तेल, ताकत और तनाव, खार्ग द्वीप पर अमेरिका-ईरान में बढ़ रही तनातनी
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तेल, ताकत और तनाव, खार्ग द्वीप पर अमेरिका-ईरान में बढ़ रही तनातनी

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच खार्ग द्वीप केंद्र में है। ट्रंप के बयान से हालात और बिगड़े, दोनों पक्षों ने सख्त रुख अपनाया है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अमेरिका चाहें तो खार्ग द्वीप पर आसानी से कब्जा कर सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की नजर ईरान के तेल भंडारों पर है। उनके मुताबिक, अमेरिका के पास कई विकल्प हैं, जिनमें द्वीप पर कब्जा करना भी शामिल है, हालांकि इसके लिए वहां कुछ समय तक मौजूद रहना पड़ेगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग विभिन्न सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें खार्ग द्वीप पर हमला, लारक द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित अन्य द्वीपों पर कार्रवाई जैसे कदम शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं और ईरान दबाव बनाने के लिए रणनीतिक मार्गों का इस्तेमाल जारी रखता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

वहीं, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए किसी भी सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे क्षेत्र के महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बना सकते हैं।इस बीच पाकिस्तान, मिस्र, ओमान और तुर्की जैसे देशों की मध्यस्थता से कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

खार्ग द्वीप ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है और इसे देश की आर्थिक व सैन्य ताकत की रीढ़ माना जाता है। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप वैश्विक बाजारों तक ईरान के कच्चे तेल की आपूर्ति का मुख्य द्वार है, जहां विभिन्न समुद्री तेल क्षेत्रों से पाइपलाइन के जरिए तेल लाकर बड़े टैंकरों के माध्यम से निर्यात किया जाता है।

रणनीतिक रूप से खार्ग द्वीप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से होने वाला तेल निर्यात ईरान की अर्थव्यवस्था और रक्षा तंत्र के लिए प्रमुख वित्तीय स्रोत है। इसी कारण यहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। यह द्वीप पहले भी ईरान-इराक युद्ध के दौरान हमलों का निशाना बन चुका है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और महत्व और स्पष्ट होता है।


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