
सियासत का नया ट्विस्ट: संजय राउत ने क्या कहा, जिससे बीजेपी और शिंदे गुट हिल गए?
BMC majority seats: मुंबई को नया मेयर कब मिलेगा, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि बीएमसी का यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण और नई लड़ाइयों को जन्म दे रहा है।
Mumbai BMC Mayor Election: बीएमसी चुनाव को लेकर मुंबई ने जनादेश तो दे दिया है, लेकिन उसे अब तक अपना मेयर नहीं मिला। सत्ता के गलियारों में फैसले अटके हैं। ऐसे में मुंबई की सबसे बड़ी कुर्सी सियासी सौदेबाजी के बीच झूल रही है। हालांकि, इसी बीच महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में बीजेपी का मेयर चाहते हैं, लेकिन बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। राउत ने आरोप लगाया कि शिंदे गुट के जीते हुए पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल में रखा गया है। उन्हें बाहर आने-जाने की आजादी नहीं है। होटल अब उनके लिए जेल जैसा बन गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार है तो फिर इन पार्षदों को डर क्यों है?
बहुमत का गणित
बीएमसी में कुल बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है। बीजेपी के पास सिर्फ़ 89 सीटें हैं। इसका मतलब साफ है कि बीजेपी को मेयर बनाने के लिए किसी न किसी का समर्थन चाहिए। ऐसे में एकनाथ शिंदे की भूमिका अहम हो जाती है। लेकिन शिंदे गुट ने अब तक साफ नहीं किया है कि वह किसके साथ जाएगा।
समर्थन की अटकलें
संजय राउत के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सियासत और तेज हो गई। उन्होंने दावोस पहुंचने पर देवेंद्र फडणवीस की तारीफ करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस का विदेश में स्वागत होना गर्व की बात है। यह हर मराठी के लिए खुशी की बात है। इस पोस्ट के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि क्या उद्धव ठाकरे गुट बीजेपी को अप्रत्यक्ष समर्थन देने का संकेत दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर बीजेपी का मेयर बनता है तो ठाकरे गुट वोटिंग से दूर रह सकता है। हालांकि, राउत के बयान और पोस्ट को लेकर अलग-अलग मतलब निकाले जा रहे हैं।
#WATCH | Mumbai: At a press conference, Shiv Sena (UBT) Leader Sanjay Raut says, "... Narendra Modi wants BJP's Mayor, but he did not explain how. The BJP does not have a complete mandate. Shinde Sena’s winning candidates are being kept in the Taj Lands End Hotel, almost like… pic.twitter.com/MPq7GQ9cfQ
— ANI (@ANI) January 19, 2026
बीजेपी की लाइन: उद्धव ठाकरे से दूरी
वहीं, बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे किसी भी हालत में उद्धव ठाकरे गुट के साथ नहीं जाएंगे। बीजेपी को पीठ पीछे वार करने वालों की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेयर चुनाव में थोड़ी देरी हो सकती है। मुख्यमंत्री फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
असली टकराव किससे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे गुट की असली लड़ाई बीजेपी से ज़्यादा एकनाथ शिंदे से है। अप्रत्यक्ष समर्थन की बात दरअसल शिंदे गुट को दबाव में लाने की रणनीति हो सकती है। यानी मेयर की कुर्सी सिर्फ़ एक पद नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में ताकत दिखाने का जरिया बन गई है।

