
चीन के बढ़ते असर के बीच मोदी की श्रीलंका यात्रा, रक्षा समझौते पर बनी सहमति
प्रस्तावित समझौते पर श्रीलंका के कुछ वर्गों की आलोचना हो रही है, जिनका मानना है कि इससे बीजिंग को परेशान करने के अलावा कोलंबो की स्वायत्तता भी प्रभावित होगी।
भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक अहम समझौता होने जा रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान 4-6 अप्रैल को साइन किया जाएगा। यह कदम खासतौर पर भारतीय महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते असर को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
रिश्तों में नया मोड़
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पहले ही संकेत दिया था कि इस समझौते से भारत-श्रीलंका के रिश्तों की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। हालांकि, समझौते के विशिष्ट विवरण अभी तक गोपनीय रखे गए हैं। इस प्रस्तावित समझौते पर श्रीलंका में कुछ वर्गों द्वारा विरोध भी किया जा रहा है, जिनका मानना है कि यह कोलंबो की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है और बीजिंग के साथ रिश्तों में खलल डाल सकता है।
द्विपक्षीय समझौते
भारत और श्रीलंका के बीच कर्ज पुनर्संरचना को लेकर भी समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक और श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के बीच एक समझौता हो सकता है, जो कर्ज पुनर्गठन और मुद्रा स्वैप के लिए सहमति देगा। इसके अलावा, त्रिंकोमाली तेल टैंक फार्म के विकास के लिए भारत, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात के बीच त्रिपक्षीय समझौते की संभावना है। बिजली ग्रिड के कनेक्शन जैसे क्षेत्र में भी द्विपक्षीय समझौतों की संभावना है।
सौर ऊर्जा परियोजना की शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान त्रिंकोमाली जिले के सम्पूर में भारत द्वारा सहायता प्राप्त एक सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन होगा। इस परियोजना के पहले चरण में 50 मेगावाट की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता होगी। जबकि दूसरे चरण में 70 मेगावाट की वृद्धि की जाएगी। यह परियोजना श्रीलंका की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और देश को ऊर्जा संकट से उबारने में मदद करेगी।
मछुआरों के विवाद का समाधान
मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा दिस्सानायके दोनों देशों के मछुआरों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर भी चर्चा करेंगे। तमिलनाडु के मछुआरे आरोप लगाते हैं कि श्रीलंका के मछुआरे उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए समुद्री संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं, जिसके कारण भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी होती है। श्रीलंकाई मछुआरे इस मुद्दे पर कई बार सड़कों पर उतरे हैं और भारत पर दबाव डालने की कोशिश की है।
तमिल समुदाय की नाराजगी
श्रीलंका के तमिल समुदाय, विशेषकर विदेशों में बसे तमिल प्रवासी, मोदी की यात्रा से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि भारत को श्रीलंका से सभी सैन्य शिविरों को हटाने का दबाव बनाना चाहिए और तमिल स्वतंत्रता के लिए एक जनमत संग्रह का समर्थन करना चाहिए। इसके अलावा, वे 2008-09 के युद्ध अपराधों की अंतरराष्ट्रीय जांच का भी समर्थन करते हैं।
अनुराधापुर में मोदी की यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान अनुराधापुर में भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। 6 अप्रैल को वे महाबोधि मंदिर में पूजा करेंगे और भारत द्वारा सहायता प्राप्त दो प्रमुख परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे, जिनमें रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम शामिल है। यह यात्रा श्रीलंकाई राजनीति और सांस्कृतिक संबंधों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। क्योंकि अनुराधापुर बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और यह सिंहली-बौद्ध समुदाय का धार्मिक हृदय स्थल है।
संबंधों में नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने का अवसर प्रदान करेगी। 2023-24 में भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय व्यापार 5.5 बिलियन डॉलर के आंकड़े को छू चुका है और भारतीय निवेश 2.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि, दोनों देशों के अधिकारी मानते हैं कि इस क्षेत्र में और सुधार की संभावना है।
आर्थिक सहयोग
मोदी की यात्रा श्रीलंका के आर्थिक पुनर्निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी, खासकर जब से श्रीलंका 2022 में एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर चुका है, जिससे वहां की सरकार बदल गई थी। मोदी का यह दौरा भारत-श्रीलंका के रिश्तों को एक नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को भी मजबूती देगा।