
‘नोएडा की डीएम CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी…’ युवराज मौत मामले में AAP ने उठाए सवाल
Yuvraj Mehta death case: यह हादसा नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। युवराज की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी की मिसाल बन गई है।
Noida engineer death: घना कोहरा, एक सुनसान सड़क और पानी से भरा एक गहरा गड्ढा, लेकिन असली डर वहां नहीं था। असली डर उस सिस्टम में था, जो सब कुछ देखकर भी हाथ पर हाथ धरे खड़ा रहा। नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत किसी एक गलती का नतीजा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक तंत्र के विफलता की कहानी है, जिसकी जिम्मेदारी गायब थी। इस घटना के बाद यूपी सरकार ने कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को निलंबित कर दिया, लेकिन इस फैसले को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सरकार की कार्रवाई को सिर्फ दिखावा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आईएएस अधिकारियों का हर कुछ साल में ट्रांसफर होना कोई बड़ी सजा नहीं है।
सौरभ भारद्वाज ने सीधे तौर पर नोएडा की डीएम मेधा रूपम की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उनका आरोप है कि रेस्क्यू ऑपरेशन और SDRF डीएम के अधीन आते हैं, फिर भी उन्हें बचाया जा रहा है। AAP नेता ने यह भी दावा किया कि डीएम को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। क्योंकि, वह ECI ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि भ्रष्ट IAS अधिकारियों पर मुकदमा चलाना कितना मुश्किल है, उन्हें सज़ा दिलवाने की बात तो भूल ही जाइए।
पूरा सिस्टम सड़ा हुआ है।
वहीं, घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। 19 जनवरी को नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया गया। उन्हें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी पद से भी हटाया गया। तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT)* बनाई गई है, जो 5 दिन में रिपोर्ट देगी। एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है। ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए।
कैसे हुआ हादसा?
16–17 जनवरी की रात युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घर लौट रहे थे। घना कोहरा और बेहद कम विजिबिलिटी होने के कारण उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार अनियंत्रित हो गई। कार टूटी हुई बाउंड्री वॉल से टकराकर 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे खुदाई वाले गड्ढे में गिर गई।
डेढ़ घंटे तक मदद के लिए गुहार लगाता रहा युवराज
हादसे के बाद युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए। वह करीब 90 से 120 मिनट तक वहां फंसे रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर कहा कि “पापा, मुझे बचा लो।” युवराज मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद के लिए इशारे भी करते रहे। आरोप है कि उस दौरान पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर मौजूद थी, लेकिन कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सके।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
युवराज मेहता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मौत की वजह दम घुटना (Asphyxia) और कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। यह रिपोर्ट साफतौर पर बताती है कि अगर समय पर रेस्क्यू होता तो युवराज की जान बच सकती थी।
सिस्टम की बड़ी विफलता?
यह हादसा नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। निर्माणाधीन इलाके में खुले और गहरे गड्ढे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं। रेस्क्यू टीम की मौजूदगी के बावजूद जान न बच पाना, इन सबको सिस्टम की बड़ी विफलता माना जा रहा है। युवराज की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी की मिसाल बन गई है।

