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गर्दन में दर्द और खिंचाव होने की वजह क्या है, कैसे बचें?

गर्दन में दर्द, अकड़न और खिंचाव से बचने के लिए डॉक्टर ने दी ये सलाह

डॉक्टर ने बताया कि किन वजहों के चलते गर्दन अकड़ने की समस्या होती है। जिन लोगों की सिटिंग जॉब है और पहले से दर्द की समस्या है, उन्हें किस बात का ध्यान रखना चाहिए


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Neck Pain: सुबह नींद खुलते ही अगर गर्दन घुमाने में खिंचाव महसूस हो, एक तरफ झुकाते ही तेज दर्द उठे या अचानक ऐसा लगे जैसे गर्दन जाम हो गई है, तो हम इसे साधारण भाषा में गर्दन अकड़ना कहते हैं। अधिकतर लोग इसे हल्की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सचमुच मामूली है या शरीर का कोई गहरा संकेत?

चिकित्सा विज्ञान बताता है कि गर्दन का अकड़ना केवल मांसपेशियों की थकान भर नहीं है। यह नसों पर दबाव, रक्त संचार में कमी और रीढ़ की संरचना में बदलाव का संकेत भी हो सकता है। गर्दन का भाग जिसे सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है, सात छोटी हड्डियों से बना होता है। इनके बीच डिस्क, मांसपेशियां और नसें अत्यंत संतुलित व्यवस्था में कार्य करती हैं। यही संतुलन हमारी गर्दन को लचीला बनाता है।

अब समझिए सर्दियों में यह समस्या अधिक क्यों दिखती है। ठंड के मौसम में शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया के रूप में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। इससे मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह कुछ कम हो जाता है। जब रक्त प्रवाह घटता है तो मांसपेशियां अधिक सख्त और जकड़ी हुई महसूस होती हैं। ऊपर से ठंड में हमारी शारीरिक गतिविधि भी घट जाती है। धूप कम मिलती है, व्यायाम कम होता है, शरीर कम हिलता है। परिणामस्वरूप मांसपेशियों की लचक घटती है और हल्का तनाव भी अकड़न में बदल सकता है।

आज की जीवनशैली इस समस्या को और बढ़ा रही है। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर झुककर काम करना, एक ही स्थिति में बैठे रहना, गर्दन को आगे झुकाकर स्क्रीन देखना, यह सब धीरे-धीरे मांसपेशियों को कमजोर करता है। लगातार तनाव में रहने वाली मांसपेशियों में सूक्ष्म ऐंठन उत्पन्न होती है। यही ऐंठन गर्दन की गति सीमित कर देती है और अकड़न का अनुभव होने लगता है।

उम्र बढ़ने के साथ एक और पहलू जुड़ता है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस नामक अवस्था में गर्दन की डिस्क में जलांश घटने लगता है। ठंड में यह कठोरता और बढ़ जाती है। कभी-कभी नसों पर दबाव बनता है और दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता। यह कंधे, बाजू या सिर के पिछले हिस्से तक फैल सकता है। यदि दर्द के साथ हाथों में झनझनाहट, कमजोरी या चक्कर जैसे लक्षण हों तो इसे साधारण अकड़न मानकर टालना उचित नहीं।

सोने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मोटा तकिया, ऊंचा तकिया या गर्दन को अस्वाभाविक कोण पर रखकर सोना सुबह की अकड़न का प्रमुख कारण है। गर्दन की प्राकृतिक गोलाई को उचित सहारा न मिले तो पूरी रात मांसपेशियां तनाव में रहती हैं। सुबह उठते ही दर्द सामने आ जाता है। दिन में हलचल से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या जड़ से समाप्त नहीं होती।

तो समाधान क्या है। इसका उत्तर जटिल नहीं है, पर नियमितता मांगता है। हर आधे घंटे में कुर्सी से उठना, कुछ कदम चलना, गर्दन और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करना अत्यंत लाभकारी है। ठंड में शरीर को गर्म रखना और सुबह की धूप में कुछ समय बिताना मांसपेशियों के लिए उपयोगी है। बैठते समय स्क्रीन आंखों की सीध में हो, पीठ सीधी रहे और गर्दन अत्यधिक आगे न झुके, इस पर ध्यान देना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि मौसम स्वयं दर्द पैदा नहीं करता। मौसम केवल उस कमजोरी को सामने लाता है जो पहले से शरीर में मौजूद होती है। यदि गर्दन बार-बार अकड़ रही है तो इसे चेतावनी मानिए। समय रहते चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लेना भविष्य की बड़ी समस्या से बचा सकता है।

गर्दन हमें दिन भर सिर का भार संभालने में सहारा देती है। यदि हम उसकी देखभाल नहीं करेंगे तो वह संकेत देकर ध्यान जरूर दिलाएगी। इसलिए अकड़न को अनदेखा न करें, बल्कि उसे समझें और सुधार की दिशा में छोटे लेकिन नियमित कदम उठाएं।



डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। कोई भी सलाह अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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