x

AI दोधारी तलवार या विकास का इंजन? भारत कितना है तैयार

द फेडरल देश के साथ बातचीत करते हुए नितिन सेठ ने कहा, अमेरिका और चीन एआई में तेजी से आगे बढ़े क्योंकि उन्होंने भारी निवेश किया और प्रोडक्ट इनोवेशन पर ध्यान दिया. भारत की आईटी इंडस्ट्री लंबे समय तक सर्विस मॉडल पर केंद्रित रही.


Click the Play button to hear this message in audio format

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट खत्म हो चुका है, लेकिन इससे जुड़ी बहस अब और तेज हो गई है. सवाल सीधा है क्या भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर पाएगा? क्या हम सिर्फ तकनीक के उपभोक्ता बनकर रहेंगे या निर्माता भी बनेंगे? डिजिटल डेटा और एआई प्लेटफॉर्म Insido के को-फाउंडर और सीईओ नितिन सेठ ने कहा, AI दोधारी तलवार है. उन्होंने कहा, एआई अवसर भी है और चुनौती भी.

एक तरफ यह बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन ला रहा है सिर्फ साधारण काम नहीं, बल्कि निर्णय लेने जैसे जटिल काम भी अब मशीनें कर रही हैं. इसका सीधा असर आईटी और टेक्नोलॉजी सर्विस सेक्टर पर पड़ेगा, जो भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार रहा है. नितिन सेठ के मुताबिक “नौकरियों पर असर पड़ेगा, इसे नकारने से बेहतर है कि हम इसे स्वीकार करें और तैयारी करें. ”

भारत क्यों पीछे रह गया?

द फेडरल देश के साथ बातचीत करते हुए नितिन सेठ ने कहा, अमेरिका और चीन एआई में तेजी से आगे बढ़े क्योंकि उन्होंने भारी निवेश किया और प्रोडक्ट इनोवेशन पर ध्यान दिया. भारत की आईटी इंडस्ट्री लंबे समय तक सर्विस मॉडल पर केंद्रित रही. इससे स्थिर मुनाफा तो मिला, लेकिन रिसर्च और डीप टेक इनोवेशन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.

नितिन सेठ मानते हैं कि यह रणनीतिक कमी रही, लेकिन अब भी भारत के पास वापसी का मौका है. उन्होंने कहा इसे हासिल करने के लिए भारत के पास तीन बड़ी ताकतें हैं, पहला कम लागत में नवाचार (Frugal Innovation), दूसरा

वैश्विक भरोसा (Trust Factor) और तीसरा युवा और डिजिटल को समझने वाली आबादी. अगर भारत भरोसेमंद और किफायती एआई मॉडल विकसित करता है, तो वह ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक बड़ा तकनीकी केंद्र बन सकता है.

युवाओं के लिए चेतावनी और अवसर

नितिन सेठ ने कहा, एआई पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित करेगा. खासकर कोडिंग और दोहराए जाने वाले तकनीकी कामों पर असर पड़ेगा. लेकिन नितिन सेठ का मानना है कि भविष्य “जॉब सीकर” का नहीं, बल्कि “जॉब क्रिएटर” का है. उन्होंने युवाओं को देते हुए कहा, सिर्फ प्रोग्रामिंग स्किल पर निर्भर न रहें. समस्या समाधान की क्षमता विकसित करें,

रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच पर काम करें, उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें. किसी उद्योग (जैसे बैंकिंग, हेल्थकेयर, रिटेल) की गहरी समझ विकसित करें. उन्होंने कहा, “एआई युग उद्यमिता का युग है. ”

शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत

नितिन सेठ मानते हैं कि भारत की शिक्षा प्रणाली अभी भी रटने और नौकरी पाने की सोच पर आधारित है. स्कूल और कॉलेजों को स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ना होगा. प्रैक्टिकल सीखने, जोखिम लेने और प्रयोग करने की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा. वे सिलिकॉन वैली का उदाहरण देते हैं, जहां विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और निवेशक एक साथ मिलकर इनोवेशन का माहौल बनाते हैं.

एआई के खतरे भी कम नहीं

उन्होंने कहा, एआई के साथ गंभीर जोखिम भी जुड़े हैं जैसे डीपफेक और साइबर अपराध, डेटा प्राइवेसी का खतरा और एआई मॉडल्स में पक्षपात. उन्होंने कहा, चुनाव और समाज पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है. उनका कहना है कि डेटा स्टैंडर्ड और मजबूत गवर्नेंस जरूरी है, लेकिन अत्यधिक नियंत्रण से इनोवेशन को भी नुकसान न पहुंचे इसका संतुलन बनाना होगा.

एआई युग में प्रासंगिक कैसे रहें?

नितिन सेठ ने तीन मूल मंत्र देते हुए कहा,

1. कॉन्टेक्स्ट (संदर्भ की समझ) – सिर्फ तकनीक नहीं, उद्योग की गहरी समझ जरूरी है.

2. क्रिएटिविटी (रचनात्मकता) – मशीन से आगे सोचने की क्षमता.

3. कनेक्शन (मानवीय जुड़ाव) – नए विचार लोगों से संवाद से आते हैं.

नितिन सेठ ने कहा, एआई भारत के लिए खतरा नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अवसर है. लेकिन यह अवसर उन्हीं के लिए है जो बदलाव को स्वीकार करेंगे, सीखेंगे और जोखिम लेने को तैयार होंगे.

Read More
Next Story