गोरखपुर वोटर लिस्ट में चौंकाने वाला डेटा! एक ही घर में 233 लोगों के नाम दर्ज
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गोरखपुर वोटर लिस्ट में चौंकाने वाला डेटा! एक ही घर में 233 लोगों के नाम दर्ज

SIR Draft Voter List: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर विभिन्न समुदायों के 200 से अधिक लोगों के नाम एक ही घर में दर्ज हैं तो संभव है कि पूरे इलाके के लोगों के नाम इस घर से जोड़ दिए गए हों।


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Gorakhpur Voter List: यूपी के गोरखपुर में ऐसा घर है, जहां 233 लोग एक ही छत के नीचे रहते हुए भी मतदाता सूची में एक ही नंबर के तहत दर्ज हैं। हिंदू हों, मुस्लिम हों या सिख – सभी समुदायों के लोग एक ही घर में रजिस्टर्ड दिख रहे हैं। ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (SIR) में सामने आई चौंकाने वाली गलती है। स्थानीय लोग इसे डेटा की बड़ी लापरवाही बता रहे हैं और कह रहे हैं कि इससे उनके वोट डालने का अधिकार भी प्रभावित हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह साफ गलती है और इसे तुरंत सुधारना चाहिए था, लेकिन इसके कारण मतदाताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कुछ परिवारों ने कहा कि सही डेटा सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश के इस नेपाल-सीमा वाले जिले के लिए मतदाता सूची सुधार (Voter Roll Clean-up) अभ्यास की ड्राफ्ट सूची 6 जनवरी को जारी की गई। इस सूची में 6.45 लाख लोगों के नाम नहीं हैं, क्योंकि SIR अभ्यास के दौरान उनकी योग्यता अस्वीकृत पाई गई। आपत्तियों और दावों की विंडो 6 फरवरी तक खुली रहेगी।

गोरखपुर के वार्ड नंबर 16 में ड्राफ्ट मतदाता सूची में एक ही घर में 233 लोगों के नाम दर्ज हैं। इसी तरह की घटनाएं अन्य वार्डों से भी सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह चुनाव आयोग की गलती है और इसे जल्द से जल्द सुधारना चाहिए। डेटा का अध्ययन करने पर पता चला कि इस वार्ड की मतदाता सूची में क्रमांक 377 से 610 तक के 233 लोग घर नंबर 617 में दर्ज हैं। एक ही घर नंबर के तहत दर्ज नामों में जावेद, रज्जाक, सुदर्शन सिंह, गरिमा सिंह, महफूज़, हाशमी और शाहनवाज शामिल हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर विभिन्न समुदायों के 200 से अधिक लोगों के नाम एक ही घर में दर्ज हैं तो संभव है कि पूरे इलाके के लोगों के नाम इस घर से जोड़ दिए गए हों। ड्राफ्ट SIR सूची में त्रुटियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए घर-घर जाकर अभियान चलाया और लोगों से सुधार के लिए आवेदन करने को कहा। निवासियों ने कहा कि उन्होंने घर नंबर, पता, नाम और अन्य सभी विवरण सही तरीके से भरे और अधिकारियों को अंतिम रिकॉर्डिंग के लिए जांचने दिया, लेकिन अधिकारियों ने कोई गलती नहीं सुधारी।

एक निवासी ने कहा कि कहीं न कहीं लापरवाही है और डेटा को सुधारना चाहिए। यह गलती पिछली SIR 2003 से मौजूद है। हमें उम्मीद थी कि इस बार इसे सुधारा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्थानीय पार्षद के अनुसार, वार्ड नंबर 16 में ‘617’ नंबर का कोई भवन मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि नाम अन्य वार्डों और विधानसभा क्षेत्रों के घरों के साथ मिक्स हो गए लगते हैं। उन्होंने कहा कि 2003 की सूची में भी इसी तरह की विसंगतियां थीं। उस समय कॉलोनी से 550 से अधिक नाम दर्ज किए गए थे। इस समय निवासियों के पास कोई विकल्प नहीं है, उन्हें फिर से एन्यूमरेशन फॉर्म भरना और सुधार के लिए लंबी कतार में खड़ा होना पड़ेगा।

पार्षद ने कहा कि अगर चुनाव आयोग सही मतदाता सूची बनाए तो 100 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित किया जा सकता है। सही मतदाता सूची बहुत जरूरी है, क्योंकि कई लोग 2022 और 2024 में मतदान कर चुके हैं और अब उनके नाम हटा दिए गए हैं। सुधार होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब आपत्तियों का समय है। हम घर-घर जा रहे हैं, शिविर लगा रहे हैं, लोगों को जागरूक कर रहे हैं और सुधार फॉर्म भरने की सलाह दे रहे हैं।

गोरखपुर मामला उस समय सामने आया, जब सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने सुझाव दिया कि अगर SIR अभ्यास फॉर्म लोगों द्वारा दी गई जानकारी को सही ढंग से नहीं दर्शा पा रहे हैं तो उन्हें पुनः संशोधित किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी उस समय आई, जब चुनाव आयोग ने एडमिरल प्रकाश को बैठक में बुलाया और उन्हें मतदाता सूची सुधार अभ्यास के तहत अपनी पहचान साबित करनी थी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने चुनाव आयोग की आलोचना की और इसे बड़ी गलती बताया।

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