सड़क दुर्घटना कभी भी हो सकती है, पहला काम क्या करें? डॉक्टर से जानें
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए क्या करना चाहिए? चोटिल व्यक्ति को कैसे उठाना चाहिए? थोड़ी-सी लापरवाही चोट को गंभीर बना सकती है...
दिल्ली एम्स के ट्रॉमा सर्जन डॉ. जुनैद आलम के अनुसार सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को गलत तरीके से उठाना उसकी स्थिति को और गंभीर बना सकता है। इसलिए किसी भी दुर्घटना के बाद मदद करते समय कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ताकि घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सके और उसे दर्द कम से कम हो...
भारत में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति
भारत में हर साल लगभग 5 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें करीब 1.7 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। यानी औसतन हर 100 दुर्घटनाओं में लगभग 34 लोगों की जान चली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोगों को प्राथमिक उपचार और सही तरीके से घायल व्यक्ति को संभालने की जानकारी हो तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
सबसे पहले क्या करें?
अगर सड़क पर कोई व्यक्ति दुर्घटना में घायल दिखाई दे तो सबसे पहले उसे नजरअंदाज न करें।
उसके पास जाकर देखें कि वह सचेत (conscious) है या नहीं।
यदि वह सांस ले रहा है तो उसे हल्का करवट देकर लिटा दें ताकि मुंह की लार, खून या उल्टी फेफड़ों में न जाए।
तुरंत 112 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाएँ।
भारत में प्री-हॉस्पिटल केयर अभी उतनी विकसित नहीं है, इसलिए घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
घायल व्यक्ति को उठाने का सही तरीका
दुर्घटना के बाद अक्सर सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में चोट होती है। ऐसे में गलत तरीके से उठाने से स्थिति और खराब हो सकती है।
ध्यान रखने वाली बातें
घायल व्यक्ति को हाथ-पैर पकड़कर लटकाकर न उठाएं।
कोशिश करें कि दो या उससे अधिक लोग मिलकर उठाएं।
सिर और गर्दन को स्थिर (stable) रखें।
घायल व्यक्ति को किसी कठोर और समतल सतह पर लिटाकर ही शिफ्ट करें।
डॉक्टरों के अनुसार यदि गर्दन की हड्डी (सर्वाइकल स्पाइन) में आंशिक चोट हो और उसे गलत तरीके से उठाया जाए तो वह पूरी तरह लकवे (paralysis) में बदल सकती है।
खून बह रहा हो तो क्या करें
अगर घायल व्यक्ति के शरीर से खून निकल रहा हो तो तुरंत:
साफ कपड़ा, गमछा या दुपट्टा लेकर घाव पर दबाव डालें
इससे खून बहना कुछ हद तक रुक सकता है
हालांकि यदि शरीर में कांच या कोई नुकीली वस्तु धंसी हुई दिखाई दे, तो उसे निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उसे केवल ढककर अस्पताल ले जाना चाहिए।
हड्डी टूटने की आशंका हो तो अगर हाथ या पैर में फ्रैक्चर की आशंका लगे तो आसपास उपलब्ध कठोर वस्तु (लकड़ी, कार्डबोर्ड आदि) से उस हिस्से को सीधा करके बांध दें। इससे अस्पताल ले जाते समय हड्डी की स्थिति और खराब होने से बच सकती है
बेहोश व्यक्ति को कैसे संभालें?
अगर घायल व्यक्ति बेहोश है तो प्राथमिक लक्ष्य यह होना चाहिए कि उसकी सांस और रक्तसंचार जारी रहे। अस्पताल में डॉक्टर आमतौर पर ट्रॉमा मरीज का मूल्यांकन एक विशेष प्रक्रिया से करते हैं जिसे ABCDE प्रोटोकॉल कहा जाता है:
A – Airway (सांस का रास्ता खुला है या नहीं)
B – Breathing (सांस ठीक से चल रही है या नहीं)
C – Circulation (खून का प्रवाह और ब्लीडिंग)
D – Disability (दिमाग की स्थिति)
E – Exposure (पूरे शरीर की जांच)
दुर्घटनाएं किन लोगों में ज्यादा होती हैं?
डॉक्टरों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इनमें भी पुरुषों की संख्या अधिक होती है।
आंकड़े बताते हैं कि 50% से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन शामिल होते हैं। इसके पीछे लापरवाही, हेलमेट न पहनना और ट्रैफिक नियमों का पालन न करना प्रमुख कारण हैं।
हेलमेट क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि हेलमेट केवल चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि दिमाग को गंभीर चोट से बचाने के लिए लगाया जाना चाहिए।
अच्छी गुणवत्ता वाला हेलमेट इस्तेमाल करें
हेलमेट की स्ट्रैप ठीक से बांधें
छोटी दूरी के लिए भी बिना हेलमेट वाहन न चलाए।
डॉक्टरों के अनुभव के अनुसार जो लोग हेलमेट पहनते हैं, उनमें गंभीर सिर की चोट का खतरा काफी कम होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि
सड़क दुर्घटना के समय घबराने के बजाय सही कदम उठाना कई बार किसी की जान बचा सकता है। इसलिए जरूरी है कि लोग सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें और साथ ही दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक सहायता देने के बुनियादी तरीकों से भी परिचित हों।

