
आर्मी चीफ बोले, Shaksgam Valley में नहीं है कोई एक्टिविटी स्वीकार, पाक-चीन समझौते को बताया अवैध
चीन ने शक्सगाम घाटी पर दावा करते हुए कहा है कि शक्सगाम घाटी उसकी जमीन है और वहां जो सड़क, पुल और दूसरी निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं, वे पूरी तरह सही है. चीन ने भारत की आपत्ति को खारिज कर दिया है.
शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) और CPEC को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद गहरा गया है. आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी (COAS Upendra Dwivedi) ने शक्सगाम घाटी को लेकर चीन को करारा जवाब दिया है. सेना प्रमुख ने कहा, शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान-चीन (Pakistan-China) का 1963 का समझौता गलत और अवैध है.
उन्होंने कहा, भारत इस इलाके में चीन या पाकिस्तान की किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करता है. चीन और पाकिस्तान द्वारा शुरू किए गए CPEC 2.0 प्रोजेक्ट को भी भारत ने खारिज करता है.
दरअसल चीन का कहना है कि यह इलाका उसका है और वह वहां निर्माण कर सकता है. लेकिन भारत साफ कह चुका है कि शक्सगाम घाटी अब लद्दाख का हिस्सा है.
भारत के मुताबिक 1947 में जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) भारत में शामिल हुआ था. इसके बाद पाकिस्तान ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया और 1963 में इसे चीन को सौंप दिया, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करता है. इसलिए भारत आज भी शक्सगाम घाटी को अपना इलाका मानता है और वहां चीन-पाकिस्तान की किसी भी योजना का विरोध करता है.
इससे पहले सोमवार को चीन ने शक्सगाम घाटी पर दावा करते हुए कहा है कि शक्सगाम घाटी उसकी जमीन है और वहां जो सड़क, पुल और दूसरी निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं, वे पूरी तरह सही है. चीन ने भारत की आपत्ति को खारिज कर दिया है. चीन का कहना है कि 1963 में पाकिस्तान के साथ हुए समझौते के तहत यह इलाका चीन को मिला था, इसलिए वह वहां काम कर रहा है. पर भारत का कहना है कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है. चीन ने CPEC परियोजना का भी बचाव करते हुए कहा कि यह लोगों के विकास के लिए है. पर भारत इसका विरोध करता है, क्योंकि इसका एक हिस्सा भारत की जमीन से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है.

