अमेरिका इजरायल ने किया ईरान पर हमला, सोने-चांदी के दामों में बंपर उछाल संभव
अमेरिका–ईरान तनाव बना हुआ है और अब तो अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया है। रूस–यूक्रेन युद्ध और चीन की केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीदारी जैसे इन कारणों से सेफ-हेवन डिमांड बनी हुई है।
मार्च में सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, लेकिन गिरावट पर खरीदारी की सलाह दी गई है। जनवरी और फरवरी में भारी उतार-चढ़ाव देखने के बाद अब निवेशकों की नजर मार्च के ट्रेंड पर है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, आने वाले महीने में भी सोना और चांदी में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, हालांकि मध्यम अवधि का रुख सकारात्मक दिख रहा है।
क्यों बना रहेगा उतार-चढ़ाव?
ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता अभी भी खत्म नहीं हुई है। अमेरिका–ईरान तनाव बना हुआ है और अब तो अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया है। रूस–यूक्रेन युद्ध और चीन की केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीदारी जैसे इन कारणों से सेफ-हेवन डिमांड बनी हुई है। यही वजह है कि गिरावट के बावजूद सोने में नीचे के स्तर पर मजबूत सपोर्ट देखने को मिल रहा है।
फरवरी निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण
फरवरी में पहले गिरावट और फिर तेज रिकवरी देखने को मिली। ऐसे में कई निवेशक असमंजस में रहे। एक्सपर्ट की सलाह है कि एकमुश्त निवेश से बचें और चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। उन्होंने कहा कि ETF या फिजिकल गोल्ड में SIP के जरिए निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। पोर्टफोलियो का 10–20% हिस्सा सोना और चांदी में रखना संतुलित रणनीति मानी जा रही है।
हाल ही में Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स को गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश की अनुमति दी है। इससे आगे चलकर मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
क्या फिर बनेंगे नए रिकॉर्ड?
जनवरी में सोना और चांदी ने लाइफटाइम हाई छुआ था। अनुज गुप्ता का मानना है कि 2026 तक नए हाई संभव हैं, लेकिन 2025 में कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं। उन्होंने बताया, दिवाली तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5400–5600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 100–110 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है. भारतीय बाजार में सोना 1.70–1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3–3.20 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है।
चांदी में ज्यादा हलचल क्यों?
चांदी केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है। इंडस्ट्रियल डिमांड, ट्रेडिंग एक्टिविटी और सीमित सप्लाई के कारण इसमें सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव रहता है। अगर अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर रहती हैं या कटौती सीमित होती है, तो सोना-चांदी में बड़ी तेजी की बजाय दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है।

