
मार्शल आर्ट्स गुरु से मुख्यमंत्री, मणिपुर की राजनीति में नया मोड़
BJP ने राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले वाई. खेमचंद सिंह को मणिपुर का CM बनाया। मैतेई-कुकी हिंसा के बीच यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय नेतृत्व ने मणिपुर की राजनीति में एक निर्णायक और रणनीतिक कदम उठाते हुए वाई. खेमचंद सिंह को राज्य का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया है। 3 फरवरी को, राष्ट्रपति शासन समाप्त होने से ठीक पहले लिया गया यह फैसला मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को ताइक्वांडो के प्रसिद्ध मूव नैर्यो चागी (Axe Kick) से जोड़ा जा रहा है। एक ऐसा सीधा और असरदार प्रहार, जिसने राज्य की सत्ता की दिशा बदल दी।
मणिपुर की राजनीति में अलग छवि वाले नेता
वाई. खेमचंद सिंह मणिपुर की आमतौर पर गंभीर और तनावपूर्ण राजनीति में एक अलग पहचान रखते हैं। वे न सिर्फ एक अनुभवी राजनेता हैं, बल्कि एक प्रसिद्ध ताइक्वांडो मास्टर (Sabumnim) भी हैं।उनकी पहचान तेज निर्णय क्षमता, अनुशासन और कलाकार जैसी सहजता के लिए होती है। दोजांग (मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षण स्थल), डांस फ्लोर या विधानसभा—तीनों जगहों पर वे समान आत्मविश्वास के साथ मौजूद रहे हैं।
कौन हैं वाई. खेमचंद सिंह?
1 मार्च 1963 को जन्मे खेमचंद सिंह मणिपुर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वे इम्फाल वेस्ट के सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं और 2017 व 2022 विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उनका संसदीय अनुभव मजबूत रहा है। 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के स्पीकरस 2022 के बाद एन. बीरेन सिंह मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री, नगर प्रशासन एवं आवास विकास, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज शिक्षा जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी निभाई।
समुदायों के बीच सहमति बनाने की कोशिश
वाई. खेमचंद सिंह को मणिपुर की राजनीति में एक कंसेंसस-बिल्डर (Consensus Builder) के रूप में देखा जाता है। उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और संतुलन साधने की कोशिश की है, जो मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में दुर्लभ माना जाता है।उनकी ताइक्वांडो पृष्ठभूमि भी उनकी राजनीतिक छवि को मजबूती देती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें ताइक्वांडो में 5th Dan प्राप्त हुआ। समर्थक इसे उनके अनुशासन, धैर्य और संकट से लड़ने की क्षमता का प्रतीक मानते हैं।
संकट के दौर में रणनीतिक नियुक्ति
Manipur Ethnic Violence Update:
खेमचंद सिंह की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मणिपुर मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच गंभीर जातीय संघर्ष से गुजर रहा है। मई 2023 से शुरू हुई हिंसा ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित किया है।नई दिल्ली में हुई भाजपा विधायकों की बैठक में केंद्रीय नेतृत्व की सीधी भूमिका ने यह साफ कर दिया कि पार्टी राज्य में स्थिरता और संवाद आधारित नेतृत्व चाहती है।
अनुभवी नेताओं की मजबूत टीम
खेमचंद सिंह के साथ सरकार में तीन वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता शामिल किए गए हैं। नेमचा किपगेन, उपमुख्यमंत्री, थादौ समुदाय की वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री, लोसी डिखो, नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) नेता,माओ विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक,पूर्व मंत्री (PHED, प्रिंटिंग और स्टेशनरी)।
गोविंदास कोंथौजम
बिष्णुपुर सीट से लगातार सातवीं बार विधायक,भाजपा के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। इन नियुक्तियों को केंद्र सरकार की वृहद सामुदायिक प्रतिनिधित्व नीति के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे की राह आसान नहीं
हालांकि केंद्र सरकार का समर्थन खेमचंद सिंह को राजनीतिक मजबूती देता है, लेकिन उनकी असली परीक्षा अब शुरू होगी।जमीनी स्तर पर शांति बहाल करना, सभी समुदायों का भरोसा जीतना और समावेशी शासन लागू करना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।मार्शल आर्ट्स गुरु से मुख्यमंत्री बने वाई. खेमचंद सिंह के लिए यह भूमिका सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि मणिपुर के भविष्य को दिशा देने की जिम्मेदारी है।

