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आनुवांशिक कारक भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।

IVF की तरफ धकलेती हैं दैनिक जीवन से जुड़ी ये आदतें, युवा रहें सतर्क

यदि लंबे समय तक गर्भधारण में समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है ताकि समय रहते कारणों की पहचान कर उपचार किया जा सके...


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IVF : मां बनना कई महिलाओं के लिए जीवन का सबसे भावनात्मक अनुभव होता है। लेकिन आज के समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी समस्याएं और स्वास्थ्य संबंधी बदलावों के कारण इनफर्टिलिटी (बांझपन) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई बार यह समस्या किसी एक कारण से नहीं बल्कि जीवनशैली, हार्मोन, पर्यावरण और उम्र जैसे कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से पैदा होती है। यहां ऐसे 10 प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं, जो महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं...


1. टाइट कपड़े पहनना

बहुत अधिक टाइट कपड़े पहनने से शरीर में रक्त संचार प्रभावित हो सकता है और लंबे समय तक ऐसा करने से प्रजनन अंगों के आसपास असुविधा और तापमान में बदलाव जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक तंग कपड़े शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर असर डाल सकते हैं।



2. फास्ट फूड और प्रोसेस्ड डाइट

फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड डाइट में पोषण कम और वसा, नमक तथा रसायन अधिक होते हैं। ऐसी डाइट लंबे समय तक लेने से हार्मोनल संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे ओव्यूलेशन यानी अंडोत्सर्जन की प्रक्रिया पर असर पड़ता है।



3. सोने जागने का अनिश्चित समय

शरीर की जैविक घड़ी को सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। देर रात तक जागना, अनियमित नींद या शिफ्ट में काम करना इस रिदम को बिगाड़ सकता है। इससे हार्मोनल सिस्टम प्रभावित होता है और प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।



4. बढ़ता हुआ मोटापा

गलत खानपान, तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। मोटापा शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है।



5. बड़ी उम्र में शादी या मातृत्व की योजना

आजकल करियर और अन्य कारणों से कई महिलाएं देर से शादी या मातृत्व की योजना बनाती हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता दोनों कम होने लगती हैं। इसलिए अधिक उम्र में गर्भधारण स्वाभाविक रूप से कठिन हो सकता है।



6. हार्मोनल असंतुलन

कई हार्मोनल समस्याएं भी इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती हैं। इनमें

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम)

थायरॉयड की समस्या

हाइपोथैलेमिक या पिट्यूटरी डिसऑर्डर

जैसी स्थितियां शामिल हैं। इन स्थितियों में शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है।



7. धूम्रपान, शराब और विषाक्त पदार्थ

धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन शरीर की कोशिकाओं और हार्मोनल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा कुछ औद्योगिक या पर्यावरणीय रसायन एंडोक्राइन डिसरप्टर की तरह काम करते हैं, जो ओव्यूलेशन और अंडों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।



8. अत्यधिक मेकअप का उपयोग

कुछ कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर उत्पादों में फ्थेलेट्स, पैराबेन्स और BPA जैसे रसायन पाए जाते हैं। ये पदार्थ शरीर में एस्ट्रोजन जैसे प्रभाव दिखा सकते हैं और हार्मोनल सिग्नलिंग में हस्तक्षेप कर सकते हैं।

कुछ अध्ययनों में यह संकेत भी मिले हैं कि अत्यधिक एक्सपोज़र ओवेरियन रिज़र्व को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय लगातार संपर्क को लेकर चिंता जता रहा है।



9. संक्रमण और पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़

प्रजनन अंगों में संक्रमण या पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़ (PID) भी इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह फेलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे गर्भधारण में समस्या हो सकती है।



10. आनुवांशिक और अनसमझे कारण

कुछ मामलों में आनुवांशिक कारक भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। कई अध्ययनों में ऐसे जीन पहचाने गए हैं जो ओवेरियन फंक्शन पर असर डालते हैं। कई बार विस्तृत जांच के बावजूद भी कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता। ऐसी स्थिति को अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी कहा जाता है।



जीवनशैली में बदलाव से मिल सकती है मदद

विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसे कदम प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। साथ ही यदि लंबे समय तक गर्भधारण में समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि समय रहते कारणों की पहचान कर उपचार किया जा सके।



डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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