विजय के लिए नई मुश्किल: TVK नेता आधारव अर्जुना के बयान से भड़के रजनीकांत फैंस
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जब विजय ने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) लॉन्च की और खुद को एंटी-एस्टैब्लिशमेंट ताकत घोषित किया, तब ‘थलैवर-थलापति’ की प्रतिद्वंद्विता, जो सालों से सोशल मीडिया पर सिर्फ फैंस के बीच सिमटी थी, खुलकर राजनीतिक रूप ले गई। रजनीकांत के समर्थकों ने विजय पर “विरासत पर सवारी” करने का आरोप लगाया, जबकि विजय के फैंस का कहना था कि उनके हीरो में वह हिम्मत है, जो उनके नेता में नहीं थी।

विजय के लिए नई मुश्किल: TVK नेता आधारव अर्जुना के बयान से भड़के रजनीकांत फैंस

रजनी समर्थक #AadhavArjunaApologise ट्रेंड कर रहे हैं और खुले तौर पर हर विधानसभा क्षेत्र में TVK उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने की धमकी दे रहे हैं।


तमिलनाडु में, जहां सिनेमा धर्म की तरह है और फैन क्लब वोट बैंक की तरह काम करते हैं, वहां कभी-कभी खामोशी भी भाषण से ज्यादा असरदार होती है। TVK के वरिष्ठ नेता आधारव अर्जुना के रजनीकांत पर दिए गए बयान ने न सिर्फ पुराना विवाद फिर जिंदा कर दिया, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है—वह भी ऐसे समय में जब विजय की नई पार्टी के लिए यह बेहद अहम दौर है।

रजनीकांत, जिन्हें अक्सर ‘थलैवर’ (नेता) कहा जाता है, तमिलनाडु में एक लगभग पौराणिक दर्जा रखते हैं। उनकी फिल्में हर वर्ग के लोगों तक पहुंचती रही हैं और उनके डायलॉग आम बातचीत का हिस्सा बन गए हैं।

2017-2020 के दौरान, जब उन्होंने रजनी मक्कल मंड्रम के जरिए राजनीति में आने के संकेत दिए, तब पूरा राज्य उनकी ओर देख रहा था। हालांकि, बाद में उन्होंने कोविड-19 महामारी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राजनीति में प्रवेश नहीं करने का फैसला किया। उनके समर्थकों ने इसे जिम्मेदारी भरा कदम बताया, कायरता नहीं।

2024 में विजय ने अपनी नई पार्टी बनाई। उनके फैंस लंबे समय से उन्हें एक निडर, नई पीढ़ी के नेता के रूप में पेश करते रहे हैं—जो “वह पूरा कर रहे हैं, जो रजनी नहीं कर पाए।”

फैंस के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता

हालांकि कमल हासन को रजनीकांत का प्रतिद्वंद्वी और अजीत कुमार को विजय का समकालीन प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, लेकिन रजनी-विजय के फैंस के बीच हमेशा एक अंदरूनी टकराव रहा है।

TVK के लॉन्च के बाद यह प्रतिद्वंद्विता पूरी तरह राजनीतिक हो गई।

अर्जुना का बयान और विवाद

पिछले हफ्ते एक TVK प्रदर्शन के दौरान आधारव अर्जुना ने आरोप लगाया कि DMK के “पहले परिवार” ने रजनीकांत को धमकाया, जिसके कारण उन्होंने राजनीति में आने का फैसला छोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि रजनीकांत में सिस्टम बदलने की इच्छा तो थी, लेकिन “मानसिक मजबूती” और वह हिम्मत नहीं थी, जो विजय में है।

यह बयान बेहद भड़काऊ साबित हुआ और रजनी के फैंस नाराज हो गए।

विरोध और प्रतिक्रिया

वेल्लोर के रजनी फैन क्लब ने कहा, “रजनीकांत ने छोटी राजनीति नहीं की। उन्होंने महामारी के दौरान लाखों फैंस की जान बचाने के लिए खुद को पीछे किया—यही असली हिम्मत है।”

फिल्म निर्माता धनंजयन गोविंद ने भी अर्जुना की आलोचना की। मदुरै में रजनी फैंस ने माफी की मांग करते हुए बड़े-बड़े पोस्टर लगाए।

पूर्व रजनी मक्कल मंड्रम समन्वयक अर्जुना मूर्ति ने विजय को खुला पत्र लिखकर चेतावनी दी कि ऐसे “अपरिपक्व तत्व” TVK के लिए राजनीतिक बोझ बन रहे हैं।

राजनीतिक दलों की भी प्रतिक्रिया

भाजपा नेता नैनार नागेंद्रन, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और एआईएडीएमके नेता एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने भी माफी की मांग की और इसे एक सांस्कृतिक प्रतीक का अपमान बताया।

खुद रजनीकांत ने संयमित प्रतिक्रिया दी और 17 मार्च को एक बयान जारी कर अर्जुना की टिप्पणियों को “तथ्य के विपरीत” और “मानहानिकारक” बताया। उन्होंने अपने समर्थकों और फिल्मी व राजनीतिक हस्तियों का धन्यवाद भी किया।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड

रजनी फैंस #AadhavArjunaApologise ट्रेंड कर रहे हैं और खुले तौर पर TVK उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने की चेतावनी दे रहे हैं।

वहीं विजय के समर्थक पुराने वीडियो साझा कर जवाब दे रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि विजय ने हमेशा रजनी का सम्मान किया है।

वरिष्ठ पत्रकार सावित्री कन्नन ने अर्जुना के बयान का बचाव करते हुए कहा कि “रजनी में राजनीति में आने की हिम्मत नहीं थी, जबकि विजय में है।” इस बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया।

चुनाव से पहले बड़ा असर

यह विवाद ऐसे समय आया है जब TVK खुद को द्रविड़ दलों के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। अर्जुना पर नियंत्रण न रख पाने से पार्टी उन लाखों वोटर्स को नाराज कर सकती है, जो रजनीकांत को पसंद करते हैं।

तमिलनाडु जैसे बिखरे हुए चुनावी मैदान में महज 3-5 प्रतिशत वोटों का झुकाव भी दर्जनों सीटों का फैसला कर सकता है—और यही वजह है कि यह विवाद विजय के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।

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