धारवाड़ आंदोलन ने खोली कर्नाटक के रोजगार संकट की पोल, उजाकर की बड़ी हकीकत
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धारवाड़ आंदोलन ने खोली कर्नाटक के रोजगार संकट की पोल, उजाकर की बड़ी हकीकत

कर्नाटक में सरकारी नौकरियों के लाखों पद खाली पड़े हैं, जिससे बेरोजगार युवाओं में नाराज़गी बढ़ रही है। धारवाड़ समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।


एक तरफ सरकारी विभाग पर्याप्त कर्मचारियों की कमी के कारण ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवा नौकरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। प्रशासनिक देरी, कानूनी विवाद और लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच कर्नाटक में कुल 2,84,881 सरकारी पद खाली पड़े हैं। अगर सरकारी निगमों, विश्वविद्यालयों और कॉन्ट्रैक्ट पदों को भी जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या बढ़कर 4,00,978 हो जाती है। इससे काम कर रहे कर्मचारियों पर भारी दबाव पड़ रहा है। इन 2.84 लाख खाली पदों में से ज्यादातर ग्रेड C (1,66,021 पद) और ग्रेड D (77,614 पद) के हैं। लगभग 37,000 पद कॉन्ट्रैक्ट पर भरे गए हैं, लेकिन अस्थायी कर्मचारी स्थायी कर्मचारियों की जगह नहीं ले सकते। इससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ असहनीय हो गया है।

सरकार ने इस वित्त वर्ष में 56,000 पद भरने की मंजूरी दी थी, लेकिन साल खत्म होने को है और भर्ती प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है। अब नौकरी की तैयारी कर रहे युवा 2026-27 के बजट से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि न केवल 56,000 पद भरे जाएं, बल्कि कुल एक लाख भर्तियों के लिए भी फंड जारी किया जाए।

सड़क पर उतरे युवा

बुधवार (25 फरवरी) को कई युवा धारवाड़ की सड़कों पर उतर आए। उनकी मांग थी कि खाली पड़े सरकारी पदों को बिना और देरी के भरा जाए। राज्य के अलग-अलग गांवों से हजारों युवा पीजी और हॉस्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन बड़े विभागों, जैसे कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) और पुलिस विभाग की तरफ से अभी तक नई भर्ती की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ठोस फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज होगा और पूरे राज्य में फैल सकता है।

छात्रों की मुख्य मांगें

लंबित भर्ती परीक्षाओं के परिणाम तुरंत जारी किए जाएं। नई भर्ती की अधिसूचनाएं जारी की जाएं। जिन उम्मीदवारों की उम्र सीमा पूरी होने वाली है, उनके हितों की रक्षा की जाए।

भर्ती की उलझन

कई विभागों में सालों से भर्ती नहीं हुई है-

शारीरिक शिक्षा शिक्षक – 15 साल से भर्ती नहीं

वन विभाग – 5 साल से भर्ती नहीं

कृषि विभाग – 8 साल

बागवानी विभाग – 7 साल

पुलिस सब-इंस्पेक्टर – 5 साल

सब-रजिस्ट्रार – 10 साल

आबकारी विभाग – 9 साल

आंकड़े साफ बताते हैं कि 2024 में लगभग 2,58,000 स्वीकृत पदों में से एक भी पद नियमित भर्ती के जरिए नहीं भरा गया।

फिलहाल शिक्षा विभाग में 79,694 पद खाली हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग में 37,572, गृह विभाग (पुलिस सहित) में 28,188, उच्च शिक्षा में 13,599, राजस्व विभाग में 10,867 और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग में 10,504 पद खाली पड़े हैं। सरकार ने 2026 में लगभग 56,000 पद भरने का लक्ष्य रखा है। वित्त विभाग ने 24,300 नियुक्तियों के साथ पहले चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास तौर पर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 30,000 से ज्यादा बैकलॉग और खाली पदों को भरने को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, अभी तक नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

2026 की शुरुआत में कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) ने ग्रुप A और B पदों के साथ-साथ ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO) समेत कई पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। सरकारी कर्मचारी संघ के राज्य उपाध्यक्ष के. सतीश ने 'द फेडरल कर्नाटक' को बताया कि, '2.84 लाख पद खाली होने के कारण एक सरकारी कर्मचारी से तीन लोगों का काम कराया जा रहा है। इससे कर्मचारियों पर भारी बोझ पड़ रहा है और काम में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द इन पदों को भरना चाहिए और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए।'

आरोप-प्रत्यारोप में उलझी राजनीति

जैसे-जैसे संकट बढ़ रहा है, सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं। कांग्रेस सरकार का कहना है कि पिछली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की गलत नीतियों के कारण खाली पदों का बैकलॉग बढ़ा। वहीं बीजेपी का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने हालात नहीं सुधारे। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बयान जारी कर दावा किया कि उनकी सरकार ने 40,000 नए पद बनाए हैं। जबकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद एक भी नया पद सृजित नहीं किया।

कानूनी अड़चनें भी बड़ी वजह

भर्ती प्रक्रिया पर कानूनी रोक भी लग गई है। सरकार की 56% आरक्षण नीति के तहत भर्ती कराने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं। अदालत ने इस पर रोक लगाते हुए कहा कि यदि भर्ती करनी है तो 50% आरक्षण सीमा के भीतर ही करनी होगी। इस फैसले के बाद सरकार नई भर्ती शुरू करने से हिचक रही है। इसके अलावा प्रश्नपत्र लीक, मूल्यांकन में गड़बड़ी और आरक्षण नियमों के उल्लंघन जैसे विवादों ने भी भर्ती प्रक्रिया को और उलझा दिया है। यही वजह है कि ज्यादातर भर्तियां अदालतों में फंसी हुई हैं।

(यह लेख मूल रूप से The Federal कर्नाटक में प्रकाशित हुआ है।)

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