वक्फ की ज़मीन या अवैध कब्ज़ा? दोनों पक्षों की तीखी दलील !

15 Jan 2026 3:31 PM IST

तुर्कमान गेट मस्जिद के इर्द-गिर्द हटा अतिक्रमण। वकील का आरोप- 'अधिकारियों की सांठ-गांठ', याचिकाकर्ता का दावा- 'वक्फ के नाम पर कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं करेंगे'।

Turkman gate Masjid Case : राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट स्थित मस्जिद दरगाह फैज़ ए इलाही के इर्द-गिर्द हटाए गए अतिक्रमण को लेकर विवाद गहरा गया है। इस कार्रवाई के बाद अब मस्जिद पक्ष और याचिकाकर्ता अपने अपने दावे को सच बता रहे हैं। जहाँ मस्जिद कमेटी इस कार्रवाई को अवैध बता रही है, वहीं याचिकाकर्ता इसे अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी जीत मान रहे हैं।


मस्जिद कमेटी का पक्ष: "कोर्ट के आदेश की धज्जियाँ उड़ाई गईं"
मस्जिद कमेटी के वकील असलम बेग ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

न्यायालय की अवमानना: वकील असलम बेग का दावा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में स्पष्ट था कि अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई न की जाए, लेकिन एमसीडी और पुलिस ने इसे नज़रअंदाज़ किया।

दस्तावेजों की अनदेखी: कमेटी का कहना है कि उन्होंने मस्जिद से जुड़े गजट कागज़ात और अन्य दस्तावेज़ दिखाए थे, फिर भी तोड़फोड़ की गई।

सांठ-गांठ के आरोप: मस्जिद पक्ष ने आरोप लगाया है कि याचिकाकर्ता प्रीत सिरोही और एमसीडी अधिकारियों के बीच मिलीभगत है, जिसके तहत यह "गलत कार्रवाई" की गई।

याचिकाकर्ता प्रीत सिरोही का पक्ष: "वक्फ के नाम पर कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं"
दूसरी ओर, इस मामले में याचिका लगाने वाले प्रीत सिरोही ने अपने दावों को मजबूती से रखा है। उनका कहना है कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि सरकारी ज़मीन को कब्ज़ा मुक्त कराने की लड़ाई है:

10 साल की रिसर्च: सिरोही का दावा है कि उन्होंने अतिक्रमण और अवैध कब्जों पर 10 साल शोध किया है और देश भर में ऐसी 2500 जगहों को खाली कराने के लिए याचिकाएं दायर की हैं।

सुरक्षा का खतरा: उन्होंने बताया कि इस मुहीम के कारण उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं, जिसकी शिकायत वह रोज़ दिल्ली पुलिस से करते हैं। खतरे को देखते हुए उन्हें पुलिस सुरक्षा भी प्रदान की गई है।

जनसमर्थन का दावा: प्रीत सिरोही का कहना है कि वे सरकारी ज़मीन बचाने का काम कर रहे हैं और इसमें उन्हें आम जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है।

तनावपूर्ण स्थिति और पुलिस मुस्तैदी
फिलहाल इलाके में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। मस्जिद पक्ष अब इस मामले को दोबारा अदालत में ले जाने की तैयारी कर रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमों के तहत ही की गई है।