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PM Modi ने कहा, AI में दिखता है भारत का भविष्य, Anthropic के CEO ने सरकारों को लेकर कह दी बड़ी बात

पीएम मोदी ने कहा, AI समिट का भारत में होना, भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है.


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भारत मंडपम में AI समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी AI के चलते नौकरियां जाने के खतरे को लेकर बड़ा बयान दिया है. पीएम मोदी ने कहा, आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं, एक वो लोग हैं जिन्हें AI में भय दिखता है, वहीं कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें एआई में भाग्य दिखता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मुझे एआई में भारत का भाग्य और भविष्य दिखता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, दशकों पहले जब इंटरनेट की शुरुआत हुई, तो कोई सोच भी नहीं पाता था कि इससे कितनी Jobs बनेंगी, यही बात AI में है. आज कल्पना करना मुश्किल है कि आने वाले समय इस फील्ड में किस तरह की Jobs पैदा होंगी.

पीएम मोदी ने कहा, AI समिट का भारत में होना, भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है. 16 फरवरी को भारत मंडपम में AI समिट की शुरुआत हुई थी. लेकिन 19 फरवरी हुए ओपनिंग सेरेमनी समारोह में 20 देशों के राष्ट्रअध्यक्ष शामिल हुए जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन शामिल हुए. इसके अलावा AI और टेक वर्ल्ड के बड़े दिग्गजों ने भी समिट में शिरकत की. हालांकि इस मौके पर एक तस्वीर ऐसी देखने को मिला जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

AI Impact समिट के दौरान पीएम मोदी के साथ कई बड़े टेक लीडर्स सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, डारियो अमोडेई और अलेक्ज़ांडर वांग, ग्रुप फोटो के लिए आए तब ज्यादातर टेक वर्ल्ड के दिग्गजों ने एकजुटता दिखाने के लिए एक दूसरे का हाथ पकड़ा लेकिन Open Ai के सैम ऑल्टमैन और Antropc के डारियो अमोडेई ने एक दूसरे का हाथ नहीं पकड़ा. पूरी दुनिया में ये बात आग की तरह फैल गई. सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोडेई दोनों ही पहले दोनों पहले OpenAI में साथ काम करते थे. 2020 में अमोडेई सुरक्षा को लेकर मतभेद के कारण अलग हो गए और बाद में Anthropic बनाई.

Anthropic के सीईओ डारियो अमोडेई ने AI Summit में कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अवसरों और जोखिमों दोनों को आकार देने में भारत की भूमिका “बेहद महत्वपूर्ण है. अमोडेई ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत उन्नत AI सिस्टम से जुड़े आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है. डारियो अमोडेई ने कहा कि उन्नत AI सिस्टम कई बड़ी बीमारियों के इलाज में मदद कर सकते हैं, लोगों की सेहत बेहतर बना सकते हैं और खासकर गरीब देशों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सहायक हो सकते हैं. लेकिन उन्होंने कुछ खतरे भी बताए. उन्होंने कहा, AI का अपने-आप काम करना, लोगों या सरकारों द्वारा उसका गलत इस्तेमाल होना और कई नौकरियों पर असर पड़ना ऐसी चिंताएँ हैं, जिन पर सावधानी से ध्यान देना जरूरी है.

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने 15 अरब डॉलर के निवेश के साथ एक फुल-स्टैक AI हब बनाने की घोषणा करते हुए कहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया को “हाइपर प्रोग्रेस” यानी बहुत तेज़ प्रगति के दौर में ले जा सकता है. उनके मुताबिक AI नई वैज्ञानिक खोजों का रास्ता खोल सकता है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पारंपरिक विकास के लंबे चरणों को पार करने में मदद कर सकता है. उन्होंने कहा, Google भारत और अमेरिका के बीच चार नए समुद्र के नीचे बिछने वाले फाइबर-ऑप्टिक केबल सिस्टम बनाएगा। इसे AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

बहरहाल देश की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियां जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में पिछड़ती हुई नजर आ रही थी अब ग्लोबल टाई-अप के जरिए वापसी करने में जुटी हैं. टाटा ने ओपन एआई के साथ करार किया है तो इंफोसिस ने

Anthropic के साथ enterprise AI solutions के लिए समझौता किया है तो एल एंड टी ने एनवीडिया के साथ करार किया है. केंद्र सरकार ने AI में अगले 2 वर्षों में 200 बिलियन डॉलर निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य तय किया है. सवाल उठता यही है AI Summit के जरिए क्या भारत दुनिया का अगला बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब बन पाएगा या नहीं?

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