2026 में फिर चमकेगा सोना? एक्सपर्ट बोले - 2 लाख तक जा सकती है कीमत, चांदी भी चमकेगा, देखें Video
सोने को लेकर फंडामेंटल काफी मजबूत है और हमारा मानना है कि वर्ष 2026 में ही सोना अपने पुराने हाई को पार करते हुए नया हाई बनाता हुआ नजर आएगा. चांदी में भी तेजी लौटेगी.
सोने-चादी के दामों में आई तेज गिरावट और कीमतों में जारी उठापटक से अगर आप परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. जनवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में सोने के दामों ने जो ऐतिहासिक हाई बनाया था इस वर्ष के आखिर तक फिर से उस लेवल को पार कर सकता है तो चांदी के दामों में भी निचले लेवल से जोरदारी तेजी आ सकती है. ये कहना है Prithvi Finmart के डायरेक्टर और कमोडिटी करेंसी हेड मनोज कुमार जैन का.
द फेडरल देश के साथ बातचीत करते हुए मनोज कुमार जैन ने कहा, सोने को लेकर फंडामेंटल काफी मजबूत है और हमारा मानना है कि वर्ष 2026 में ही सोना अपने पुराने हाई को पार करते हुए नया हाई बनाता हुआ नजर आएगा. उन्होंने कहा, दिसंबर 2026 तक सोने की कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में $6000 प्रति औंस और भारतीय बाजारों में करेंसी के फ्लक्चुएशन को ध्यान में रखते हुए 2 लाख प्रति 10 ग्राम के लेवल तक पहुंच सकती है. चांदी के कीमतों को लेकर मनोज कुमार जैन ने कहा, चांदी की अगर हम बात करें तो जनवरी महीने में FOMO Buying (पीछे छूट ना जाने के डर से की जाने वाले खरीदारी) देखने को मिली थी. उन्होंने कहा, इस प्रकार से की जाने वाली खरीदारी अब थम चुकी है और मार्केट अब फिर से अपने फंडामेंटल्स पर धीरे-धीरे लौटता हुआ नजर आएगा. मनोज कुमार जैन ने कहा, चांदी की कीमतें 2026 में पुराने हाई को पार करेगा ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आती है लेकिन 2026 के आखिर तक चांदी इंटरनेशनल मार्केट में फिर से एक बार $110 प्रति औंस और भारतीय बाजारों में लगभग 3.50 लाख रुपये किलो के लेवल तक जा सकती है.
पिछले दिनों सोने-चांदी के दामों में आई गिरावट को लेकर मनोज कुमार जैन ने कहा, साल 2025 सोने और चांदी के लिए एक स्वर्णिम वर्ष रहा है और 2026 की शुरुआत में पूरे वर्ष 2026 के लिए सोने और चांदी के लिए जो हमारा आउटलुक था वो पॉजिटिव था. लेकिन पूरे वर्ष के लिए सोने -चांदी की कीमतों को लेकर जो लक्ष्य रखा गया था वो लक्ष्य शुरुआत के एक महीने में ही हासिल हो गया. जिस तेजी के साथ दोनों कमोडिटी के दाम बढ़े वहां से मार्केट में करेक्शन का इंतजार था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से केविन वॉश को नए फेड चेयरमैन के रूप में नॉमिनेट करना और दुनिया भर के देशों के एक्सचेंज, रेगुलेटर्स ने सोने और चांदी के ऊपर मार्जिन में अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दी. इसके चलते मार्जिन कॉल ट्रिगर हुआ जिससे बाजार में घबराहट देखने को मिली जिसके बाद सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से लगभग 20% और चांदी की कीमतें भी लगभग 47% आ गई.
मनोज कुमार जैन ने कहा, सोने चांदी की कीमतों में कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है. उन्होंने बताया, डॉलर पर भरोसा कम हो रहा है, इसलिए निवेशक रियल एसेट जैसे सोना-चांदी की ओर जा रहे हैं, चीन अमेरिकी बॉन्ड कम कर रहा है और डॉलर वाले एसेट से दूरी बना रहा है. जापान की राजनीतिक स्थिरता और येन की मजबूती डॉलर के लिए नकारात्मक है, जो सोने-चांदी के लिए सकारात्मक है. ईरान-अमेरिका तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध की अनिश्चितता भी कीमतों को सहारा दे रही है. इन वजहों से 2026 की पहली तिमाही तक बाजार में वोलेटिलिटी बनी रह सकती है.
उन्होंने कहा, जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और इक्विटी SIP से भी ज्यादा रहा है. निवेशक अनिश्चितता के कारण पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई कर रहे हैं और सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं. मनोज कुमार जैन ने कहा, कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का मतलब हमेशा मैनिपुलेशन नहीं होता है. ज्यादा ट्रेडिंग और सट्टेबाजी से वोलेटिलिटी बढ़ती है. एक्सचेंज और रेगुलेटर बाजार पर नजर रखते हैं.
मनोज कुमार जैन ने कहा, छोटे और लंबे निवेशक SIP के जरिए सोना-चांदी में निवेश करें, एकमुश्त निवेश से बचें. ट्रेडर्स स्टॉप-लॉस और रिस्क मैनेजमेंट के साथ ट्रेड करें, ज्यादा लीवरेज न लें. उन्होंने कहा, शार्ट-टर्म के लिए ETF, लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड्स के फंड-ऑफ-फंड्स बेहतर हो सकते हैं.

