60 सेकेंड में खामेनेई का खात्मा, क्या अमेरिका- इजरायल ज्यादा तेज निकले?
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60 सेकेंड में खामेनेई का खात्मा, क्या अमेरिका- इजरायल ज्यादा तेज निकले?

इस तरह का दावा किया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप-बेंजामिन नेतन्याहू के मोर्चे ने 60 सेकेंड के ऑपरेशन में ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का खात्मा कर दिया था।


ईरान की सियासत में बड़ा नाम, 36 साल तक शासन करने का रिकॉर्ड और अमेरिका-इजरायल की आंख में चुभने वाले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई इस दुनिया में नहीं हैं। वजह यह नहीं कि वो अपनी मौत मरे है, वजह यह है कि अमेरिका और इजरायल की फौज ने उन्हें 60 सेकेंड में मार डाला। ऐसे में आपके दिल और दिमाग में कई तरह के सवाल कौंध रहे होंगे। मसलन क्या खामेनेई के सुरक्षा इंतजाम में कोई चूक रही है। क्या अमेरिका और इजरायल ज्यादा तेज और चालाक निकले। क्या खामेनेई की पकड़ आईआरजीसी पर कमजोर पड़ चुकी थी। क्या ईरान में गहराई तक इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की पैंठ गहराई तक है। ईरान के शीर्ष नेतृतव के बारे में जितनी सटीक जानकारी वहां के खुफिया एजेंसी को नहीं होती थी, उससे कहीं अधिक बेहतर समझ और जानकारियों का विश्लेषण इजरायल और अमेरिका की एजेंसियां कर रही थी। यहां पर आपको हम 60 सेकेंड के उस सीक्रेट स्ट्राइक की कहानी बताएंगे जो खामेनेई के मौत की वजह बनी। इसके साथ ही इन उलझे सवालों का जवाब बताएंगे।

तारीख 28 फरवरी 2026, सुबह का वक्त था। तेहरान के गु्प्त ठिकाने पर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लहा खामेनेई अपने कुछ खास अफसरों और सहयोगियों के साथ शहरी के दौरान आपस में बातचीत कर रहे थे। उसी वक्त अमेरिका और इजरा.संयुक्त फोर्स ने ताबड़तोड़ हमला किया और ईरान का इतिहास हमेशा के लिए बदल गया। अमेरिका और ईरान ने मिसाइल हमलों के जरिए महज 60 सेकेंड में खामेनेई का खात्मा कर दिया। जानकार कहते हैं कि यह भले ही 60 सेकेंड का मिलिट्री ऑपरेशन था। लेकिन इसकी तैयारी सालों पहले शुरू हुई होगी। खामेनेई के ठिकाने पर जिस तरह से सटीक हमला किया गया उसे आप अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की असाधारण साझेदारी कह सकते हैं। इजरायली अधिकारियों ने इसे क्लिनिकल ऑपरेशन का नाम दिया है। यहां बता दें कि खामेनेई के साथ उनके सात भरोसेमंद अफसर और उनके परिवार के करीबी सदस्य भी इस ऑपरेशन में मारे गए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीआईए की तरफ से खामेनेई पर चौबीसी घंटों नजर रखी जा रही थी। खासतौर से खामेनेई की डेली रूटीन उनकी आदतों के पर करीब से निगाह और जानकारी इकट्ठा की गई। सीआईए को जब यह पता चला कि 28 फरवरी को अमुक समय पर खामेनेई अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ मीटिंग में शामिल होंगे उसके बाद हमले की रूपरेखा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अमेरिकी और इजरायली फोर्स एक्टिव हो गईं। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल 27 फरवरी की रात हमला करने वाले थे। लेकिन इस ऑपरेशन को सुबह तक के लिए टाल दिया गया। सीआईए और मोसाद की तरफ से इनपुट दिया गया कि शहरी के समय हमला करना सबसे बेहतर होगा लिहाजा खामेनेई के क्लिनिकल ऑपरेशन को 28 फरवरी की सुबह अंजाम दिया गया।

यहां बता दें कि इजरायल ने पहले भी ईरान के वरिष्ठ कमांडरों और वैज्ञानिकों की हत्या की थी। लेकिन किसी देश के मुखिया को मारने का यह पहला मामला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को इस बात का अहसास हो चुका था कि अमेरिका और इजरायल कुछ बड़ा करने वाले हैं लिहाजा ईरानी नेताओं ने अपनी दिनचर्या और आदतों में बहुत हद तक बदलाव भी किया था ताकि उनका नेतृत्व पूरी तरह सुरक्षित रहें। ईरान के खिलाफ जिस तरह से पिछले कुछ सालों में इजरायल ने ऑपरेशन को अंजाम दिया उसमें शीर्ष नेताओं या अफसरों या वैज्ञानिकों के मोबाइल से लोकेशन को ट्रैक किया था। इससे सबक लेते हुए शीर्ष नेताओं के भरोसेमंदों और अंगरक्षकों के मोबाइल फोन पर पाबंदी लगा दी गई थी या वे फोन रखना बंद कर दिये थे। लेकिन 28 फरवरी से वो पुरानी आदतों पर अमल करना शुरू किया और यहीं से खामेनेई के खात्मे की कहानी का तानाबाना बुना गया।

खामेनेई के ठिकाने पर हमला की योजना 28 फरवरी से एक हफ्ते पहले यानी 21 फरवरी को थी। लेकिन इस अभियान में किसी तरह की चूक ना हो और इसके अलावा ऑपरेशन को अंजाम देने में तकनीकी और व्यवहारिक दिक्क्तें आ रही थी। लिहाजा उस तारीख को टाल दिया गया। हालांकि अमेरिका को इसका फायदा यह मिला कि डोनाल्ड ट्रंप को जिनेवा में राजनयिक के स्तर की बातचीत के लिए समय मिल गया। इसके साथ ही मौसम संबंधी भी दिक्कते थीं। जानकार यह भी कहते हैं कि इजरायल को मर्डर करने या कराने का शौक है। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को खत्म करने से शासन व्यवस्था को अस्थाई तौर पर पंगु बना सकता है कि लेकिन किसी देश का पतन हो जाए उसकी गारंटी नहीं है। नेतृत्व खत्म करने से शासन अस्थायी रूप से पंगु हो सकता है। लेकिन पतन की गारंटी नहीं।

खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब आगे का रास्ता क्या है। अंतरिम परिषद ने अस्थायी रूप से नेतृत्व अपने कंधों पर उठा लिया है। ईरान, खामेनेई के उत्तराधिकारी का नाम तय करने की प्रक्रिया में है। इसकी वजह से धार्मिक प्रतिष्ठान और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में अनिश्चितता का माहौल है। इन सबके बीच अहम मुद्दा यह भी है कि 60 सेकेंड को वो हमला क्या लंबे युद्ध की शुरुआत भर है। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के पूर्व प्रमुख ओडेड ऐलम ने कहा कि ऑपरेशन को अंजाम देने में भले ही 60 सेकेंड लगे हों तैयारी करने में वर्षों लगे। लेकिन मध्य पूर्व का इतिहास अगर देखें तो जो ऑपरेशन भले ही कुछ मिनटों में अंजाम दिये गए हों उसे सुलझाने में सालों साल लगे हैं और उसका कोई पुख्ता नतीजा आज की तारीख में नहीं है।

जानकार कहते हैं कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए पहले भी 100 फीसद ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन जिस तरह से किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को निशाना बनाया है वो अपने आप में अलहदा है।

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