Pension की टेंशन खत्म! ऐसे करें रिटायरमेंट प्लानिंग
EPF और EPS स्कीम रिटायरमेंट के बाद के जीवन को बेहद आसान बनाती हैं. EPF लंबे अवधि की बचत यानी Long Term Saving के लिए सुरक्षित और अनुशासित रास्ता प्रदान करता है, जबकि EPS एक एन्युटी है, जिससे रिटायरमेंट के बाद रेगुलेर इनकम मिलता रहता है.
प्राइवेट सेक्टर में एम्पलॉयड लोगों को हमेशा इस बात की चिंता सताती है कि कैसे ये सुनिश्चित किया जाए कि रिटायरमेंट के बाद एक तयशुदा पेंशन उन्हें आजीवन मिलता रहे है जिससे बुढ़ापे में जीवन आराम से गुजारा जा सके. तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रिटायर होने के लिए 60 वर्ष की आयु होने का इंतजार नहीं करना चाहते. अपने fifties में ही रिटायर होना चाहते हैं क्योंकि निजी क्षेत्र में कंपनियों का भरोसा नहीं है. कब Layoff कर दें...job security है नहीं तो ऑटोमेशन भी तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है जो कि रोजगार के रास्ते में सबसे बड़ा खतरा है. ऐसे में रिटायरमेंट प्लानिंग करना हो तो इसके लिए क्या करना चाहिए? आज हम इसी बात पर चर्चा करेंगे और रिटायरमेंट को लेकर कैसे फाइनेंशियल प्लानिंग करें इस पर विस्तार से आपको बतायेंगे.
प्राइवेट सेक्टर या कॉरपोरेट जगत में जो भी व्यक्ति एम्पलॉयड होता है. रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए उनके सामने दो फाइनेंशियल विकल्प होते हैं एम्प्लॉय प्रॉविडेंट फंड (EPF) और एम्प्लॉय पेंशन स्कीम (EPS).
EPF और EPS स्कीम रिटायरमेंट के बाद के जीवन को बेहद आसान बनाती हैं. EPF लंबे अवधि की बचत यानी Long Term Saving के लिए सुरक्षित और अनुशासित रास्ता प्रदान करता है, जबकि EPS एक एन्युटी प्लान है, जिससे रिटायरमेंट के बाद रेगुलेर इनकम मिलता रहता है.
अगर आप Salaried Employee हैं, तो आप भी Employee Provident Fund में योगदान देते हैं और आपका Employer भी. हर महीने आपकी सैलरी से थोड़ा पैसा कटता है और उतनी ही रकम आपका नियोक्ता भी जोड़ता है. और समय के साथ यह रकम Compound रिटर्न के साथ Multiply होता रहता है. Employer के योगदान का एक हिस्सा Employees’ Pension Scheme में भी जाता है. रिटायरमेंट के बाद, तय वर्षों की सेवा पूरी होने पर आपको हर महीने पेंशन मिलती है. रकम भले बहुत बड़ी न हो, लेकिन भरोसेमंद जरूर होती है.
EPF केवल उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है जो Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) में रजिस्टर्ड कंपनियों में काम करते हैं. 20 से अधिक कर्मचारियों वाली किसी भी कंपनी को अपने एम्पलॉय को ये फैसिलिटी देना अनिवार्य है. EPF के तहत कर्मचारी यानी Employee और नियोक्ता Employer दोनों ही वेतन में (बेसिक पे + महंगाई भत्ता) का 12% योगदान करते हैं. Employer जो योगदान देता है उसमें से 3.67% रकम EPF फंड में जाता है और शेष राशि Employee Pension Scheme में जमा होती है.
वित्त वर्ष 2024–25 के लिए EPF पर 8.25% ब्याज निर्धारित किया गया है. 2025-26 के लिए ईपीएफ रेट अभी तय नहीं हुआ है. EPF योगदान पर धारा 80C के तहत सालाना ₹1.5 लाख के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है. सालाना ब्याज से होने वाले 2.50 लाख रुपये के इनकम पर टैक्स नहीं देना होता है. लेकिन ईपीएफ से पैसे निकालने की शर्तें हैं. निकासी केवल कुछ शर्तों के तहत ही टैक्स-फ्री होती है.
Employee Pension Scheme यानी EPS का फायदा केवल EPF सब्सक्राइबर्स को ही मिलता है. Employee Pension Scheme योजना अलग तरह से सुरक्षा देती है. इसमें एकमुश्त रकम नहीं मिलता है बल्कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलता है. यानी नौकरी खत्म होने के बाद भी आमदनी का सिलसिला जारी रहता है. EPS का फायदा लेने के लिए ये जरूरी है कि सब्सक्राइबर्स कम से कम 10 वर्षों तक लगातार नौकरी करता रहे. और 58 वर्ष की आयु से पेंशन मिलना शुरू होता है. अगर एम्पलॉय के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो यह पेंशन उसके परिवार को मिलती रहती है।
यानी EPF आपकी जमा पूंजी है तो EPS मंथली इनकम की गारंटी. EPF और EPS से हर एम्पलॉय को ये भरोसा मिलता है कि रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकता है. EPF और EPS मिलकर वेतनभोगी को रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित बचत और रेगुलर इकम दोनों प्रदान करते हैं.
रिटायरमेंट प्लानिंग करने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) भी शानदार विकल्प जिसे आमतौर पर नेशनल पेंशन स्कीम भी कहा जाता है है. इसमें स्वरोज़गार करने वाले और नौकरीपेशा दोनों तरह के लोग निवेश कर सकते हैं. नेशनल पेंशन स्कीम सरकार द्वारा समर्थित सेविंग स्कीम है, जिसका मकसद लोगों को सुरक्षित रिटायरमेंट के लिए अपना पेंशन फंड बनाने में मदद करना है. निवेश करने से पहले NPS के फायदे और नुकसान को समझना जरूरी है. साथ ही, अलग-अलग फंड मैनेजर के प्रदर्शन की तुलना करके ही अपने पेंशन फंड के लिए सही विकल्प चुनना समझदारी होती है.
इसमें आप नियमित निवेश करते हैं और आपकी choice के मुताबिक आपका निवेश डेट और इक्विटी दोनों ही में निवेश किया जाता है. डेट में तो रिटर्न फिक्स होता है लेकिन इक्विटी में जो रिटर्न मिलता है वो शेयर बाजार की चाल पर निर्भर करता है. फिर भी दे देखा गया है कि NPS में जो भी पेंशन फंड हैं वो सालाना 9 से 10 फीसदी तक रिटर्न दे देते हैं.
हाल ही में पीएफआरडीए ने नेशनल पेंशन सिस्टम से Exits and Withdrawals के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों से एनपीएस को ज्यादा सब्सक्राइबर-फ्रेंडली बनाने और रिटायरमेंट इनकम सिक्योरिटी को मजबूत करने की कोशिश की गई है. NPS में रिटायरमेंट पर PFRDA के नए नियम के मुताबिक निवेशक 80% तक एकमुश्त रकम निकाल सकेंगे, पहले ये लिमिट 60 फीसदी हुआ करती थी. जबकि बाकी रकम एन्युईटी में चली जाती है जिससे हर महीने पेंशन मिलती रहती है. एन्युटी में डाले जाने वाले रकम का हिस्सा भी घटाकर 20% कर दिया गया है जो पहले 40 फीसदी था. इसके अलावा, सामान्य निकासी के लिए वेस्टिंग पीरियड को 60 साल की उम्र के होने की जगह 15 साल का निवेश पीरियड या 60 साल (जो पहले हो) कर दिया गया है. यानी एनपीएस से निकासी के लिए 60 वर्ष तक के होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
EPF- EPS और नेशनल पेंशन सिस्टम के अलावा भी कुछ स्कीम है जिसमें रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने के लिए के प्लानिंग कर सकते हैं.
पहले बात कर लेते हैं पीपीएफ की. PPF यानी Public Provident Fund में भी कई लोग रिटायर प्लानिंग के तहत पेंशन हासिल करने के लिए निवेश का करते हैं. PPF एक 15 साल की निवेश की योजना है. कई लोग पीपीएफ अकाउंट को पेंशन हासिल करने की स्कीम के तौर पर ट्रीट करते हैं. पीपीएफ को सबसे सेफ सेविंग ऑप्शन माना जाता है क्योंकि इसमें मिलता है. इसमें टैक्स-फ्री रिटर्न सरकार की गारंटी है. इस स्कीम में निवेश से लेकर ब्याज और रकम के निवासी पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है.
एक और स्कीम है नाम है अटल पेंशन योजना.....नाम से ही पता लग रहा है कि पेंशन स्कीम है. लेकिन ये unorganised sector यानी असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए है. इस पेंशन स्कीम में हर महीने या तिमाही योगदान देना होता है. और 60 साल की आयु के होने पर जितना आपने योगदान दिया है उसके आधार पर कम से कम 1,000 रुपये और अधिक से अधिक 5000 रुपये तक पेंशन मिलता है.

