पश्चिम बंगाल में SIR पर गहराया संकट, BLOs ने दिया इस्तीफा, भड़के मतदाता
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ऑनलाइन सर्कुलेट हो रहे एक वीडियो में कथित तौर पर गुस्साए वोटर बुधवार को फरक्का ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं, जिसमें लोग गुस्से में कुर्सियां ​​फेंक रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में SIR पर गहराया संकट, BLOs ने दिया इस्तीफा, भड़के मतदाता

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि राजनीतिक टकराव और जन असंतोष का बड़ा मुद्दा बन चुका है।


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पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया गंभीर संकट का सामना कर रही है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस प्रक्रिया के मकसद और असर को लेकर आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अव्यवस्था और जनता का विरोध तेज होता जा रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि तय समय में यह प्रक्रिया पूरी हो पाएगी या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

मुर्शिदाबाद में BLOs का विरोध

मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का ब्लॉक में बुधवार (14 जनवरी) को करीब 30 बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने SIR का काम छोड़ दिया। इन अधिकारियों ने काम छोड़ने की वजह अत्यधिक काम का दबाव, चुनाव आयोग के निर्देशों में बार-बार बदलाव, मतदाताओं की नाराजगी और विरोध है। BLOs ने फरक्का ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) के बाहर धरना दिया और एक साथ इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को इस्तीफे सौंप दिए। एक BLO सैयद ताज इस्लाम ने कहा कि बार-बार सुनवाई नोटिस देने के बाद हम स्थानीय लोगों में अलोकप्रिय हो गए हैं। मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है और हम पर इतना बोझ है कि अब काम जारी रखना संभव नहीं। एक अन्य BLO ने कहा कि हम प्राथमिक स्कूल के शिक्षक हैं, टेक्नोलॉजी में बहुत दक्ष नहीं हैं। पहले कहा गया कि दस्तावेज नहीं लेने हैं, अब कहा जा रहा है कि मूल दस्तावेज जांचकर जमा करो। स्कूल की ड्यूटी के बाद यह काम नामुमकिन है।

कैंप में तोड़फोड़

बाद में हालात और बिगड़ गए, जब गुस्साए मतदाता BDO ऑफिस में लगे सुनवाई कैंप में घुस गए और तोड़फोड़ की। इस वजह से प्रक्रिया को दो घंटे से ज़्यादा समय तक रोकना पड़ा। पुलिस ने हालात काबू में किए और अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। मौके पर मौजूद TMC विधायक मनीरुल इस्लाम ने पार्टी की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि यह “स्थानीय लोगों का गुस्सा” था। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक मतदाताओं को चुन-चुनकर नोटिस भेजे जा रहे हैं।

सॉफ्टवेयर पर सवाल

आरोप है कि SIR में इस्तेमाल हो रहा सॉफ्टवेयर आधारित डिस्क्रेपेंसी सिस्टम मुस्लिम बहुल इलाकों में ज़्यादा मतदाताओं को “संदिग्ध” बता रहा है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 14 लाख मतदाताओं को बेवजह सुनवाई में बुलाया जा रहा है और वैध दस्तावेज जमा करने के बावजूद सॉफ्टवेयर फिर से नोटिस भेज रहा है। मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना और नदिया जैसे सीमावर्ती जिलों में यह समस्या ज्यादा देखी गई है। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक और सीमावर्ती इलाकों के मतदाता मताधिकार से वंचित न हो जाएं।

सुरक्षा बढ़ाई गई, दो गिरफ्तार

BJP विधायक गौरी शंकर घोष ने BDO ऑफिस में हुई तोड़फोड़ की निंदा करते हुए इसे “ध्यान भटकाने के लिए रचा गया ड्रामा” बताया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और भारतीय न्याय संहिता व सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। तनाव को देखते हुए अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

राज्यभर में फैल रहा विरोध

फरक्का की घटना अकेली नहीं है। गुरुवार (15 जनवरी) को उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया में भी हालात बिगड़ गए। लोगों ने राज्य राजमार्ग जाम किया, BDO ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस को स्थिति संभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वैध दस्तावेज देने के बावजूद बार-बार नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे परेशानी बढ़ रही है।

बुजुर्ग और प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा परेशान

पूर्व बर्दवान जिले के गांगुली डांगा गांव में सोमवार को ग्रामीणों ने तीन घंटे तक सड़क जाम की। करीब 1,100 लोगों को “तार्किक गड़बड़ी” के नाम पर सुनवाई में बुलाया गया था। ग्रामीणों की मांग थी कि सुनवाई स्थानीय बूथ पर ही हो, न कि दूर स्थित BDO ऑफिस में। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि बुजुर्गों और प्रवासी मजदूरों को इस प्रक्रिया से सबसे ज्यादा परेशान किया जा रहा है।

कोलकाता में प्रदर्शन

कोलकाता में भी नागरिक समाज ने आवाज़ उठाई। अभिनेता परमब्रत चट्टोपाध्याय और संगीतकार इंद्रदीप दासगुप्ता समेत कई कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि जल्दबाज़ी में की जा रही प्रक्रिया से अफरातफरी और भ्रम फैल रहा है, जिससे कमजोर वर्गों के मताधिकार पर खतरा है।

BJP के भीतर भी बेचैनी

हालांकि, BJP ने शुरुआत में SIR का समर्थन किया था, लेकिन अब पार्टी के भीतर भी असंतोष दिख रहा है। प्रदेश BJP अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि अगर मतदाता सूची पर आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया तो पार्टी 2026 विधानसभा चुनाव नहीं होने देगी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से राज्य का दौरा करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने भी SIR की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।

TMC का हमला

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को “अमानवीय” बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से लोगों की मौतें और अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं हुई हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ऐसे लोगों को सामने लाया, जिन्हें कथित तौर पर मतदाता सूची में मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग यहीं पैदा हुए और पले-बढ़े, लेकिन BJP के इशारे पर काम कर रहे चुनाव आयोग ने इन्हें मृत घोषित कर दिया।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को निराधार, बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। आयोग का कहना है कि SIR एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है। साथ ही, बढ़ते विरोध और धमकियों को देखते हुए चुनावी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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