दिल्ली सरकार का एक साल पूरा: रोहतक रोड पर बदहाली और खतरों का अंबार
रेखा गुप्ता सरकार के दावों के बीच रोहतक रोड पर अधूरा निर्माण और खुले सरिये दे रहे हैं हादसों को दावत। स्थानीय व्यापारियों और ई-रिक्शा चालकों में भारी रोष है

Delhi's CM Rekha Gupta's Government First Anniversary : दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार अपना एक साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। इस अवसर पर सरकार अपनी उपलब्धियों और चुनावी वादों को पूरा करने के बड़े दावे कर रही है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्री लगातार दिल्ली की सड़कों और पानी की व्यवस्था सुधारने की बात कह रहे हैं। हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर नजर आती है। द फेडरल देश की टीम ने जब इन दावों की सच्चाई जानने के लिए ग्राउंड जीरो का रुख किया तो चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। यमुना की सफाई के दावों के बाद टीम ने दिल्ली की सड़कों का हाल जाना। जनकपुरी में हाल ही में हुए हादसे ने सरकारी मशीनरी की लापरवाही को पहले ही उजागर कर दिया था। इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। रोहतक रोड पर मुंडका के पास जो स्थिति दिखी वह बेहद डरावनी है। यहाँ सरकारी लापरवाही किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। स्थानीय लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
राजधानी पार्क मेट्रो के नीचे 'मौत' का जाल
रोहतक रोड पर मुंडका स्थित राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन के नीचे की स्थिति अत्यंत दयनीय है। यहाँ सड़क पर खुदाई करने के बाद उसे केवल खानापूर्ति के लिए भर दिया गया है। नाला बनाने का काम पिछले काफी समय से अधूरा पड़ा है। सबसे खतरनाक बात यह है कि निर्माण कार्य के दौरान लगाए गए लोहे के सरिये खुले में खड़े हैं। यहाँ किसी भी प्रकार की कोई सुरक्षा बाउंड्री नहीं बनाई गई है। यह लापरवाही पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
जाम और व्यापार पर पड़ता असर
अधूरे निर्माण की वजह से रोहतक रोड पर घंटों जाम लगा रहता है। यहाँ टिम्बर की एक बहुत बड़ी होलसेल मार्केट स्थित है। यहाँ के स्थानीय व्यापारी अग्रवाल बताते हैं कि यह काम लंबे समय से लटका हुआ है। जब भी बारिश होती है तो नाले का पानी ओवरफ्लो होकर पूरी सड़क पर फैल जाता है। जलभराव के कारण सड़क और नाले के बीच का अंतर खत्म हो जाता है। खुले सरिये पानी के नीचे छिप जाते हैं जिससे गंभीर चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
नेताओं के दौरे के बाद भी स्थिति जस की तस
हैरानी की बात यह है कि इस जगह का दौरा खुद एलजी और मुख्यमंत्री कर चुके हैं। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी यहाँ का निरीक्षण किया है। मुंडका प्रवेश वर्मा का पैतृक गाँव है और उनका यहाँ से पुराना नाता है। इसके बावजूद अपने ही क्षेत्र की स्थिति सुधारने में वह नाकाम दिख रहे हैं। बड़े नेताओं के दौरों के बाद भी यहाँ की धूल और कीचड़ भरी सड़कों की किस्मत नहीं बदली है।
ई-रिक्शा चालकों की आजीविका पर संकट
इस बदहाली का सबसे बुरा असर ई-रिक्शा चलाने वालों पर पड़ा है। चालकों का कहना है कि सड़क खराब होने से उनके काम में भारी गिरावट आई है। जहाँ पहले वे दिन में चार चक्कर लगा लेते थे वहीं अब सिर्फ एक ही हो पाता है। जाम से बचने के लिए उन्हें सर्विस लेन या गलत दिशा से जाना पड़ता है। बारिश के समय सड़कों पर इतना कीचड़ होता है कि रिक्शा पलट जाते हैं। कई चालकों ने तो डर और घाटे की वजह से काम ही छोड़ दिया है।

