गलगोटियाज ने माफी मांगी, प्रोफेसर पर फोड़ा ठीकरा, यूनिवर्सिटी का ड्रोन भी सवालों के घेरे में
x
गलगोटियाज यूनिवर्सिटीज ने अपने माफीनामे में इस विवाद का पूरा ठीकरा अपनी इन महिला प्रोफेसर के सिर पर फोड़ दिया

गलगोटियाज ने माफी मांगी, प्रोफेसर पर फोड़ा ठीकरा, यूनिवर्सिटी का ड्रोन भी सवालों के घेरे में

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में विश्वविद्यालय की कम्युनिकेशन प्रोफेसर ड्रोन सॉकर एरिना को इन-हाउस इनोवेशन बताते हुए इसे भारत का पहला सिस्टम बताती नजर आ रही हैं।


Click the Play button to hear this message in audio format

Galgotias University ने रोबोडॉग वाले विवाद में आखिरकार माफी मांग ली है। यूनिवर्सिटी ने इस पूरे विवाद का का ठीकरा अपनी उन प्रोफेसर के सिर पर फोड़ दिया जिन्होंने डीडी न्यूज के कैमरे पर चाइनीज रोबोडॉग को गलगोटियाज का विकसित किया हुआ बता दिया था। इस पूरे विवाद में भारी फजीहत होने के बाद सरकार के निर्देश पर गलगोटियाज यूनिवर्सिटी को एक्सपो क्षेत्र भी खाली करना पड़ा है।

गलगोटियाज की माफी

इस बीच, गलगोटियाज यूनिवर्सिटी ने भी प्रदर्शनी स्थल खाली करने की पुष्टि की है और एआई समिट में रोबोडॉग को लेकर हुए विवाद पर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी है।

यूनिवर्सिटी की ओर से रजिस्ट्रार द्वारा जारी बयान में कहा गया है, "हाल ही में आयोजित एआई समिट में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति के लिए हम गहरी क्षमा प्रार्थना करते हैं। हमारे पवेलियन पर मौजूद एक प्रतिनिधि पूरी तरह से जानकारी में नहीं थीं। उन्हें उत्पाद की तकनीकी उत्पत्ति की जानकारी नहीं थी और कैमरे के सामने उत्साहवश उन्होंने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें प्रेस से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।"

यूनिवर्सिटी के इस माफीनामे में कहा गया है कि, "हम आपसे समझदारी की अपेक्षा करते हैं, क्योंकि इस नवाचार को गलत रूप में प्रस्तुत करने का संस्थागत स्तर पर कोई इरादा नहीं था। गलगोटियास यूनिवर्सिटी शैक्षणिक ईमानदारी, पारदर्शिता और अपने कार्यों के जिम्मेदार प्रतिनिधित्व के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।"


गलगोटियाज के ड्रोन पर भी सवाल

इधर, रोबोडॉग का विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि गलगोटियाज की एक और डिवाइस सवालों के घेरे में आ गई है। वो डिवाइस है ड्रोन सॉकर एरिना, जिसको लेकर फैकल्टी सदस्यों का दावा है कि वह पूरी तरह से विश्वविद्यालय में विकसित गया है। अब सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने दावा किया है कि वो ड्रोन तो दक्षिण कोरिया का बना है।

ये नया विवाद तब सामने आया है जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा India AI Impact Summit 2026 में अपने स्टॉल पर प्रदर्शित उपकरणों में से रोबोडॉग को इन-हाउस इनोवेशन बताने की घटना को अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में विश्वविद्यालय की कम्युनिकेशन प्रोफेसर ड्रोन सॉकर एरिना को इन-हाउस इनोवेशन बताते हुए इसे भारत का पहला सिस्टम बताती नजर आ रही हैं। वह कहती हैं, “यह बहुत ही दिलचस्प चीज है। इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर इसके एप्लिकेशन तक सब कुछ विश्वविद्यालय में ही किया गया है। यह भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना है, जिसे आप गलगोटियास कैंपस में देखेंगे। यहां छात्र इस एरिना के अंदर गेम खेलते हैं, ड्रोन उड़ाते हैं, अपनी फ्लाइंग स्किल्स को निखारते हैं और इसे नई ताकत व बेहतर फीचर्स के साथ विकसित कर रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि यह ड्रोन दक्षिण कोरिया में उपलब्ध एक कमर्शियल प्रोडक्ट से मिलता-जुलता है। यूज़र्स ने Helsel का हवाला दिया, जो दावा करती है कि उसने 2015 में ड्रोन सॉकर की शुरुआत की थी और 2017 में इसे दक्षिण कोरिया में लॉन्च किया। यह खेल World Air Sports Federation द्वारा मान्यता प्राप्त है। कुछ यूज़र्स ने यह भी कहा कि प्रदर्शित डिवाइस बाजार में उपलब्ध Stryker V3 ARF जैसे उत्पाद से मिलता है।

यूथ कांग्रेस ने भी एक्स पर इस मुद्दे को उठाया। संगठन ने आरोप लगाया कि ड्रोन कोरियाई उत्पाद है और विश्वविद्यालय के दावों पर सवाल खड़े किए। प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए पोस्ट में लिखा गया, “पहले चीन, अब कोरिया। गलगोटियास ‘उधार की’ इनोवेशन के वर्ल्ड टूर पर है। उन्होंने दावा किया कि भारत का पहला ड्रोन सॉकर कैंपस में बनाया गया, लेकिन यह दरअसल कोरिया का Striker V3 ARF है। ‘आत्मनिर्भर’ या सिर्फ ‘आत्मनिर्भर-बाय’ मोदी जी?”

इससे पहले विश्वविद्यालय द्वारा प्रदर्शित ओरियन नामक रोबोटिक डॉग को चीनी रोबोटिक्स कंपनी Unitree के बनाए गए Unitree Go2 के रूप में पहचाना गया था। यह मामला तेजी से वायरल हुआ और समिट में विवाद का विषय बन गया। इस समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

विश्वविद्यालय ने ड्रोन से जुड़े आरोपों पर अभी तक कोई नई सफाई जारी नहीं की है। इससे पहले रोबोडॉग विवाद पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में संस्थान ने इसे “प्रोपेगेंडा” करार दिया था।

विवाद क्या है?

विश्वविद्यालय के स्टॉल पर प्रदर्शित रोबोटिक डॉग की पहचान Unitree Go2 के रूप में हुई थी, जो बाजार में उपलब्ध एक चौपाया रोबोट है और भारत में इसकी कीमत लगभग 2–3 लाख रुपये बताई जाती है।

आलोचकों का आरोप है कि इस रोबोट को समिट में विश्वविद्यालय की इन-हाउस इनोवेशन के रूप में पेश किया गया, जिससे स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय एआई मंच पर आयातित तकनीक के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे।

जांच बढ़ने पर समिट में विश्वविद्यालय के पवेलियन की बिजली आपूर्ति कथित तौर पर काट दी गई और आयोजकों ने संस्थान को प्रदर्शनी स्थल खाली करने के लिए कहा। सरकारी सूत्रों ने बाद में पुष्टि की कि अधिकारियों ने पारदर्शिता और अनुपालन मानकों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय को एक्सपो क्षेत्र खाली करने का निर्देश दिया।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

रोबोट के पहले प्रदर्शन के दौरान प्रोफेसर नेहा सिंह ने डीडी न्यूज़ से कहा था कि विश्वविद्यालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

उन्होंने कहा था, “हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 350 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले पहले निजी विश्वविद्यालय हैं और हमारे कैंपस में डेटा साइंस और एआई के लिए समर्पित ब्लॉक है। ओरियन को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है और जैसा आप देख सकते हैं, यह कई आकार और रूप ले सकता है।”

उसकी क्षमताओं का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा था, “यह थोड़ा शरारती भी है और निगरानी व मॉनिटरिंग जैसे छोटे कार्य कर सकता है।”

रोबोटिक डॉग विवाद के बाद विश्वविद्यालय ने बयान जारी कर कहा था, “स्पष्ट कर दें कि गलगोटियास ने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है और न ही ऐसा दावा किया है। हम ऐसे मस्तिष्क तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी तकनीकों का डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण करेंगे।”

Read More
Next Story