
ईरान में हालात बेकाबू! शाह के बेटे की अपील- 'अब सिर्फ प्रदर्शन नहीं, शहरों पर करो कब्जा'
Iran crisis: रेजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी समर्थन की मांग की है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की है।
Iran protests: ईरान की सड़कों पर महज भीड़ नहीं है, बल्कि सत्ता विरोधी आवाजें हैं। इंटरनेट बंद है, सुरक्षा बल तैनात हैं, गोलियों और गिरफ्तारियों की खबरें हैं, लेकिन फिर भी लोग पीछे हटने को तैयार नहीं। खामेनेई के खिलाफ उठता यह आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सत्ता को खुली चुनौती बनता जा रहा है और इस बीच निर्वासित शाह के बेटे रेजा पहलवी इसे निर्णायक मोड़ देने की कोशिश में हैं।
ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ चल रहा सरकार विरोधी आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। देशभर में प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी हैं। इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को और तेज करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि अब सिर्फ सड़कों पर उतरना काफी नहीं है, बल्कि शहरों के अहम केंद्रों पर कब्जा कर उन्हें अपने कंट्रोल में लेना चाहिए।
संगठित विरोध की अपील
रेजा पहलवी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि आंदोलन को एक नए चरण में ले जाने की जरूरत है। उन्होंने देशभर में संगठित नागरिक प्रतिरोध बढ़ाने की बात कही, ताकि मौजूदा सत्ता पर निर्णायक दबाव बनाया जा सके। उन्होंने खासतौर पर परिवहन, तेल, गैस और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों और मजदूरों से देशव्यापी हड़ताल शुरू करने का आह्वान किया। पहलवी के मुताबिक, अगर इन क्षेत्रों में काम ठप होता है तो इसका सीधा असर शासन पर पड़ेगा।
मौतों और गिरफ्तारियों के अलग-अलग आंकड़े
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। 10 जनवरी तक तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 लोगों की मौत दर्ज की गई है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर कुछ रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 65 बताई गई है, जिनमें 50 प्रदर्शनकारी और 15 सुरक्षाकर्मी या सरकारी पक्ष से जुड़े लोग शामिल हैं। इसके अलावा देशभर में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई हैं। अब तक 180 शहरों में 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
विपक्ष की बड़ी आवाज बनते जा रहे रेजा पहलवी
विदेश में रह रहे ईरानियों के बीच रेजा पहलवी अब एक प्रमुख विपक्षी आवाज के रूप में उभर रहे हैं। ईरान में विपक्ष लंबे समय से बिखरा हुआ रहा है, लेकिन हालिया आंदोलन में पहलवी की अपीलों को देश के भीतर भी समर्थन मिलता दिख रहा है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि प्रदर्शन अब तक 26 प्रांतों के कम से कम 222 स्थानों तक फैल चुके हैं, जिससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है।
सड़कों पर गूंज रहे सत्ता विरोधी नारे
कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाह मुर्दाबाद” और “जाविद शाह” जैसे नारे लगाए हैं। ये नारे 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के राजशाही दौर की ओर इशारा करते हैं। मशहद शहर में एक सार्वजनिक स्थान से ईरानी झंडा हटाए जाने की घटना भी सामने आई है, जिसे सरकार के लिए एक बड़े प्रतीकात्मक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद
खामेनेई शासन आंदोलन को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर चुका है। कई इलाकों में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और “न गाजा, न लेबनान, ईरान के लिए मेरी जान” जैसे नारे लगा रहे हैं, जो देश के अंदरूनी मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग को दिखाते हैं।
ट्रंप से हस्तक्षेप की अपील
रेजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी समर्थन की मांग की है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की है। वहीं, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने बाहरी दबाव को खारिज करते हुए कहा है कि इतिहास गवाह है कि घमंडी शासकों का अंजाम हमेशा पतन ही होता है।

