हाशिए से फिर वापसी की तैयारी? विनय कटियार की सक्रियता के क्या हैं मायने
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हाशिए से फिर वापसी की तैयारी? विनय कटियार की सक्रियता के क्या हैं मायने

Vinay Katiyar की अचानक बढ़ी राजनीतिक सक्रियता ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। अब देखना यह होगा कि भाजपा उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाती है।


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BJP politics: अयोध्या की सियासत में एक बार फिर पुरानी आग सुलगने लगी है। लंबे समय तक हाशिए पर रहे, राम मंदिर आंदोलन के सबसे तेज और मुखर चेहरों में शुमार विनय कटियार अचानक फिर सक्रिय हो गए हैं। मुलाकातें, बयान और चुनाव लड़ने का ऐलान सब कुछ ऐसे समय पर हो रहा है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति नए समीकरणों की तलाश में है। सवाल साफ है कि क्या यह महज व्यक्तिगत वापसी की कोशिश है या फिर बीजेपी की सियासत में किसी बड़े मोड़ का संकेत?

हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विनय कटियार से मुलाकात की। इसके बाद कटियार ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इतना ही नहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई भी उनसे मिलने पहुंचे। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।

सक्रियता के राजनीतिक मायने?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, करीब दो महीने पहले विनय कटियार राजनीति से संन्यास की बात कर रहे थे। लेकिन पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने और उनसे मुलाकात के बाद उनका रुख बदल गया। अब कटियार फिर से अयोध्या में सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक की, लोगों से मुलाकात की और माहौल बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगर कटियार चुनाव लड़ते हैं तो कुर्मी समाज का समर्थन भाजपा की ओर लौट सकता है, जो 2024 में अयोध्या और अंबेडकर नगर में पार्टी से दूर हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि 2014 में जब कटियार ने लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया था, तभी से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें धीरे-धीरे पार्टी में हाशिए पर डाल दिया गया।

चुनाव लड़ेंगे तो क्या होगा असर?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अगर भाजपा 2027 में विनय कटियार को उम्मीदवार बनाती है तो वे जीत भी सकते हैं। लेकिन अगर वे पार्टी के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ते हैं तो मुकाबला दिलचस्प जरूर होगा, पर जीत आसान नहीं होगी। आज के समय में कुर्मी समाज में भाजपा के पास पंकज चौधरी और स्वतंत्र देव सिंह जैसे बड़े चेहरे हैं। वहीं, हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। ऐसे में कटियार के लिए अकेले दम पर भाजपा को चुनौती देना मुश्किल माना जा रहा है।

राम मंदिर आंदोलन के बड़े चेहरे रहे विनय कटियार

विनय कटियार राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी नेताओं में रहे हैं। उस दौर में साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती और विनय कटियार के भाषणों के बिना रैलियां अधूरी मानी जाती थीं। उनके आक्रामक भाषणों ने हिंदू समाज को संगठित करने में बड़ी भूमिका निभाई। बाबरी ढांचा विध्वंस और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई मामलों में उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हुए। विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल का उन्हें खुला समर्थन मिला, जिससे वे भाजपा के पहले बड़े कुर्मी चेहरे के रूप में उभरे। 1991 में, जब आंदोलन चरम पर था, भाजपा ने उन्हें फैजाबाद सीट से लोकसभा उम्मीदवार बनाया। इसी चुनाव में पंकज चौधरी और विनय कटियार ने पहली बार साथ चुनाव लड़ा था।

कैसे हाशिए पर चले गए कटियार?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2004 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कटियार से इस्तीफा मांगा। कटियार ने बीमारी का बहाना बनाने से इनकार कर दिया और साफ कहा कि वे पार्टी के कहने पर इस्तीफा दे रहे हैं। 2009 में राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर उन्हें अंबेडकर नगर से टिकट मिला। इस चुनाव में नरेंद्र मोदी उनके समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे। लेकिन एक मंचीय घटना के बाद पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज बताया जाता है।

मोदी-शाह युग में क्यों हुए कमजोर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2014 के बाद भाजपा ने हिंदुत्व और पिछड़े वर्ग की राजनीति में नए चेहरे आगे बढ़ाए। मोदी प्रधानमंत्री बने, योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का चेहरा बने और पिछड़े वर्ग में केशव मौर्य व स्वतंत्र देव सिंह को आगे लाया गया। विनय कटियार का स्वभाव कभी किसी के आगे झुकने वाला नहीं रहा। वे न पद की लालसा में रहे, न ही संगठन के दरवाजे खटखटाने में विश्वास रखते थे। इसी वजह से वे धीरे-धीरे पार्टी की मुख्यधारा से दूर होते चले गए।

राम मंदिर कार्यक्रमों में भी नहीं मिला पूरा सम्मान

विनय कटियार 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। लेकिन नवंबर 2025 में मंदिर निर्माण पूर्ण होने पर धर्मध्वजा फहराने के कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। इसे लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही।

अब क्या कहते हैं विनय कटियार?

विनय कटियार ने साफ कहा कि वे भाजपा से ही चुनाव लड़ेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगला चुनाव चाहे विधानसभा का हो या लोकसभा का, वे अयोध्या से ही लड़ेंगे। टिकट न मिलने की स्थिति में भी पार्टी नहीं छोड़ेंगे। मंदिर न जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हो चुके हैं, आगे जब इच्छा होगी दर्शन करेंगे। पंकज चौधरी से मुलाकात को उन्होंने सामान्य बताया और कहा कि वे पहले भी मिलते रहे हैं। कटियार का कहना है कि भाजपा में आज भी मेहनती और योग्य कार्यकर्ताओं को ही आगे बढ़ाया जा रहा है, जैसे पहले उनके समय में होता था।

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