
कैसे ममता ने ED छापों को अपने फायदे में बदला? BJP की बंगाल योजना को किया नाकाम
TMC ने ED छापों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के रूप में पेश करके, कथित घोटाले से ध्यान हटाकर चुनावी और राजनीतिक निष्पक्षता पर बहस केंद्रित कर दी है।
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बेहद गरम है। राज्य में सियासी बहस लगातार अवैध घुसपैठ, भ्रष्टाचार और केंद्र के हस्तक्षेप के इर्द‑गिर्द घूम रही है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बार-बार कहानी अपने पक्ष में मोड़ने में सफल रही हैं।
I-PAC पर ED छापे
8 जनवरी को एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी I-PAC और इसके निदेशक और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ऑफिस पर 2020 के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत छापे मारे। I-PAC, ममता की पार्टी TMC के चुनावी रणनीति और प्रबंधन में कंसल्टेंसी करता रहा है। वहीं, BJP, जो TMC की 15 साल की सरकार खत्म करने की कोशिश में है, ने छापों को यह दिखाने की कोशिश की कि भ्रष्टाचार TMC का पर्याय बन चुका है।
ममता की तेज प्रतिक्रिया
लेकिन ममता ने तुरंत कहानी पलट दी। उन्होंने छापे के दौरान साइट पर जाकर एक “हरी फाइल” और हार्ड डिस्क ले आईं, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनके पार्टी उम्मीदवारों की सूची और चुनाव रणनीति के दस्तावेज थे, साथ ही राज्य के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से संबंधित कागजात भी शामिल थे। ममता ने छापे के समय को चुनाव के करीब होने का फायदा उठाते हुए इसे राजनीतिक तौर पर प्रेरित बताया और कहा कि इसका मकसद उनके पार्टी के चुनावी अभियान को बाधित करना था, न कि भ्रष्टाचार से लड़ना।
केंद्र की एजेंसियों का चुनाव से पहले सक्रिय होना, लेकिन सालों से चल रहे भ्रष्टाचार मामलों में कोई सजा दिलाने में विफल रहना, ममता के दावे को और बल देता है। राजनीतिक टिप्पणीकार देबाशिस चक्रवर्ती के अनुसार, ममता ने अपने निर्वाचन क्षेत्र को यह संदेश दिया कि उन्होंने केंद्र की एजेंसियों के विरोधी दलों को दबाने के प्रयासों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
रैली में ममता का बयान
9 जनवरी को कोलकाता में एक रैली के दौरान ममता ने कहा कि मैंने जो किया, वह TMC की अध्यक्ष के रूप में किया। मैंने कुछ गलत नहीं किया। अगर हमारी पार्टी का चिन्ह सुरक्षित नहीं रहेगा तो मैं जनता के लिए कैसे लड़ूंगी? TMC ने कानूनी चुनौती भी दाखिल की, जिसमें कहा गया कि ED ने चुनाव या अपराध से जुड़े संवेदनशील राजनीतिक दस्तावेजों तक अवैध पहुंच बनाई।
पुलिस जांच और विपक्ष की प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की और जांच शुरू की कि छापों के दौरान कोई फाइल अवैध रूप से ले जाई गई या नहीं। CPI(M) और कांग्रेस ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया। CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि अधिकारी अपने कार्य क्षेत्र को सील कर देते हैं, फिर मुख्यमंत्री को वहां कैसे घुसने दिया गया?
BJP की रणनीति फेल
BJP ने SIR प्रक्रिया और घुसपैठियों के मुद्दे को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश की, लेकिन TMC ने इसे अत्याचार और वोटरों को परेशान करने वाला कदम बताया। ममता ने इसे “अमानवीय” बताते हुए कहा कि इसने कई स्वास्थ्य आपात स्थितियों और मौतों का कारण भी बना। विश्लेषकों के अनुसार, BJP की भ्रष्टाचार और घुसपैठ की रणनीति TMC के दबदबे और ममता की लोकप्रियता के चलते असफल रही। राजनीतिक विश्लेषक अमल सरकार कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में केंद्र की एजेंसियों की कार्रवाईयों को लंबे समय से राज्य और केंद्र के बीच संघर्ष के संदर्भ में देखा जाता है। जो अन्य जगह रूटीन समझा जाए, वह यहां केंद्र का अत्याचार माना जाता है। TMC ने ED छापों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के रूप में पेश करके, कथित घोटाले से ध्यान हटाकर चुनावी और राजनीतिक निष्पक्षता पर बहस केंद्रित कर दी है।

