
यूपी में 178 प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस रद्द, 281 के खिलाफ केस दर्ज
प्रदेश में निजी अस्पतालों के खिलाफ योगी सरकार को करीब 500 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके बाद ये कदम उठाया गया
उत्तर प्रदेश सरकार ने नियमों का पालन न करने वाले प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई का डंडा चलाया है। सरकार को मिली शिकायतों और निरीक्षण के बाद प्रदेश के 178 प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। हालांकि, इनमें से 59 अस्पतालों के लाइसेंस सुनवाई के बाद बहाल कर दिए गए। यह जानकारी सोमवार को विधानसभा में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दी।
समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान के प्रश्न के उत्तर में डिप्टी सीएम पाठक ने बताया कि निजी अस्पतालों के खिलाफ करीब 500 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच और कार्रवाई के दौरान 281 अस्पतालों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के आरोप में मामले दर्ज किए गए।
उपमुख्यमंत्री, जो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग भी संभालते हैं, ने कहा कि 533 अस्पतालों को सीज किया गया है, जबकि 1,542 अस्पतालों को नियमों के अनुपालन में सुधार के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
विधानसभा में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या सरकार निजी अस्पतालों की अत्यधिक बिलिंग पर नियंत्रण, परामर्श शुल्क और मेडिकल जांच दरों में एकरूपता लाने की योजना बना रही है। इस पर पाठक ने स्पष्ट किया कि फिलहाल निजी डॉक्टरों की परामर्श फीस या मेडिकल जांच की दरें तय करने की कोई नीति नहीं है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आम जनता को परामर्श और दवाओं सहित मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में निर्धारित पैकेज के तहत 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल रहा है। वहीं, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत कवर किया गया है।

