, सिर्फ नाम देखा। नाम देखते ही भावुक हो गई और हमें बता दिया। जैसे ही इसने बताया, हम भी भावुक हो गए। हमें लगा कि हमारी बिटिया का चयन हो गया है। कुछ समय तक परिवार के सभी लोग यही मानते रहे कि शिखा ने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है।
इलाके में फैल गई थी कामयाबी की खबर
जैसे ही यह खबर आसपास के लोगों तक पहुंची, बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर भी शिखा की सफलता की चर्चा होने लगी। लोगों को यह कहानी इसलिए भी प्रेरित कर रही थी क्योंकि शिखा का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है। बुलंदशहर के एक इंटर कॉलेज में शिखा के दादा चपरासी के पद पर काम करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने हमेशा बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी।
शुरुआत में जब यह खबर सामने आई कि शिखा ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल की है, तो इसे संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी के रूप में देखा जाने लगा।लोग कहने लगे कि एक चपरासी की पोती ने देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के सामने परिस्थितियां मायने नहीं रखतीं। हालांकि बाद में साफ हो गया कि नतीजे को लेकर भ्रम हुआ था।
गांधी बाल निकेतन से शुरू हुई पढ़ाई
शिखा की शुरुआती पढ़ाई बुलंदशहर के गांधी बाल निकेतन कन्या इंटर कॉलेज से हुई।स्कूल के दिनों से ही वह पढ़ाई में अच्छी थीं और आगे बढ़ने की इच्छा रखती थीं। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के आईपी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की।कॉलेज के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करेंगी।
ग्रेजुएशन के बाद शिखा दिल्ली चली गईं और वहीं रहकर UPSC की तैयारी शुरू की। करीब दो साल की तैयारी के बाद उन्होंने पहली बार सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली।
दादा की आंखों में आ गए थे आंसू
जब यह खबर फैली कि शिखा ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल की है, तो परिवार के लोग बेहद खुश हो गए थे। परिवार के मुताबिक, यह खबर सुनकर उनके दादा भावुक हो गए थे और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। शिखा के बड़े भाई ने भी कहा था कि बहन की सफलता से पूरे परिवार का नाम रोशन हो गया है। हालांकि बाद में जब सच्चाई सामने आई तो परिवार ने स्थिति को समझा और इसे एक भूल मानकर आगे बढ़ने का फैसला किया।
प्रशासन ने भी ली जानकारी
जब यह खबर तेजी से फैलने लगी तो स्थानीय प्रशासन ने भी इस मामले में जानकारी ली। शिखा के पिता के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे बयान देने को कहा था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि नाम एक जैसा होने की वजह से भ्रम हुआ है और वास्तविक चयन किसी दूसरी शिखा का हुआ है। दरअसल, UPSC में 113वीं रैंक हासिल करने वाली असली उम्मीदवार हरियाणा के रोहतक की शिखा हैं।

