डॉक्टर ने बताया, बच्चों में कैंसर पूरी तरह ठीक होने के बाद का जीवन
बच्चों में कैंसर केवल अनुवांशिकता के कारण नहीं होता है बल्कि और भी कई कारण होते हैं, जिनके चलते छोटे बच्चे इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ जाते हैं...
Child Cancer: हमारे देश में हर वर्ष लगभग 15 लाख लोग कैंसर के कारण जीवन खो देते हैं। इन आंकड़ों में बच्चों की संख्या भी कम नहीं है। हर साल हजारों बच्चों में कैंसर का पता चलता है। सवाल यह है कि बच्चों में कैंसर क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं, और कैंसर से ठीक होने के बाद उनकी जिंदगी कैसी होती है। इन्हीं सवालों पर विस्तार से चर्चा हुई डॉक्टर कनिका सूद शर्मा से, जो कैंसर विशेषज्ञ हैं और धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल दिल्ली में ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख हैं...
क्या बच्चों के कैंसर बड़ों से अलग होते हैं?
बच्चों में कैंसर के कारण वयस्कों से अलग होते हैं। 19 वर्ष से कम आयु के समूह को पीडियाट्रिक आयु वर्ग माना जाता है। इस आयु में तंबाकू, शराब या पारंपरिक जीवनशैली संबंधी जोखिम उतनी बड़ी भूमिका नहीं निभाते जितनी वयस्कों में। कई मामलों में कैंसर का कारण अनुवांशिक होता है। कुछ विशेष जीन पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते हैं और जोखिम बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए रेटिनोब्लास्टोमा आंख के पर्दे का एक कैंसर है, जिसमें अनुवांशिक कारक स्पष्ट रूप से जुड़े होते हैं। यदि बच्चे की आंख की पुतली रोशनी में सफेद चमकती दिखे तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है और तुरंत जांच करानी चाहिए। समय रहते इलाज हो जाए तो दृष्टि भी बचाई जा सकती है और रोग भी नियंत्रित हो सकता है।
बच्चों में कैंसर क्यों होता है?
अधिकांश बाल्यकालीन कैंसर स्वतः उत्पन्न होते हैं, जिनका स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं होता। हालांकि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान का धुआं, प्रदूषण या कुछ विषैले रसायनों का संपर्क भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है। अत्यधिक प्रदूषण और सूक्ष्म प्लास्टिक कणों के शरीर में प्रवेश को लेकर शोध जारी हैं, जिनसे हार्मोनल असंतुलन और दीर्घकालिक प्रभावों की आशंका जताई जा रही है। फिर भी किसी कारक को पूर्ण रूप से कैंसरजनक घोषित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों की सशक्त श्रेणी आवश्यक होती है।
बच्चों में कौन-सा कैंसर अधिक होता है?
बच्चों में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में रक्त कैंसर, मस्तिष्क ट्यूमर, लिंफोमा और किडनी के ट्यूमर शामिल हैं। अच्छी बात यह है कि कई रक्त कैंसर, विशेषकर यदि प्रारंभिक अवस्था में पकड़े जाएं, तो उपचार से पूरी तरह नियंत्रित हो सकते हैं और बच्चा सामान्य वयस्क जीवन जी सकता है। उपचार की योजना बनाते समय केवल रोगमुक्ति ही लक्ष्य नहीं होता, बल्कि बच्चे की आगे की वृद्धि, बौद्धिक विकास और प्रजनन क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है। उदाहरण के लिए बहुत छोटे बच्चों में मस्तिष्क ट्यूमर होने पर रेडिएशन से यथासंभव बचने की कोशिश की जाती है ताकि बढ़ते मस्तिष्क पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव न हों।
बच्चों में कैंसर के लक्षण क्या होते हैं?
माता पिता के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि किन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए। यदि बच्चा अत्यधिक थका हुआ दिखे, बार बार बुखार आए, त्वचा पर हल्की चोट से बड़े नीले निशान पड़ जाएं, नाक से बार बार रक्तस्राव हो, पेट असामान्य रूप से फूल जाए, वजन न बढ़े, बार बार सिरदर्द की शिकायत हो या चलते समय संतुलन बिगड़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। हर लक्षण कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन समय पर बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है। प्रारंभिक पहचान उपचार की सफलता की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है।
बच्चों को कैंसर से कैसे बचाएं?
गर्भावस्था के दौरान सावधानी भी महत्वपूर्ण है। धूम्रपान और शराब से पूर्ण परहेज, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लेना, संतुलित आहार और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन, नियमित जांच और अनावश्यक एक्स रे या सीटी स्कैन से बचाव जैसी सावधानियां सुरक्षित गर्भावस्था में सहायक होती हैं। यदि गर्भावस्था के दौरान कैंसर का पता चलता है तो उपचार की योजना गर्भावस्था की अवस्था पर निर्भर करती है। प्रथम तिमाही में उपचार सीमित विकल्पों के साथ संभव होता है, जबकि बाद की अवस्थाओं में कुछ शल्य प्रक्रियाएं की जा सकती हैं। मां का जीवन सर्वोपरि होता है और चिकित्सकीय निर्णय वैज्ञानिक आधार पर लिए जाते हैं।
कैंसर के बाद बच्चों का जीवन कैसा होता है?
कैंसर से ठीक हो चुके बच्चों के लिए उपचार के बाद की यात्रा भी महत्वपूर्ण होती है। उन्हें केवल शारीरिक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता होती है। स्कूल में वापसी, आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना और नियमित अनुवर्ती जांचें दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। देश में कई संस्थाएं और सहायता समूह इस दिशा में कार्य कर रहे हैं ताकि उपचार के बाद बच्चे सामान्य जीवन में सहजता से लौट सकें।
उपचार की लागत एक बड़ी चुनौती है। कैंसर उपचार लंबा और महंगा हो सकता है, विशेषकर जब आयातित दवाएं शामिल हों। सरकारी योजनाएं, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष, तथा विभिन्न गैर सरकारी संगठन आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। फिर भी स्वास्थ्य बीमा का महत्व अत्यंत अधिक है। यदि बीमारी से पहले बीमा लिया गया हो तो अधिकांश पॉलिसियां उपचार को कवर करती हैं। इसलिए प्रत्येक परिवार को समय रहते स्वास्थ्य बीमा अवश्य लेना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में आर्थिक संकट कम हो सके।
अंततः सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि जागरूकता और समय पर जांच जीवन बचा सकती है। डरने के बजाय सजग रहना आवश्यक है। कैंसर का नाम भय पैदा करता है। लेकिन विज्ञान ने उपचार के क्षेत्र में लंबी दूरी तय कर ली है। यदि समय पर पहचान हो और समुचित चिकित्सा मिले तो अनेक बच्चे न केवल कैंसर से लड़ते हैं बल्कि स्वस्थ, पूर्ण और सक्रिय जीवन भी जीते हैं।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

